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गीता मैत्री
अंक २
नवम्बर से दिसम्बर २०२१
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अंक २ · नवम्बर से दिसम्बर २०२१
गीता चिंतनिका सत्र
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गीता चिन्तनिका
दैवी प्रवृत्ति का जब उत्थान होने लगता है व आसुरी प्रवृत्ति का दमन होने लगता है तथा भगवान के दर्शन की उत्कंठा उत्पन्न होती है तथापि देह का विस्मरण होने लगता है तब परमात्मा में विलय होने की प्रक्रिया शुरु होती है।