
सम्पादकीय
गीता मैत्री का दूसरा अंक पाठकों को समर्पित करते हुए अत्यन्त आनन्द की अनुभूति हो रही है। लर्नगीता का कार्य साक्षात् यज्ञ के समान कल्याणप्रद, आनन्दप्रद एवं इहलोक एवं परलोक दोनों को सजाने-संवारने सुधारने के साथ-साथ जीवन को सार्थकता प्रदान करने वाला कार्य प्रतीत होता है। सबसे विशेष बात ये हुई कि अति अल्पकाल में ही ये गागर सागर में परिणीत हो गया, इस कार्य के वर्तमान स्वरुप में किसी शायर की ये उक्ति यथार्थ होती नजर आती है ‘घर से अकेले चले थे, लोग मिलते गये, काफिला बनता गया’। आज इस काफिले में 126 देशों में 11 भाषायें एवं हजारों कार्यकर्ताओं के साथ अनेक विभाग खड़े हो गये हैं जैसे - एडमिशन विभाग, लेखन एवं प्रकाशन विभाग, प्रशिक्षक मैनेजमेंट, तकनीकी सहायक मैनेजमेंट, समूह संचालक मैनेजमेंट, टेली हेल्पलाइन, परीक्षा विभाग, प्रशिक्षक प्रशिक्षण विभाग, प्रूफरीडिंग विभाग, क्लास मॉनिटरिंग विभाग, आई. टी. विभाग, विवेचन विभाग, लीगल डिपार्टमेंट, बैच संचालक विभाग, गीता प्रचारक विभाग, ग्राफ़िक एवं एनीमेशन विभाग, सर्टिफिकेशन विभाग, फॉरवर्डिंग विभाग, ऑब्जरवेशन एवं फीडबैक विभाग, सोशल मीडिया विभाग, रचनात्मक लेखन विभाग आदि।
अब जब इस मंगल कार्य में ईश्वर की कृपा साक्षात् दिख रही है तो हम भी अपनी झोली छोटी क्यों रखें, अब तो अपने आगंन में अखिल विश्व चाहिये, हमारा गीता परिवार ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के घोष को जीवन्त करके दिखाये, इस ध्येय के साथ आगे बढ़ते जायेंगे। स्वामी जी महाराज के वचन ‘हर घर गीता, हर कर गीता’ को हम समस्त विश्व में सत्य चरितार्थ करेंगे।
अभी ये द्वितीय अंक ही है। प्रथम अंक के बाद हमें पाठकों की अनेक प्रतिक्रियायें मिली, सुझाव भी मिले। हमने कुछ नवीन सामग्री भी सम्मिलित की है जैसे क्रॉसवर्ड, आगामी कार्यक्रम सूची, दिसम्बर माह तक हुए सभी गीताव्रतियों की सूची एवं अंग्रेजी भाषा के कुछ लेख इत्यादि। सुधार एवं प्रगति की प्रक्रिया निरन्तर चलने वाला पथ है, हम विश्वास दिलाते हैं कि गीतामैत्री प्रेय एवं श्रेय दोनों वर प्रदान करने वाली सरस्वती बनेगी। प.पू. स्वामीजी के मंगल आशीर्वाद एवं हजारों निष्काम कर्मयोगियों का नित्य निरन्तर सहयोग एवं भगवान श्रीकृष्ण की अहेतु की कृपा गीतामैत्री को घर-घर तक पँहुचायेगी।
आप अपने विचार ईमेल द्वारा newsletter.geetamaitri@gmail.com पर प्रेषित करें। आपकी सामग्री, आपके सुझावों एवं प्रतिक्रिया की हमें प्रतीक्षा रहेगी। श्रेष्ठ सुझावों, प्रतिक्रियाओं एवं लेखों को अगले अंक में सम्मिलित किया जायेगा।
- डॉ. आशू गोयल
