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गीता मैत्री अंक ४जुलाई से दिसम्बर २०२२
भगवद्गीता व्याकरण कक्षायें (Geeta Grammar Session)
०७पाठ्यक्रम और परीक्षाएँ

भगवद्गीता व्याकरण कक्षायें (Geeta Grammar Session)

Level 1 – Geeta Grammar Class - Hindi & English

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दिनांक 29 जुलाई 2022 को रात्रि 8:30 से 10:00 बजे तक L-1 स्तर के ऐसे साधक जिन्होंने एक अध्याय 12 को गीता परिवार द्वारा प्रमाणित शिक्षकों से पढ़ना सीखा है उनके लिये अंग्रेजी तथा हिंदी माध्यम में अलग-अलग संस्कृत व्याकरण कक्षा एवं शंका निवारण सत्र का आयोजन किया गया। अंग्रेजी भाषा में गीताव्रती एवं गीता प्रवीण कविता वर्मा दीदी तथा हिंदी भाषा में गीता व्रती एवं गीता प्रवीण रूपल शुक्ला दीदी ने कक्षाएं ली। गीता परिवार के गीत "ईश्वर भक्ति भाव से बहती संस्कारों की धारा, भारत माँ की सेवा में गीता परिवार हमारा" से कक्षा प्रारंभ हुई।

संस्कृत भाषा को संसार की प्रथम भाषा माना जाता है। किसी समय संस्कृत भाषा का प्रयोग क्षेत्र अत्यंत विस्तृत था । यदि संसार की समस्त भाषाओं के नवीन और प्राचीन स्वरूपों की तुलना की जाये तो स्पष्ट ज्ञात होगा कि संसार की सब भाषाओं का आदि मूल संस्कृत भाषा ही है। गीता जी को संस्कृत में शुद्ध उच्चारण से पढ़ने के लिये व्यक्ति को संस्कृत भाषा के सामान्य व्याकरण की जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है। गीता जी को संस्कृत में और वह भी शुद्ध उच्चारण के साथ पढ़ने में जो आनंद और ऊर्जा का अनुभव होता है, वह लंबे समय तक और स्थिर रूप से हमारे अंदर रहता है । हमारी आत्मा प्रसन्नता की पराकाष्ठा का अनुभव करती है ।

व्याकरण का दूसरा नाम शब्दानुशासन है जिससे हम शब्दों को अनुस्वार, आघात, विसर्ग आदि के नियमानुसार पढ़ पाएं। हालांकि व्याकरण बहुत विस्तृत है गीता जी पढ़ने के लिये हमें इतना गहन अध्ययन नहीं करना है। यहाँ उतना ही सिखाया जाता है कि हम गीता जी शुद्ध उच्चारण से पढ़ सकें, जो कृष्ण भगवान ने शब्द कहे हैं, वह अपने मुख से भी निकल सकें।

संस्कृत व्याकरण के नियम गणित के नियमों की तरह ही सूक्ष्म एवं वैज्ञानिक हैं । गणित का जितना अभ्यास किया जाये उतनी ही प्रवीणता आती है, उसी प्रकार गीता जी का भी जितना अधिक बोल बोलकर अभ्यास किया जाये उतना ही उच्चारण शुद्ध होता जाता है । आदरणीय सुवर्णा काकी जी के ऑडियो को गंभीरता से सुनें और स्वयं अभ्यास करते जाएं ।

वेद स्वयं कहते हैं -

देवीं वाचमजनयन्त देवास्तां विश्वरूपाः पशवो वदन्ति।

अर्थात् देव जिस दिव्य वाणी को प्रकट करते हैं, साधारण जन उसी को बोलते हैं।

इस प्रकार गीता व्याकरण कक्षाओं का नियमित रूप से समय-समय पर आयोजन किया जाता है ताकि गीता साधक व्याकरण समझकर शुद्ध उच्चारण सीख सकें ।

Level 2 – Geeta Grammar Class – Hindi & English

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दिनांक 8 जुलाई 2022 को रात्रि 8:30 बजे से L-2 स्तर के गीता साधकों के लिये अंग्रेजी तथा हिंदी माध्यम में संस्कृत व्याकरण कक्षाओं तथा शंका समाधान सत्र का आयोजन ज़ूम एप तथा यू ट्यूब पर किया गया। "ईश्वर भक्ति भाव से बहती संस्कारों की धारा, भारत मां की सेवा में गीता परिवार हमारा" इस गीत से कक्षा का श्री गणेश हुआ । उसके बाद गौमाता तथा कान्हा के बीच वार्तालाप की बहुत ही सुंदर एनिमेशन फिल्म के द्वारा लोगों को गीता जी शुद्ध उच्चारण से सीखने के लिये गीता परिवार में रजिस्ट्रेशन के लिये प्रेरित किया गया । "सद्गुणों की साधना में - ध्येय ज्योति नित्य जले" गीत हुआ । जून 2020 से अब तक 131 देशों के 4 लाख से अधिक गीता प्रेमी साधकों को गीता की कक्षाओं में प्रवेश दिया गया है। प्रातः 5:00 बजे से रात्रि 2:00 बजे तक 40 मिनट के 18 टाइम स्लॉट्स में तथा 12 भाषाओं में गीता परिवार द्वारा निःशुल्क गीता जी का सस्वर शुद्ध उच्चारण ज़ूम एप पर सिखाया जा रहा है ।

गीता जी को संस्कृत में पढ़ने से कतराने वाले व्यक्ति 2 अध्याय संस्कृत में अच्छी तरह पढ़ने के बाद एवं गीता परिवार के पूज्य स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज से गीता गुंजन प्रमाण पत्र पाकर जोश एवं उत्साह से भर जाते हैं । अतः आगे के अध्याय में काम आने वाली व्याकरण को समझाने के लिये L-2 स्तर के साधकों के लिये इन कक्षाओं का आयोजन किया गया।

हिंदी भाषा में संचालिका अनुजा भट्टड दीदी ने संस्कृत के प्रकांड पंडित आचार्य श्री नारायण शेटे कोयंबटूर को व्याकरण कक्षा हेतु आमंत्रित किया । अंग्रेजी भाषा में एंकर आर्या इंदानी दीदी ने गीता व्रती एवं गीता प्रवीण दोनों दीदी कविता वर्मा जी एवं रूपल शुक्ला जी को व्याकरण कक्षा हेतु आमंत्रित किया । दोनों ही दीदी पूज्य स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज की विशेष कृपा पात्र शिष्याएं हैं।

प्रारंभ में कविता दीदी ने बताया कि L-2 स्तर की व्याकरण कक्षा L-1 की अपेक्षा कुछ विस्तृत है एवं आगे L-3 एवं L- 4 में जाने वाले साधकों के लिये व्याकरण इससे भी कुछ विस्तृत होगी जो आपको उस समय सिखायी जायेगी । रूपल शुक्ला दीदी ने बताया कि कौन सा अक्षर मुख के कौन से भाग से निकलना चाहिये यह बहुत महत्त्वपूर्ण है । कंठ, तालु , मूर्धा, दंत और ओष्ठ का सही सही उपयोग करने से ही हम शुद्ध उच्चारण कर सकते हैं। उच्चारणस्थानानि चित्र से अच्छी तरह जानकारी प्रदान की गयी । आधात और संधि के नियम भी साधकों को बताये गये। इस प्रकार से L-2 स्तर के साधकों के लिये व्याकरण कक्षाओं का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया एवं साधकों की शंकाओं का समाधान भी किया गया।

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