
गीता जयन्ती उत्सव
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ॥4.7॥
परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्।
धर्मसंस्थापनार्थाय संभवामि युगे युगे।। 4.8।।
गीता के 4 अध्याय के 6, 7 और 8वें श्लोक में भगवान ने जो वचन देकर हम सभी को आश्वस्त किया है, उन वचनों को हम कलयुगी मानवों को साक्षात् घटित होते हुये देखने का उत्तम अवसर मिला। गीता जयंती के विश्वव्यापी वृहद् आयोजनों में जब गीता परिवार के एक आवाह्न पर देश और विदेश से जुड़े लाखों साधकों ने 3 और 4 दिसंबर को धूम-धाम से गीता जयंती मनाई।
गीता जयंती - मोक्षदा एकादशी!
प्रकृति और परमात्मा को सर्वोपरि मानने वाले हम सनातन संस्कृति के लोगों ने पेड़, नदी, पहाड़, सूर्य, चंद्र, पृथ्वी, नक्षत्र, पशु एवं पक्षी आदि अनेक अवयवों को आदर दिया है, अनेक पूजन कर्म में, त्यौहारों में उनकी विशेष आराधना भी की है।
किन्तु एक पुस्तक, एक धर्म ग्रंथ की पूजा उसकी जयंती मनाई जाती है। यह विषय ही कुछ अलग दिखता है, आखिर यह मामला है क्या? हममें से अनेक लोगों ने तो शायद यह पहली बार ही सुना होगा !
जी हाँ हम बात कर रहे हैं विश्व के महानतम ग्रन्थ श्रीमद्भगवद्गीता के प्राकट्य दिवस की और उसे अत्यंत ही विशाल भव्य रूप में विश्वभर में मनाने हेतु जुटे लाखों साधकों की। हमनें इस आयोजन में भगवान के विराट रूप का दर्शन किया जिसका वर्णन हम 11वें अध्याय में पढ़ते हैं।
पश्य मे पार्थ रूपाणि शतशोऽथ सहस्रशः।
नानाविधानि दिव्यानि नानावर्णाकृतीनि च ॥5॥
"तुम मेरे सैकड़ों और हजारों अद्भुत दिव्य रूपों को विभिन्न आकारों और बहुरंगी रूपों में देखो।"
आखिर हृदय को अनेक आह्लादित स्पंदनों से भर देने वाला, मस्तक को गर्व से खड़ा कर देने वाला, आखों को प्रेम एवं श्रद्धा के भाव अश्रुओं से भर देने वाला यह अद्भुत दृश्य प्रकट किस प्रकार हो पाया !!!
आइये इसके संबंध में संक्षिप्त जानकारी प्राप्त करते हैं -
भगवान् कहते हैं कि मैं अपनी प्रकृति को अधीन करके अपनी योगमाया से प्रकट होता हूँ और हमारे आराध्य श्रीकृष्ण ने अपनी योगमाया से इसकी प्रेरणा दी। हम सभी के प्रेरणा स्तोत्र एवं गीता परिवार के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आदरणीय डॉ. संजय मालपाणी भैय्या जी ने 28.09.2022 को गीता के परम प्रचारकों के मन में विशाल रूप में गीता जयंती मनाने की चिंगारी दी।
इस चिंगारी को लेकर गीता परिवार की पूरी कार्यकारणी अपने-अपने कार्यों में लग गयी और जुट पड़ी गीता परिवार की वानर सेना राम सेतु निर्माण में। जिसके हिस्से जो आया उसने वह काम पकड़ लिया।
इस कार्यक्रम में 800 से अधिक रजिस्ट्रेशन हुये। लगभग 1,00,000 लोगों ने गीता पारायण किया। इस अवसर पर देश विदेशों में विभिन्न स्थानों पर अनेक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया जैसे - नाटिका, चिंतन, रंगभरो प्रतियोगिता, गीता ज्ञानपति प्रतियोगिता आदि। प्रभात फेरियाँ भी निकलीं। गीता पठन की प्रतियोगिताएँ भी हुईं। घर, मंदिर, उद्यान, सभागृह, पाठशाला आदि स्थानों पर गीता जयंती के कार्यक्रम मनाये गये हैं।




