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गीता मैत्री
२८ — ४१
जेलों में कक्षाएँ
50 से अधिक
जुड़े बंदी
2000 से अधिक
जुड़ी संस्थाएँ
300 से अधिक
गीता गुंजन प्रमाणपत्र
4000 से अधिक
सेवा और संगठन

गीता ज्ञान से आत्मपरिवर्तन की ओर एक राष्ट्रव्यापी प्रयास

परम श्रद्धेय गोविन्द देव गिरिजी महाराज की प्रेरणा से प्रारंभ हुआ यह अभियान आज एक आंदोलन का रूप लेचुका है, जिसका उद्देश्य केवल गीता का पाठ सिखाना नहीं, बल्कि उसके गूढ़ ज्ञान को जीवन में उतारना है।

देशभर की जेलों से जुड़े प्रतिभागियों के साथ ऑनलाइन गीता सत्संग का ज़ूम सत्र।

Group Classes के माध्यम से सामूहिक गीता कक्षाओं की चल रही एक अनूठी आध्यात्मिक यात्रा!groups.learngeeta.com

“हर घर गीता, हर कर गीता’’ यह केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि गीता परिवार का संकल्प है, जो श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य संदेश को जन-जन तक पहुँचाने केलिए समर्पित है। परम श्रद्धेय गोविन्द देव गिरिजी महाराज की प्रेरणा से प्रारंभ हुआ यह अभियान आज एक आंदोलन का रूप लेचुका है, जिसका उद्देश्य केवल गीता का पाठ सिखाना नहीं, बल्कि उसके गूढ़ ज्ञान को जीवन में उतारना है।

इसी उद्देश्य को साकार करने के लिए Groups.learngeeta.com के माध्यम से पूरे देश में विद्यालयों, सेवाभावी संस्थाओं और विशेष समूहों को जोड़ कर गीता अध्ययन की नियमित कक्षायें संचालित की जा रही हैं। यह एक अनूठी पहल है, जिसमें जेल, विद्यालय, महाविद्यालय, नेत्रहीन विद्यालय, वृद्धाश्रम, सेवाभावी संस्थान, कार्य र्यस्थल तथा प्रवासी भारतीय समूहों केलिए विशेष रूप से अनुकूल की गई कक्षाएँ चलाई जा रही हैं।

जेलों में आत्मचिंतन की लौ आज जब समाज केवल दंड की बात करता है, तब गीता परिवार उसे आत्मसुधार और विवेक की दिशा में ले जा रहा है। देश की 50 से अधिक प्रमुख जेलों में नियमित गीता कक्षाएँ संचालित की जा रही हैं, जिनका उद्देश्य है जेल को बंदियों के लिए केवल दंड का स्थान नहीं, बल्कि उनके आत्मचि चिंतन, धर्म और पुनरुद्धार का केंद्र बनाना।

राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की जेलों जैसे अजमेर, जयपुर, नासिक, तलोजा, रायपुर, जबलपुर और संभाजीनगर में इन कक्षाओं के माध्यम से अब तक 2000 से अधिक बंदी जुड़ चुके हैं। इनमें से 500 से अधिक ने गीता गुंजन परीक्षा, 50 से अधिक ने जिज्ञासु (3 अध्याय कंठस्थ), 15 ने पाठक (6 अध्याय), और 9 ने पथिक (12 अध्याय कंठस्थ) परीक्षा पूरी की है।

ज़ूम के माध्यम से 200 से अधिक “विवेचन सत्र” बंदी भाइयों केलिए चले हैं, जिनके माध्यम से बंदियों को गीता के तात्त्विक ज्ञान से जोड़ ने का सार्थ र्थक प्रयास गया है। ‘संवाद सेतु’ नामक कार्यक्रम में प्रश्नोत्तरी द्वारा गहन चर्चा की जाती है, जिससे साधकों का आत्मविकास और मार्गदर्शन संभव हो पाया है।

विद्यालयों और संस्थानों में गीता शिक्षण यह प्रयास केवल जेलों तक सीमित नहीं है। Groups.learngeeta.com के माध्यम से अब तक 300 से अधिक संस्थाएँ जैसे विद्यालय, महाविद्यालय, बालिका आश्रम, वृद्धाश्रम, विशेष रूप से सक्षम बालकों के केन्द्र, अंध विद्यालय, गर्भवती महिलाओं के समूह तथा प्रवासी भारतीयों की मण्डलियाँ इस शिक्षा से लाभान्वित हो रही हैं।

देशभर के 100 से अधिक प्रतिष्ठित विद्यालय जैसे डीपीएस भोपाल (अहमदाबाद), दयानंद वैदिक विद्यालय (मुंबई), गायत्री विद्यापीठ गुरुकुल (तिरगाँव), जाजू इंटरनेशनल स्कूल, सरस्वती शिशु मंदिर आदि इस अभियान में सम्मिलित हैं। अब तक 4000 से अधिक वि विद्यार्थियों को गीता गुंजन प्रमाणपत्र प्रदान किए जा चुके हैं।

संस्थाओं को प्रचारक, औपचारि क पत्र द्वारा आमंत्रित करते है, और फिर उनकी सुविधा के अनुकूल कक्षा का शुभारंभ कि या जाता है। यह लचीला, सहभागि तापूर्ण र्ण और नवाचारी दृष्टि कोण Groups.learngeeta.com की विशेषता है।

समर्पित स्वयंसेवकों की टीम

इस विशाल अभियान को सफल बनाने में 300 से अधिक कार्यकर्ता कार्यरत है। इसमें Trainer Department, Technical Department, Examination and Certification dept., Group coordinator dept., Group class Incharge, Vivechan Play team, Group class coordinator, ये सभी अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए गीता के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने में जुटे हैं।

समूह में अध्ययन का विशेष अनुभव

श्रीमद्भगवद्गीता जब समूह में पढ़ी जाती है, तब उसका प्रभाव कई गुना अधिक होता है। आपसी चर्चा, चिन्तन और आत्ममंथन से साधकों को अभूतपूर्व अनुभव हुए है। चाहे वह विद्यार्थी हों, गृहस्थ हों या बंदी सबको इस अध्ययन में आनंद और दिशा मिल रही है।

आइए, इस ज्ञानयज्ञ में सहभागी बनें

हर घर गीता, हर कर गीता

जय श्रीकृष्ण!

groups.learngeeta.com

राष्ट्रव्यापी गीता अभियान से जुड़ने के लिए स्कैन किया जाने वाला क्यूआर कोड।
राष्ट्रव्यापी गीता अभियान से जुड़ने के लिए स्कैन किया जाने वाला क्यूआर कोड।

अब तक 4000 से अधिक वि विद्यार्थियों को गीता गुंजन प्रमाणपत्र प्रदान किए जा चुके हैं।

50 से अधिकजेलों में कक्षाएँ
2000 से अधिकजुड़े बंदी
300 से अधिकजुड़ी संस्थाएँ
4000 से अधिकगीता गुंजन प्रमाणपत्र