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गीता मैत्री
अंक ७
जनवरी से जून २०२४
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अंक ७ · जनवरी से जून २०२४
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स्वे स्वे कर्मण्यभिरतः संसिद्धिं लभते नरः।
भगवद्गीता विजय का शास्त्र है। रणांगण में दुविधा से हतप्रद अर्जुन का गिरा हुआ गाण्डीव पुनः उसे उठाने की प्रेरणा देने हेतु तथा उसे युद्ध में विजय प्राप्त हो इस कारण से ही गीता का उद्भव हुआ।
डॉ. संजय मालपाणी