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गीता मैत्री अंक २नवम्बर से दिसम्बर २०२१
दीपोत्सव
०७आयोजन और अभियान

दीपोत्सव

5 नवंबर 2021

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कार्यक्रम का आरंभ प्रार्थना से निवेदिता जी शर्मा द्वारा किया गया।एवं मुख्य संदेश राष्ट्रीय उपाध्यक्ष गीता परिवार डॉ.आशूजी गोयल द्वारा दिया गया। दीपावली संदेश दक्षिणांचल प्रमुख, गीता परिवार के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आ. श्री हरिनारायणजी व्यास एवं दीपावली शुभकामना मध्यांचल प्रमुख आ प्रमिलाजी माहेश्वरी जी द्वारा प्रेषित की गयी।

इसके पश्चात् कुछ कार्यकर्ताओं की भी अभिव्यक्तियाँ ली गयी उसी में एक मनीष जी तोमर द्वारा प्रस्तुत कुछ पंक्तियाँ निम्न हैं –

पाठ करो तुम गीत मनोहर,
गान करो तुम गीत सरोवर
श्रेष्ठ गीत यह कृष्ण मुखी
करे सफल सर्वस्व सुखी
धेय बनाकर अर्पण कर दो।
गीतामय जीवन कर दो।

तत्पश्चात् प. पू. स्वामीजी का श्रवण सभी ने किया -

प. पू. स्वामीजी ने सभी कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवियों का मार्गदर्शन किया। इस अवसर पर प. पू. स्वामी जी ने गीता परिवार, पुणे द्वारा प्रकाशित डॉ पराग सराफ की पुस्तक “मेक योर ब्रेन सुपरफास्ट” का विमोचन भी किया तथा पुस्तक के लेखक डॉ. पराग सराफ का अभिनंदन किया । प. पू. स्वामी जी ने यह सम्बोधन पुणे से दिया । प. पू. स्वामी जी के सम्बोधन के समय गीता परिवार, पुणे के सदस्य उनकी आरती करने गये थे, परंतु प. पू. स्वामी जी ने कहा, “ मैं भगवान की आरती छोड़कर इस स्थान पर आया हूं । अन्य सभी कार्यक्रम खत्म हो गए हैं और केवल आरती होनी बाकी है। मैंने साधकों से कहा, कि आप आरती करें, मैं गीता परिवार के कार्यकर्ताओं की आरती उतारने के लिए जाता हूं। वास्तविक दीपावली आप मना रहे हैं। हमारे आसपास (कार्यकर्ता रूप में ) कई दीपक जगमगा रहे हैं, वे सब श्रेष्ठ हैं क्योंकि वे अंधेरे से संघर्ष कर रहे हैं; घने अंधकार को नष्ट कर रहे हैं।” प. पू. स्वामी जी के कार्यकर्ताओं के प्रति यह उद्गार गीता परिवार के कार्यकर्ताओं के प्रति उनके अपार स्नेह तथा प्रेम को प्रदर्शित करते हैं। इस अवसर पर प. पू. स्वामी जी ने अपनी एक कविता की दो पंक्तियां कहीं :

अगणित दीप जलेंगे ऐसे, तमस सभी ये भागेगा।
पौरुष की आहुति से भाग्य राष्ट्र का जागेगा।

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स्वयंसेवकों के प्रति अपना स्नेह भाव प्रकट करते हुए प. पू. स्वामी जी ने आगे कहा, “अपने राष्ट्र के भाग्य को जागृत करने के लिए जिस प्रकार के आत्मिक प्रदीपों की आवश्यकता होती है, वह मुझे गीता परिवार के स्वयंसेवकों में दिखती है। मुझे पता है कि गीता परिवार के लिए काम करने में कितनी असुविधाएं होती हैं। क्या क्या व्यवस्थाएं करनी होती हैं और ये सारे कार्य हमारे कार्यकर्ता किसी अपेक्षा के बिना सेवा के रूप में करते हैं। यह देखकर मन भावविभोर होता है। आपको थोड़ा विचित्र लगा होगा जब मैंने कहा कि मैं भगवान की आरती छोड़कर आप लोगों की आरती उतारने आया हूं। परंतु मेरा यह विश्वास है कि भगवान इससे अधिक प्रसन्न होंगे । श्रीमदभगवद्गीता में प्रभु ने स्वयं कहा है, ‘मैं अपने भक्तों की पूजा करने वाले से प्रेम करता हूं।‘ आप सभी कार्यकर्ता जो गीता परिवार के विभिन्न स्तरों से जुड़े हुए हैं, दिन-रात सेवा कर भगवान की ही पूजा कर रहे हैं । अतः मैं स्वयं आज आपको सम्मानित करना चाहता हूं और इसी कारण मैंने आपकी आरती उतारने का उल्लेख किया है।”

गीता परिवार के विभिन्न उपक्रम तथा ‘लर्नगीता’ कार्यक्रम के संदर्भ में प. पू. स्वामी जी ने कहा कि “हमारा अंधकार से संघर्ष करते रहना अत्यंत आवश्यक है। आज हम सबने यह देखा कि हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी ने भगवान केदारनाथ के सान्निध्य में भगवान आदि शंकराचार्य महाराज की प्रतिमा का, मूर्ति का अनावरण एवं लोकार्पण किया है। केदारनाथ धाम में यह कार्य करने का उद्देश्य है कि भगवान शंकराचार्य महाराज एक ज्योति के रूप में रहें, वह ज्योति आज भी प्रज्वलित है। यह ज्योति केवल धर्म के आधार पर प्रज्वलित है। उन पांच सूत्रों को स्मरण करते रहें जिनको हमने स्वीकार किया है। ये पांच सूत्र अत्यंत महत्वपूर्ण हैं एवं ये इस ज्योति को प्रज्वलित रखेंगे। निश्चित ही हमारे कार्यकर्ता आने वाली पीढ़ियों के लिए आदर्श होंगे।”

अपने दीपावली संदेश के लिए प. पू. स्वामी जी ने एक अत्यंत सुंदर कविता की रचना की थी, जो उन्होंने इस अवसर पर पढ़ी:

‘प्राण ही बाती है, शरीर परोपकारी दीपक है,
तरल स्नेही सात्विक मन तेल है ।।
निज विवेक की ज्योति जगाए, अपने भीतर दिया जलाए ।।
दीपावली का हर्ष बढ़ाने क्या उपहार विश्व को देंगे,
रोज दीपावली होगी जब हम स्वयं श्रेष्ठ उपहार बनेंगे ।।

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सभी स्वयंसेवकों एवं कार्यकर्ताओं को प. पू. स्वामी जी ने एक अत्यंत ओजस्वी और प्रेरणादायी संदेश दिया। आप कहते है, “ हमें स्वयं उपहार बनकर विश्व को समर्पित हो जाना चाहिए । मेरे सभी कार्यकर्ता यही कार्य कर रहे हैं। हम सब एक स्वप्न लेकर यात्रा कर रहे हैं और स्मरण रहे कि गीता के प्रचार-प्रसार का यह स्वप्न सबसे उत्तम स्वप्न है। यह हमारे धर्म, राष्ट्र,मानवता को एकत्रित करता है और सबका कल्याण करता है। ऐसा विश्व में दूसरा कोई केंद्र नहीं है। यह केंद्र केवल गीता, गीता और गीता है । इसलिए गीता की भक्ति करते रहें, गीता को प्रेम करते रहें, गीता को पढ़ते रहें, गीता को पढ़ाते रहें, गीता का प्रचार करें। यदि यह हमारे जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य बन जाए, यदि यह एकमात्र लक्ष्य बन जाए, तो आपके अंतर में गीता की ज्योति जग जाएगी । इससे आप आत्मज्योति बनकर केवल दीपक के रूप में नहीं तो दीप स्तंभ के रूप में अपने आसपास के लोगों को प्रकाश दे सकेंगे ।”

‘लर्नगीता’ उपक्रम को मिल रहे अभूतपूर्व प्रतिसाद एवं उसे सफल बनाने मे लगे सभी कार्यकर्ताओं का विशेष उल्लेख करते हुए प. पू. स्वामी जी ने कहा, “ मैं अभिभूत हूं कि आज लाखों लोग गीता परिवार से जुड़कर गीता का अध्ययन कर रहे हैं और हजारों कार्यकर्ता, तन मन धन के साथ इस कार्य में स्वयं को अर्पित कर रहे हैं। मैं आप सभी का अभिनंदन करता हूं। यह दीपावली आपके लिए सुखमय हो, प्रकाशमय हो, प्रेरणादायक हो और मैं प्रभु से प्रार्थना करता हूं कि आपका आने वाला कार्य अधिक गति से और अधिक प्रमाण में हो। जिस तरह आज अयोध्या जगमगाती है तो पूर्ण विश्व देखता है, उसी तरह पूरी दुनिया की सच्ची दीपावली तब मनाई जाएगी, जब पूर्ण वातावरण भगवद्गीता के सिद्धांतों से भर जाएगा।”

प. पू. स्वामी जी मुखारविंद से निकले इस प्रेरणादायी संबोधन से उपस्थित सभी स्वयंसेवक तथा कार्यकर्ता गीता प्रचार-प्रसार के अपने स्वीकृत कार्य के लिए प्रेरित एवं दृढ़संकल्पित हो गए। दीपावली के शुभ अवसर पर मिले इस अमूल्य उपहार से सभी उपस्थित कृतकृत्य हुए।

अंत मे समापन प्रार्थना श्रीमती निवेदिता जी के द्वारा की गई एवं कार्यक्रम को सम्पन्न किया गया।

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