
सम्पादकीय: राम: शस्त्रभृतामहम्
सम्पादकीय
डॉ. आशू गोयल
अन्तरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष, गीता परिवार
राम: शस्त्रभृतामहम्
'शस्त्रधारियों में राम मैं हूँ!'
परम परमेश्वर सचिदानन्दघन भगवान श्री कृष्ण ने गीता में कहा है - राम: शस्त्रभृतामहम् अर्थात् शस्त्र धारण करने वालो में राम मैं हूँ! अद्भुत बात है भगवान कृष्ण, कृष्ण भी है एवं राम भी है। आइये तनिक रामजी के शस्त्र क्या हैं उनको जान लें। जैसे भगवान कृष्ण ने युद्ध के मैदान में अर्जुन को ज्ञान दिया वैसे ही भगवान राम ने युद्ध के मैदान में विभीषण को ज्ञान दिया। उस ज्ञान में भगवान राम ने अपने शस्त्रों के बारे में जो बताया उसको तुलसीदास जी ने रामचरितमानस के लंका काण्ड में बड़ी ही सुन्दरता से वर्णन किया है
ईस भजनु सारथी सुजाना। बिरति चर्म संतोष कृपाना॥
दान परसु बुधि सक्ति प्रचंडा। बर बिग्यान कठिन कोदंडा॥
ईश्वर का भजन ही (उस रथ को चलाने वाला) चतुर सारथि है। वैराग्य ढाल है और संतोष तलवार है। दान फरसा है, बुद्धि प्रचण्ड शक्ति है, श्रेष्ठ विज्ञान कठिन धनुष है।
भगवान कृष्ण ने महाभारत के युद्ध में प्रचलित अस्त्र शस्त्रों का प्रयोग किया ही नहीं, भगवान राम के बताये शस्त्रों के बल पर ही भगवान कृष्ण ने महाभारत का युद्ध जीता। इसीप्रकार गीता परिवार भी राम जी के इन शस्त्रों का प्रयोग कर रहा है, गीता परिवार ने लर्नगीता प्रोग्राम को दिव्य रथ ही बना लिया जिसकी प्रभा 182 देशों में विस्तारित हो गयी, आज लर्नगीता में आठ हजार कार्यकर्ता नि:स्वार्थ सेवा कर रहे हैं जो रामजी की सेना के समान ही अनुपम पराक्रम कर रहे हैं। आठ लाख से भी अधिक गीता पिपासुओं को ये कार्यकर्ता गीतामृत पहुँचा रहे हैं! इस लर्नगीता कार्यक्रम के 82 विभाग ही इस रथ के तेजोमय चार घोड़े हैं जो मन
के समान गति से गीता को पूरे विश्व में घर घर एवं हर कर तक पहुँचा रहे हैं। राम जी के शस्त्रों के प्रतीक ये सभी श्रीराम के ही योगेश्वर स्वरुप के संकल्प को पूर्ण करने में लगे हैं, गीता मैत्री न्यूज़लेटर भी रामायण की तरह लर्नगीता के कार्यरूपी चरित्र को स्वयं में समेटने का कार्य करता है जो कि पूर्णत: तो संभव नहीं किन्तु अंशत: अवश्य कर रहा है। राम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं एवं उन्होंने अपना जीवन धर्म के मार्ग पर चलते हुए व्यतीत किया। वे एक उत्तम योद्धा भी थे तथा उन्होंने अपने शस्त्रों का प्रयोग मात्र धर्म की रक्षा के लिए किया। गीता परिवार का मानना है कि राम के शस्त्रों का प्रयोग केवल धर्म की रक्षा के लिए किया जाना चाहिए। गीता परिवार अपने शस्त्रों का प्रयोग केवल सत्य और धर्म को स्थापित करने के लिए करता है।
इस षष्ठम संस्करण में विदेशो में हुए गीता मैत्री समारोहों को बड़ी ही सुन्दरता से लिपिबद्ध करने का प्रयास किया गया है, साथ ही Linguistic Kaleidoscope भाग के अंतर्गत विभिन्न भाषाओं में लर्नगीता के विषय में अनेक प्रकार से लिखा गया है जो लर्नगीता पर बनी एक रंगीन फिल्म के समान प्रतीत होता है, 'Soulful Stangas' भाग में कुछ कविताओं को भी संकलित किया गया है जो विशेषरूप से गीता परिवार व लर्नगीता प्रोग्राम पर लिखी गयी हैं। आशा है पाठकों को यह संस्करण आनन्द एवं लर्नगीता की विस्तृत जानकारी प्रदान करेगा।
सुधि पाठक अगले अंक हेतु अपने लेख, चित्र अथवा अन्य सामग्री newsletter.geetamaitri@gmail.com पर भेज सकते हैं। समिति द्वारा चयनित लेख, कवितायेँ व अन्य सामग्री अगले अंक में समाहित की जायेगी।
- डॉ. आशू गोयल

