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गीता मैत्री अंक ४जुलाई से दिसम्बर २०२२
१५काव्यांजलि

स्वामी जी का दिव्य नाम

स्वामी जी का दिव्य नाम

!! परम पूज्य गुरुदेव गोविंदगिरिजी महाराज !!

प - परम पूज्य गुरुदेव जी को प्रणाम करते हम।
पू - पूजनीय उनका कार्य विश्वरूप बन रहा है।
गु - गुरुजी की वाणी हमें गीता ज्ञान समझाती है।
रु - रुक्ष जीवन में उल्हास की आशा जगाते हैं।
दे - देश विदेश में गीता ज्ञान का प्रचार कर रहे हैं।
व - वचन हम देते हैं कि आपकी गीता की पताका सदा फहरायेंगे।
गो - गोविंद-कृष्ण-राम- हरि सभी है आपमें।
वि - विज्ञान युग से गीता जोड़ी है आपने ।
द - दस दिशाओं में गीता गुंजन हो रहा है।
गि - गिरी कंदराओं में गीता ज्ञान पहुँच रहा है ।
री- रीति - निति सत्य पर यह कार्य हो रहा है ।
जी - जीवन में सभी को परीवर्तन दिख रहा है ।
म- महान गीता, महान गुरुदेव का यह कार्य ।
हा - हाँ! हम जन जन तक पहुँचायेंगे।
रा- राम राज्य की स्थापना करके विश्व में शांति बनायेंगे ।
ज- जय-जय कार महान गुरुदेव का आशिष हम पायेंगे ।

~ रजनी प्रकाश पाटील धुळे, महाराष्ट्र

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मूल अंक, पृष्ठ ४७