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गीता मैत्री
अंक २
नवम्बर से दिसम्बर २०२१
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अंक २ · नवम्बर से दिसम्बर २०२१
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समत्व की साधना
गीता के दूसरे अध्याय में योग की व्याख्या कही गयी -‘समत्त्वं योग उच्यते’! समत्व ही योग है। आगे अन्यान्य श्लोकों मे समत्व की बात करते समय भगवान ने कहा सुख-दुःख, शीत-उष्ण, मान-अपमान, निन्दा- स्तुति, ऐसी…
डॉ. संजय मालपाणी