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गीता मैत्री
अंक ७
जनवरी से जून २०२४
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अंक ७ · जनवरी से जून २०२४
संपादकीय
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सम्पादकीय - पृच्छामि त्वाम् !
मनीषियों ने कहा है कि अज्ञान का कोई अस्तित्व नहीं होता है, प्रत्युत ज्ञान का अभाव ही अज्ञान है।