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गीता मैत्री
गीता परिवार · लर्नगीता की षाण्मासिक पत्रिका
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८
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संपादकीय
८ अंक · ८ रचनाएँ
अंक ८
जुलाई से दिसम्बर २०२४
५ मिनट पठन
सम्पादकीय – साधु समाज प्रयाग
जो व्यक्ति संत समाज रूपी तीर्थराज के प्रभाव को प्रसन्न मन से सुनते और समझते हैं तथा प्रेमपूर्वक इसमें गोते लगाते हैं, वे इस शरीर के रहते ही धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—चारों फल प्राप्त कर लेते हैं।
अंक ७
जनवरी से जून २०२४
४ मिनट पठन
सम्पादकीय - पृच्छामि त्वाम् !
मनीषियों ने कहा है कि अज्ञान का कोई अस्तित्व नहीं होता है, प्रत्युत ज्ञान का अभाव ही अज्ञान है।
अंक ६
जुलाई से दिसम्बर २०२३
३ मिनट पठन
सम्पादकीय: राम: शस्त्रभृतामहम्
परम परमेश्वर सचिदानन्दघन भगवान श्री कृष्ण ने गीता में कहा है - राम: शस्त्रभृतामहम् अर्थात् शस्त्र धारण करने वालो में राम मैं हूँ! अद्भुत बात है भगवान कृष्ण, कृष्ण भी है एवं राम भी है।
डॉ. आशू गोयल
अंक ५
जनवरी से जून २०२३
२ मिनट पठन
सम्पादकीय
ये अंक दैवी स्वभावयुक्त गीता मित्रों को भगवान श्री कृष्ण के 16वें अध्याय में वर्णित 26 प्रकार की दैवीय संपदा को अर्जित करने की प्रेरणा देता है।
डॉ. आशू गोयल
अंक ४
जुलाई से दिसम्बर २०२२
३ मिनट पठन
समष्टि में व्यष्टि
गीता मैत्री वास्तव में गीता से मैत्री करने वालों के लिये एक ऐसा मंच है जहाँ वृत्तियों का शुभ से मिलन होता है।
डॉ. आशू गोयल
अंक ३
जनवरी से जून २०२२
सम
३ मिनट पठन
सम्पादकीय
क्या है गीता मैत्री ? एक पत्रिका ? एक पुस्तक ? गीता परिवार के कार्यक्रम लर्नगीता का लेखा-जोखा या हमारी उपलब्धियों की प्रतिकृति? इसमें हमारे गणमान्यों के संदेश-उपदेश हैं, कुछ भाग्यशालियों के छाया…
डॉ. आशू गोयल
अंक २
नवम्बर से दिसम्बर २०२१
२ मिनट पठन
सम्पादकीय
अभी ये द्वितीय अंक ही है। प्रथम अंक के बाद हमें पाठकों की अनेक प्रतिक्रियायें मिली, सुझाव भी मिले।
डॉ. आशू गोयल
अंक १
जून से अक्टूबर २०२१
सम
५ मिनट पठन
सम्पादकीय
Learngeeta प्रोग्राम का जो वर्तमान स्वरुप है इसका संकल्प पूज्य स्वामीजी महाराज ने जब दिसम्बर 2019 में गीता परिवार के कार्यकर्ताओं के सामने ‘हर हर गीता - घर घर गीता’ संकल्पना के साथ रखा, तब यह अनुमान किसी को नहीं था कि इतना शीघ्र ही यह स्वप्न साकार भी हो जायेगा।
डॉ. आशू गोयल