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गीता मैत्री अंक ३जनवरी से जून २०२२
१५आओ गीता खेलें

मिलान करें (उत्तर)

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श्लोकअध्याय क्रमांक
न मे भक्तः प्रणश्यति9.31
शिष्यस्तेऽहं शाधि मां त्वां प्रपन्नम्2.7
सुखदुःखे समे कृत्वा2.38
जहि शत्रुं महाबाहो3.43
संभवामि युगे युगे4.8
पण्डिताः समदर्शिनः5.18
युक्त आसीत मत्परः6.14
देवदेव जगत्पते10.15
सहस्रबाहो भव विश्वमूर्ते11.46
सर्वकर्मफलत्यागं12.11
मामेकं शरणं व्रज18.66
ततो याति परां गतिम्16.22
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मूल अंक, पृष्ठ ६०