
प्रचलित नववर्ष उत्सव ‘मेरे राम’
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31 दिसम्बर, 2021 को गीता परिवार द्वारा अपना 22वाँ प्रचलित नववर्ष उत्सव हर्षों-उल्लास सहित मनाया गया। इस ऑनलाइन उत्सव का शुभारंभ एक सुंदर नृत्य-नाटिका के साथ हुआ। गीता परिवार के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ0 आशू जी गोयल ने सभी का अभिवादन व स्वागत करते हुए परम पूज्य स्वामी श्री गोविंददेव गिरि जी से आग्रह किया कि वे अपने आशीर्वचन द्वारा शुभसन्देश से सभी को अनुगृहीत करें।
परम पूज्य स्वामी जी ने इस सुंदर समारोह में सहभागी होने पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि आज हनुमान जी की कृपा से हम सालासर धाम से जुड़े हैं,जहाँ से सालों पहले यह प्रचलित नववर्ष मनाना शुरू किया गया था। परम पूज्य स्वामी जी ने कहा कि पहले हम जनवरी से आरम्भ होने वाले साल को नूतन वर्ष नहीं मानते थे परन्तु अब जब प्रचलित धारणा अनुसार सर्वत्र नया साल 1 जनवरी से ही आरंभ हो रहा है, तो यह उत्सव श्रीभगवान व हनुमान जी का स्मरण करते हुए हनुमान चालीसा के 11 पाठ के साथ, नूतन वर्ष के मध्य रात्रि में प्रवेश करते हुए मनाते हैं। इसका सूत्रपात लखनऊ की पुण्यभूमि से हुआ था। तब इसका संयोजन व नेतृत्व स्वर्गीय श्री जगदीश जी जालान ने किया था, जिन्होंने अलग अलग महापुरुषों के वेश को प्रस्तुत कर नववर्ष उत्सव मनाया था। प.पू. स्वामी जी ने इन सारे प्रसंगों को याद करते हुए कहा कि मैं नववर्ष मनाने हेतु सशंकित मन से लखनऊ आया था । कार्यक्रम में हनुमान जी पर मंचित नाटक देख उन्हें हनुमान जी की भक्ति याद आई और कहा हमें भी हनुमान की तरह ही भक्ति करनी चाहिए; भक्ति करने का प्रयास करना चाहिए जिससे कि हमारे आसपास मांगल्य निर्माण हो सके।उन्होंने आगे यह भी बताया कि विज्ञजनों का मानना है कि मनुष्य को हर रोज़ अपने जीवन का अवलोकन करना चाहिए कि आज क्या अच्छा किया, क्या गलत किया है। हमें दैनिक, मासिक एवं वार्षिक तौर पर अपना अवलोकन करते रहना चाहिए। इस सिंहावलोकन से हम अपना आकलन कर सकेंगे और सीख सकेंगे। हमसे जो अच्छे कार्य हुए उन के लिए प्रभु के प्रति कृतज्ञ रहें और जो कुछ गलत हुआ उसके लिए संकल्प करें कि वह गलती दोहराई न जाए। साथ ही किसी और की गलती को भूल जाएं । सदा यह याद रखें कि; “Forgetting is much better than forgiving” यानि गलती को माफ़ करने से बड़ा है गलती को भूल जाना। इसी तरह हमसे जो भी कार्य हुआ उसे और अच्छा बनाने का प्रयास करें। सतत समीक्षा की आदत से हमारी अपलिफ्टिंग यानी उन्नति होती है, जो चाहकर भी पशु नहीं कर पाते। इसलिए परमात्मा द्वारा दिया गया “विवेक” ही मनुष्य के लिए सबसे बड़ा उपहार है। साथ ही स्वामी रामदास की बातों को याद कर प. पू. स्वामी जी ने बताया कि विवेक से ही हम अपनी गलतियों को सुधार सकते हैं।
प.पू.स्वामी जी ने आगे कहा गीता परिवार ने जो किया है; वह वंदनीय है। गीता परिवार द्वारा जो इतना बड़ा कार्य किया गया है उससे सारे विश्व; सारा संसार आश्चर्यचकित है। गीता परिवार ने अथक लगन व मेहनत से कार्य किया है, इसमें कोई दो राय नहीं है। कोई चाहे, न चाहे पर मानव स्वभावानुसार छोटी मोटी गलती तो
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हो ही जाती है। साथ ही बताया कि नववर्ष उत्सव की सार्थकता इसी में है कि हम संकल्प करें कि हमसे आगे गलती न हो और गलतियों को सुधार अच्छे कार्य करते जाएं व दूसरे की गलतियों को भूल जाए। हमें अपने आप में यह क्षमता विकसित करनी है, तभी परमात्मा हमें उन्नति की ओर अवश्य ही ले जाएंगे। गीता परिवार ने इस मंच द्वारा हमें यह अवसर प्रदान किया है।
प.पू. स्वामी जी ने बताया कि आशू भैया विमान से उतरने के पहले हमेशा एक मैसेज भेजा करते हैं कि ‘जरा मुस्कुराइये कि आप लखनऊ में हैं।’ उनके इसी मैसेज को याद कर, स्वामी जी ने भी हमें संदेश दिया कि मुस्कुराइए कि आप गीता परिवार से जुड़े हुए हैं।
गीता परिवार हमें हँसते हँसते जीना सिखाता है। भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं मुस्कुराते हुए भगवद्गीता का उपदेश दिया है, हमें भी जीवन में सभी कार्य हँसते हुए करने चाहिए ताकि कोई भी कार्य, बोझ न लगे। इसी तरह गीता परिवार के कार्य करते रहें,गीता पढ़ते रहें,गीता को पढ़ाते रहें व गीता को जीवन में उतारें। गीता परिवार के समूह को साथ लेकर कार्य करते चले। गीता परिवार का कार्य भारत का भविष्य बनाने वाला कार्य है।
परम पूज्य स्वामी जी ने बताया कि जब वे सालासर पहुंचे तब देश के विभिन्न भागों से आए लोग उन्हें मिलते समय बताते थे ‘मैं गीता परिवार से हूँ।’ यह देखकर मैंने सोचा कि एक समय था जब मेरे नाम से गीता परिवार जाना जाता था और आज मैं गीता परिवार के नाम से मैं जाना जाता हूँ।
यह सब हनुमान जी की कृपा से ही हुआ है क्योंकि हनुमान जी के बिना गीता होती ही नहीं। कारण श्रीकृष्ण भगवद्गीता के वक्ता है, अर्जुन श्रोता हैं, परंतु हनुमान जी रथ के ध्वज पर सवार एक आदर्श पुरुष हैं। यह एक उदाहरण है कि गीता का अध्ययन करने वाला व्यक्ति कैसा होगा, हनुमान जी को गोस्वामीजी महाराज ने “सकलगुणनिधानं” का विशेषण देकर उनकी पूर्णता का परिचय करवाया। नववर्ष के इस अवसर पर हमें भी संकल्प करना चाहिए कि हनुमान जी की तरह आदर्श बनना है ।हम आदर्श तक पहुँचे या न पहुँचे,वह सोचे बिना हमें इसी आदर्श मार्ग पर चलना शुरू कर ही देना है। साथ ही इस रास्ते चलने का हमें संकल्प दिलाया। परम पूज्य स्वामी जी ने हर्षित हो कर सबको ‘वर्चुअल लड्डू’ का प्रसाद प्रदान किया और साथ ही विश्वास दिलाया कि अगर हम ऐसे ही सेवा करते रहेंगे तो निश्चित ही गीता परिवार एक ऐतिहासिक हस्ती बन जाएगा, जिसमें अब कोई भी संशय नहीं है।
अपनी वाणी को विराम देते हुए परम पूज्य स्वामी जी ने कहा कि वे हनुमान जी के चरणों में प्रार्थना करते हैं कि वे हमें, हम सबको यह शुभकार्य करने हेतु बल, बुद्धि व प्रेरणा प्रदान करें । यह प्रार्थना सफल हो, इसी शुभकामना व श्री हनुमान जी के जयघोष के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।






















