गीता मैत्री मिलन - मुम्बई

गीता मैत्री मिलन
मुम्बई
गीता परिवार का मैत्री मिलन गत 10 जुलाई 2022, रविवार को प्रातः 10.30 बजे से अपराह्न 12.30 तक रवीन्द्र नाट्य मन्दिर, प्रभा देवी, मुम्बई में सोल्लास आयोजित किया गया। आषाढ़ी एकादशी के पावन दिन जब कि चतुर्मास का प्रारम्भ होता है और भगवान विट्ठल के दर्शन हेतु पंढरपुर की यात्रा प्रारम्भ होती है, इस मैत्री मिलन का भव्य आयोजन अपने आप में दिव्य था। गीता परिवार के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ संजय मालपाणी ने मुख्य अतिथि के रूप में “वारी” के साथ गीता परिवार के कार्यकर्ताओं के साथ वारी के भजन “ध्वजा वैष्णवाँ की….” का गायन करते हुये करतल ध्वनि के बीच सभागार में प्रवेश किया ।
गीता परिवार के अभिभावक और “हेमा फ़ाउण्डेशन के संस्थापक श्री महेंद्र जी काबरा ने श्री संजय जी मालपाणी के साथ दीप-प्रज्वलन किया। साथ में गीता परिवार, मुम्बई की अध्यक्षा डॉ गायत्री पाण्डवा और गीता परिवार की पश्चिम भारत की उपाध्यक्षा अंजलि तापडिया जी, पुणे भी उपस्थित थीं। श्री काबरा जी ने श्री संजय मालपाणी जी का और गायत्री जी ने अंजलि दीदी का सम्मान किया।
डॉ गायत्री पाण्डवा ने अपने स्वागत - भाषण में कहा- “सकृतं गीतामिष्टं सकलमलनाशनम्।”
अंजलि दीदी ने “गीता परिवार” के उद्देश्य और क्रिया-कलापों पर प्रकाश डालते हुये “मधुबन ख़ुशबू देता है, सागर पानी देता है” को चरितार्थ किया। उन्होंने बतलाया कि वे किस प्रकार के सेवा - प्रकल्पों में कार्यरत हैं। उन्हें उनके सेवा - कार्य के लिये कई पुरस्कार भी मिल चुके हैं।
इसके पश्चात् सभागार में उपस्थित सभी “गीताव्रती” साधकों का मंच पर बुला कर डॉ संजय मालपाणी जी द्वारा- “आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतोऽदब्धासो अपरितासउद्भिदः।
देवा नो यथा सदमिद् वृधे असन्नप्रायुवो रक्षितारो दिवे दिवे॥" - मन्त्रोच्चार के मध्य सम्मान किया गया। तत्पश्चात् आज़ादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर “गीता परिवार” द्वारा आयोजित “सूर्य नमस्कार” में भाग लेने वाले स्कूलों - यथा सेन्ट मेरी स्कूल, बिरला स्कूल, भागूभाई स्कूल आदि के प्रतिनिधियों का भी सम्मान किया गया ।


कार्यक्रम की संचालिका श्रीमती नमिता मेहरा ने संजय भैया का आभार व्यक्त करते हुये उनसे साधकों के मार्गदर्शन हेतु उन्हें सम्बोधित करने का आग्रह किया।
संजय भैया ने बताया कि हमारे परम पूज्य स्वामी जी श्री गोविन्द देव गिरि जी महाराज का जीवन और आचरण कितना सादगीपूर्ण है। वे विद्वान और योगी दोनों ही हैं। उनकी प्रेरणा से “गीता-परिवार” का यह रथ कोरोना काल में “ऑनलाइन संथा वर्ग” के रूप में चल पड़ा और हम प्रतिदिन नये आयाम बनाते जा रहे हैं और यह परिवार एक वट-वृक्ष के रूप में निरन्तर बढ़ रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि पूज्य स्वामी जी की प्रेरणा से वे पहले “गीताव्रती” बने जबकि आज जैसी सुविधाएँ उस समय नहीं थीं।
उन्होंने कहा कि गीता नकारात्मकता से बाहर निकालने वाला ग्रन्थ है। हमारे शरीर में जो मूलाधार चक्र की धारा बाहर की ओर बहती है, उसे गीता अन्दर करना सिखाती है। यही धारा जब उलटी होकर अन्दर की ओर जाती है तो “राधा” बन जाती है। यही “राधा” बनना ही गीता का योग-शास्त्र है। यह ज्ञान और विज्ञान का शास्त्र है। यह विजय का शास्त्र है और इसके जीवन-मूल्यों को बालकों तक ले जाना होगा। उन्होंने “योगः कर्मसु कौशलम्” का उद्घोष करते हुये गीतासेवी कार्यकर्ताओं के ग्यारह की संख्या का समूह हर अंचल में बनाने पर बल दिया ।
श्री महेन्द्र काबरा जी ने अपने धन्यवाद-ज्ञापन में सभी आगन्तुकों, संचालकों और सहयोगियों का धन्यवाद करते हुये अपने वक्तव्य को इन पंक्तियों के साथ समाप्त किया-
“आज आवश्यकता है मानव को, आध्यात्मिक उपचार की,
संस्कार है एकमात्र औषधि, व्याकुल संसार की।”
इसके बाद प्रश्नोत्तर सत्र आरम्भ हुआ जहाँ संजय भैया ने सभी प्रश्नकर्ता साधकों के विभिन्न प्रश्नों का सन्तोषजनक उत्तर देते हुये आगामी दीपावली के तुरन्त बाद संगमनेर में कार्यकर्ताओं और साधकों के “तीन दिवसीय चिन्तन शिविर” की घोषणा की जिसका सभी ने उल्लास के साथ करतल ध्वनि से स्वागत किया।
समापन प्रार्थना “गीता प्रचारक समिति” के सदस्य श्री मनोज भैया ने अपनी मधुर ध्वनि में की ।
इसके पश्चात् सभी जनों को प्रसाद ग्रहण करने का आग्रह किया गया । इस प्रकार यह भव्य मैत्री मिलन सम्पन्न हुआ ।




