०२संत वाणी
शुभकामना

गीता - मैत्री करते करते
जो वैश्विक विस्तार हुआ
उसे देख तन पुलकित एवं
मन आह्लादित खूब हुआ ।
और अभी आगे बढ़ना है
यह तो केवल एक पड़ाव
बढ़े चलो सब मिलकर मित्रों
कृष्ण भक्ति का सही बहाव ।
सभी का अभिनंदन!
- स्वामी गोविंददेव गिरि

गीता - मैत्री करते करते
जो वैश्विक विस्तार हुआ
उसे देख तन पुलकित एवं
मन आह्लादित खूब हुआ ।
और अभी आगे बढ़ना है
यह तो केवल एक पड़ाव
बढ़े चलो सब मिलकर मित्रों
कृष्ण भक्ति का सही बहाव ।
सभी का अभिनंदन!
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