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गीता मैत्री अंक ४जुलाई से दिसम्बर २०२२
सरल पठनीय श्रीमद्भगवद्गीता पुस्तक विमोचन
०९आयोजन और अभियान

सरल पठनीय श्रीमद्भगवद्गीता पुस्तक विमोचन

परम पूज्य स्वामी गोविन्द देव जी गिरि महाराज के कर-कमलों द्वारा पुण्य सलिला पतित पावनी गंगा मैया के तट पर वानप्रस्थ आश्रम, ऋषिकेश में “सन्त श्री ज्ञानेश्वर गुरुकुल” चिन्तन शिविर में गीता-परिवार द्वारा प्रकाशित “सरल पठनीय गीता” पुस्तक का विमोचन हुआ ।

Easy to Read Śrīmad-Bhagavadgītā Book Launch - 2/08/22

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सरल पठनीय गीता पुस्तक का विमोचन, 2 अगस्त 2022, वानप्रस्थ आश्रम, ऋषिकेश

पूज्य स्वामी जी ने भगवती शारदा की वन्दना “या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता” के साथ “अनुस्वार,विसर्ग और आघात पद्धति पर आधारित” इस सुन्दर सरल पठनीय गीता के प्रकाशन की विधिवत् घोषणा, गीता परिवार की संस्थापिका श्रीमती ललिता मालपाणी जी के साथ मिल कर की। इस शुभ अवसर पर बोलते हुये गीता परिवार के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. आशु गोयल जी ने कहा कि “दीर्घ काल से गीता सीखने वाले जिस समय की प्रतीक्षा रहे थे,वह समय आज आ गया और हम सबका स्वप्न आज साकार हो गया । गीता कैसे पढ़ी जाय- ऐसी सरल पठनीय गीता का प्रकाशन “गीता-परिवार” के लिये गौरव के क्षण हैं और हम सभी इन क्षणों का हिस्सा बन रहे हैं। इस घटना को गीता परिवार के इतिहास में स्वर्णाक्षरों से लिखा जायेगा और गीता-परिवार का यह कदम समग्र विश्व के लिये भी क्रान्तिकारी कदम होगा।”

उन्होंने कहा कि आगामी 3-4 दिनों में ही पुस्तक की प्रतियाँ “amazon.com” पर उपलब्ध होंगी ।

उन्होंने इस शुभ अवसर पर परम पूज्य स्वामी जी से आशीर्वचन कहने का अनुरोध किया ।

स्वामी जी ने सर्वप्रथम गीता परिवार के उन सभी कार्यकर्ताओं को धन्यवाद और बधाई दी जिनके अथक प्रयास और श्रम से यह ग्रन्थ तैयार किया गया। उन्होंने कहा कि जिस किसी ने भी धन से, श्रम से, मन से अथवा अन्य किसी भी प्रकार से इस महान कार्य-यज्ञ में अपनी आहुति दी है, वह सभी धन्यवाद के पात्र हैं। उन्होंने इस अवसर पर “लर्न गीता प्रोग्राम की कोऑर्डिनेटर्स” तीनों दीदी-

ज्योति शुक्ला, रूपल शुक्ला और कविता वर्मा को मंच पर आमन्त्रित कर उन्हें बधाई देते हुये इस पुस्तक की एक-एक प्रति आशीर्वाद के रूप में दी ।

इस अवसर पर स्वामी जी ने कहा कि गीता परिवार ने न केवल गीता का प्रचार-प्रसार किया है बल्कि जिन गहराइयों के साथ किया है वह प्रशंसनीय है । यह सम्पूर्ण भारत को संगठित करने का कार्य है। भारत की वास्तविक राष्ट्र-भाषा तो संस्कृत ही है। गीता केवल भारत का ही ग्रन्थ नहीं - यह समग्र विश्व का ग्रन्थ है। उन्होंने इस अवसर पर राजस्थान धरा के महात्मा पूज्य स्वामी सोम गिरि जी महाराज का भी स्मरण किया जिन्होंने सर्वप्रथम “सुगम गीता” का प्रकाशन किया था। उन्होंने कहा कि उसी समय से उनकी यह सुप्त इच्छा थी कि इस प्रकार की सरल और सुगम गीता साधकों के कल्याणार्थ प्रकाशित की जाय और आज इस पुस्तक के प्रकाशन ने उनकी इसी इच्छा को जाग्रत किया है।

इस अवसर पर उन्होंने आशु भैया की धर्मपत्नी श्रीमती पूजा आशू गोयल को मंच पर बुलाकर उन्हें उनके जन्मदिन बधाई देते हुये उनका अभिनन्दन किया और आशीर्वाद दिया ।

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मूल अंक, पृष्ठ ३४मूल अंक, पृष्ठ ३५