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गीता मैत्री
गीता परिवार · लर्नगीता की षाण्मासिक पत्रिका
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८
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८ अंक · ८ रचनाएँ
अंक ८
जुलाई से दिसम्बर २०२४
३ मिनट पठन
अव्यक्त से व्यक्त की ओर: आध्यात्मिक दृष्टिकोण
अव्यक्त से व्यक्त होने की प्रक्रिया एक गूढ़ आध्यात्मिक विषय है, जो ध्यान, भक्ति और आत्मसंयम के माध्यम से स्पष्ट होती है।
अंक ७
जनवरी से जून २०२४
३ मिनट पठन
स्वे स्वे कर्मण्यभिरतः संसिद्धिं लभते नरः।
भगवद्गीता विजय का शास्त्र है। रणांगण में दुविधा से हतप्रद अर्जुन का गिरा हुआ गाण्डीव पुनः उसे उठाने की प्रेरणा देने हेतु तथा उसे युद्ध में विजय प्राप्त हो इस कारण से ही गीता का उद्भव हुआ।
डॉ. संजय मालपाणी
अंक ६
जुलाई से दिसम्बर २०२३
आत
३ मिनट पठन
आत्मन्येवात्मना तुष्टः
जीवन की आपाधापी में कई बार ऐसे प्रसंग आते हैं कि हमारा तनाव और रक्तचाप (Blood Pressure) बढ़ जाता है। जब तनाव में कोई निर्णय हम करते हैं तो वह निर्णय गलत होने की संभावना भी अधिक हो जाती है।
डॉ. संजय मालपाणी
अंक ५
जनवरी से जून २०२३
४ मिनट पठन
गीता सन्देश
अर्जुन ने श्रीकृष्ण को स्थितप्रज्ञ व्यक्ति को कैसे पहचानें यह प्रश्न पूछा और भगवान् ने 18 श्लोकों में यह व्याख्या समझायी। जिसमें पहले ही श्लोक में भगवान् ने कहा-
डॉ. संजय मालपाणी
अंक ४
जुलाई से दिसम्बर २०२२
३ मिनट पठन
गीता जीवन में लायें
इस श्लोक को पढ़ते समय अनेक प्रकार की आशंकायें मन में उठती हैं। क्या भगवान हमें अपने धर्म का त्याग करने को कह रहे हैं? क्या धर्म का त्याग करने पर पाप मुक्ति संभव है? क्या यही मोक्ष का मार्ग है? फिर जब…
डॉ. संजय मालपाणी
अंक ३
जनवरी से जून २०२२
सम
३ मिनट पठन
समत्व का साधन
गीता के उपदेश का मुख्य कारण था परिस्थितिजन्य भय के कारण हतोत्साहित अर्जुन को संबल प्रदान करना! भगवान अर्जुन के रथ की केवल डोर संभालने सारथी नहीं बनें थे, अपितु अर्जुन की बागडोर उन्होंने अपने हाथ में…
डॉ. संजय मालपाणी
अंक २
नवम्बर से दिसम्बर २०२१
२ मिनट पठन
समत्व की साधना
गीता के दूसरे अध्याय में योग की व्याख्या कही गयी -‘समत्त्वं योग उच्यते’! समत्व ही योग है। आगे अन्यान्य श्लोकों मे समत्व की बात करते समय भगवान ने कहा सुख-दुःख, शीत-उष्ण, मान-अपमान, निन्दा- स्तुति, ऐसी…
डॉ. संजय मालपाणी
अंक १
जून से अक्टूबर २०२१
प्
२ मिनट पठन
प्रास्ताविक
संथा कक्षा का ऑनलाइन उपक्रम लखनऊ की बेटियों ने मात्र 15-20 साधकों के साथ आरंभ किया था। मुझे अतिथिरुप में आमंत्रित किया गया था।
डॉ. संजय मालपाणी