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गीता मैत्री अंक ३जनवरी से जून २०२२
०५विभिन्न समारोह

स्वागत समारोह: जनवरी स्तर–1 (L1)–15वाँ बैच

स्वागत समारोह

जनवरी स्तर–1 (L1)–15वाँ बैच

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Learngeeta कार्यक्रम के अंतर्गत स्तर-1 के 15वें बैच का शुभारंभ प. पू. स्वामी गोविंददेव गिरि जी महाराज व पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती जी के सान्निध्य में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का आरम्भ गीता परिवार के बाल कलाकारों द्वारा किया गया। बालकों द्वारा कार्यक्रम में सुंदर नृत्य व योग की प्रस्तुति की गई। सुंदर प्रस्तुति ने सभी का मन मोह लिया। ईश्वर भक्ति भाव से बहती संस्कारों की धारा, भारत माँ की सेवा में गीता परिवार हमारा। सुंदर गीत ने कार्यक्रम के वातावरण को मंत्रमुग्ध कर दिया यह गीत भारत माँ की सेवा में है।

आरंभिक प्रार्थना से कार्यक्रम का आरम्भ किया गया। उसके उपरांत ध्रुव एकेडमी, संगमनेर के बालकों द्वारा नृत्य के साथ सुंदर दीप प्रज्ज्वलन किया गया। गीता परिवार के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष एवं राष्ट्रीय योग फेडरेशन के उपाध्यक्ष आ. संजय भैया मालपाणी ने कार्यक्रम में सभी का स्वागत किया। संजय भैया ने अभिनंदन करते हुए कहा यह अत्यंत हर्ष की घड़ी है कि आज गीता परिवार और एक कदम आगे बढ़ा रहा है।

L1 के नए 15वें बैच के साथ लगभग 120 देशों से लोग जुड़ चुके हैं। प. पू.गोविंददेव गिरि जी महाराज के मार्गदर्शन में गीता परिवार गत 35 वर्षों से कार्यरत है। इस करोना काल को भी संकट ना मानते हुए इसको भी एक अवसर माना और भगवद्कृपा ऐसी रही कि केवल भारत में ही नहीं अन्य देशों में भी हम गीता का प्रचार और प्रसार कर पाए। संजय भैया ने 15वें बैच में सभी का स्वागत किया और कहा गीता परिवार के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. आशू गोयल भैया ने लर्नगीता उपक्रम को सम्पूर्ण सारथ्य प्रदान किया है, इन्होंने दिन-रात एक कर गीता के इस उपक्रम को बिना थके, बिना रुके आगे बढ़ाया है। तत्पश्चात संजय भैया द्वारा पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती जी का एवं परम पूज्य स्वामी जी का स्वागत किया गया तथा आदरणीय आशू भैया को कार्यक्रम की बागडोर सौंपते हुए कार्यक्रम को आगे बढ़ाने का निवेदन किया गया।

आशू भैया ने साध्वी भगवती जी एवं परम श्रद्धेय गोविंददेव गिरि जी के चरणों में प्रणाम करते हुए 15वें स्तर 1 के स्वागत समारोह में सभी का पुनः स्वागत किया। करोना की त्रासदी में गीता परिवार में भगवद्गीता

सिखाने के इस उपक्रम की शुरुआत हुई। भारत के अतिरिक्त गीता परिवार UAE, गीता परिवार USA, गीता परिवार Canada, गीता परिवार जर्मनी में भी अब कार्य आरम्भ हो रहा है। हमारे कार्यकर्ता जो वहाँ के समय में उपलब्ध हैं वे सभी कार्यरत होकर इस कार्य को संभाल रहें हैं। सभी लोग गीता की सेवा में लग गयें, भगवान की कृपा से यह कार्य निरंतर प्रचारित एवं विस्तारित होता चला गया। 13 समय सत्र एवं 11 भाषाओं में कक्षायें संचालित हो रही है।

गीता जी पर साप्ताहिक विवेचन संचालित होते हैं जिनमें सप्ताह भर पढ़ाए गए अध्यायों का अर्थ और उसे दैनंदिन जीवन में कैसे उतारा जाए उदाहरण के साथ समझाया जाता है। उन्होंने कहा कई लोग अपने जीवन में व्यथित थे उनको भी गीता जी का पठन करने से समाधान प्राप्त हुआ। नश्वर संसार से हमारा मोह कैसे कम करें इसकी ओर भी लोगों की दृष्टि आने लगी।

परम पूज्य स्वामी जी के अनुग्रह से एवं हमारे संतो के अनुभव से यह कार्यक्रम आगे बढ़ पाया एवं यह उपक्रम संपूर्ण रुप से संचालित हो पाया।

आदरणीय आशू भैया ने सभी 30,000 साधकों को गीता जी संस्कृत में शुद्ध रूप से सिखाने का संकल्प दोहराया।

इसके उपरांत संजय भैया ने परम पूज्य स्वामी गोविंददेव गिरि जी महाराज को निवेदन किया कि वह साधकों को संबोधित करें एवं आशीर्वाद प्रदान करें।

पूज्य स्वामी जी ने कहा मुझे 15वें वर्ग के शुभारम्भ कार्यक्रम में सम्मिलित होने में अत्यंत आनंद हो रहा है क्योंकि मेरे समक्ष सभी संतो की प्रिय साध्वी भगवती सरस्वती जी हैं जिनका मैं गीता परिवार में स्वागत कर रहा हूं। परम पूज्य स्वामी जी ने कहा भगवद्गीता के 18वें अध्याय में लिखा है कि जो लोग गीता को पढ़ायेंगे वे मुझे अत्यंत प्रिय होंगे। भगवान की भक्ति करने का भगवान के प्रिय होने का कोई एक सरल व सुगम साधन है तो वह है श्रीभगवद्गीता। अत: यथावत गीता को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करें। स्वामी जी ने कहा गीता परिवार के सभी साधक एवं कार्यकर्ता जो नि:स्वार्थ इस कार्य में निरंतर लगे हुए हैं उनका मैं अभिवादन करना चाहता हूँ। परम पूज्य स्वामी जी ने कहा वेदांत को पढ़कर सिंह का निर्माण होना चाहिए। सिंह सर्वत्र फैलकर सेवा में लग जाना चाहिए, ऐसे सिंह निर्माण कैसे होंगे, ऐसे सिंह निर्माण भगवद्गीता के चिंतन से एवं प्रचार से होंगे । स्वामी जी ने कहा मैं जहाँ भी जाता हूँ आश्चर्यचकित हो जाता हूँ। मुझे गीता परिवार के साधक मिलते हैं उनको मैं पहचानता भी नहीं पर वह सब मुझे पहचानते हैं और वह प्रसन्न कर देते हैं वह भी प्रसन्न हो जाते हैं। कोई

कहता है Level 2 में पढ़ रहा हूँ, कोई कहता है मैं Level 4 में पढ़ रहा हूँ। सभी कहते हैं गीता परिवार में सम्मिलित होकर वे अत्यंत आनंदित हैं। अन्य देशों की बहनों को गीता परिवार ने संस्कृत भाषा के शुद्ध उच्चारण में सिखाया। वे सभी प्रफुल्लित और आनंदित है, यह देखकर व सुनकर मैं स्वयं भी प्रसन्न हो जाता हूँ।

सर्वत्र इस प्रकार का वातावरण हैं। भगवान कहते हैं कि जो इस तरह के कार्य कर रहे हैं, मैं उनके सभी दुःखों को मिटा देता हूँ ,मेरी दृष्टि उन पर होती है। भगवान कहते हैं अभी तुम डरो नहीं, मैं सर्वदा तुम्हारे साथ हूँ। इन सब लोगों में संजय भैया है, आशू भैया है तथा सभी कार्यकर्ता हैं जिन्होने यह योग्य कार्य किया है इसे ही आत्मसंयमयोग कहते हैं। स्वयं के ऊपर विजय प्राप्त किए बिना हम लोगों तक नहीं पहुंच सकते हैं आत्मसंयमयोग हमें स्वयं के ऊपर नियंत्रण करना सिखाता है।

भगवद्गीता का छठा अध्याय गीता को जानने की कुंजी है। अगर आपने छठे अध्याय को समझ लिया तो कोई भी कार्य करने का फल आपको मिलेगा क्योंकि यह मास्टर चाभी है। भगवद्गीता महाभारत का सार होने के कारण विशाल रूप में हमको दर्शन देती है। स्वामी विवेकानंद जी की महत्ता उनके वेदांत में नहीं थी, वेदांत उन्होंने बहुत अच्छे से पढ़ा था और वे एक इतिहासकार थे क्योंकि वह भारत का भूतकाल, भविष्यकाल , वर्तमानकाल की समीक्षा अच्छी तरह से कर पाते थे। इन तीनों कालों को विश्व के वातावरण में देख सकते थे विश्व के वातावरण में भारत का स्थान क्या होना चाहिए या क्या हो सकता है इसी के बारे में उन्होंने अपनी सारी बातें भारत के लोगों से कही। आप लोग भूतकाल की बातें को संग्रह करके देश का वर्तमानकाल बना रहे हैं इस ऐतिहासिक कार्य में आप सभी के सामने एक ही लक्ष्य है भगवद्गीता लोगों तक पहुँचाना तथा भारत का वर्तमान सुधारना। हमारे आशू भैया का तो व्रत है कि ना सोते हैं ना सोने देते हैं। ऐसी बड़ी टीम का उन्होंने निर्माण किया। गीता पढ़ाने वाला कभी रुकता नहीं समाज को सुधार करता हुआ गीता को पढ़ाते ही चला जाता है मन से पढ़ाता रहता है। यह कठिन कार्य आप सभी कर रहे हैं आप सभी का बहुत-बहुत अभिनंदन। आज मैं साध्वी भगवती जी को इस पर्दे पर देखकर एवं दर्शन पाकर भी प्रसन्न हूँ क्योंकि उनके रूप में मुझे भगिनी निवेदिता जी का दर्शन होता है। भगवती जी से लगभग 30 से अधिक वर्षों से मैं परिचित हूं भगवती जी परमार्थ आश्रम में रहकर एवं सारे संपन्न देशों को छोड़कर गंगा के किनारे तपस्या कर रही हैं। फिर भी उनके पास एक समृद्धि है, वह है गंगा मैया की भक्ति और भारत की संस्कृति,श्रीकृष्ण भगवान

की भक्ति। इस प्रकार से भगवान ने उनका जीवन गढ़ा है एवं ये सभी के लिए एक उदाहरण बन गई है, कई युवकों को पढ़ाती है, स्वयं अनाथ बालकों की माता बनकर कार्य कर रही हैं, यह साधारण तप नहीं है। 30 वर्षों से यह काम कर रही हैं आज हमारे साथ यह तपस्विनी जुड़ी हुई हैं। आज सारा विश्व कल्याण के लिए भारत की ओर देख रहा है, भारत का यही वांग्मय भारत की संस्कृति, भारत के ये विचार विश्व को गीतामय बनायेंगे ।

हमारे हृदय में, हमारे मस्तिष्क में, हमारे जीवन में विश्व के लिए प्रेम है भगवद्गीता के श्लोक हमारी जिव्हा पर है, एवं किसी के लिए हमारे मन में कोई द्वेष नहीं है, इस प्रकार भगवद्गीता के कार्य में निरंतर लगे रहे। भगवती जी हमारे साथ हैं अत: मैं अपनी वाणी को विराम देता हूँ। इसके उपरांत आदरणीय संजय भैया ने स्वामी जी का धन्यवाद ज्ञापित किया और प्रणिपात किया एवं कहा भगवान को तो आप ने हम सभी के साथ पहले से ही जोड़ रखा है इसीलिए यह कार्य इतना सुंदर चल रहा है।

कुछ प्रशिक्षणार्थियों द्वारा गीता के कुछ श्लोकों को उच्चारित किया गया तथा उनकी कंठस्थीकरण की परीक्षा ली गई।

आदरणीय संजय भैया ने भगवती साध्वी जी का अभिनंदन किया। यह व्यक्तित्व हॉलीवुड से हिमालय तक का है, एक पुस्तक भी इस नाम से प्रकाशित की गई है । आप लेखिका भी हैं और आपकी एक पुस्तक ‘द जर्नी ऑफ फीलिंग एंड ट्रांसफॉरमेशन’ लोगों ने बहुत पसंद की । लॉस एंजेलिस में आपका बचपन गया एवं स्वामी चिदानंद महाराज के द्वारा आपको सन्यास दीक्षा प्राप्त हैं, विश्व भर में आपका संचार है। आप डिवाइन शक्ति फाउंडेशन के प्रेसिडेंट है बच्चों के लिए मुफ्त शिक्षा प्रदान करती हैं, आपने 11 वॉल्यूम हिंदू विश्व शब्दकोश में एडिटिंग का कार्य किया है। आपका प्रिय कार्य हमेशा से यह रहा है कि आप लोगों को ध्यान व साधना सिखाती है। आपकी गीता परिवार में आने मात्र से हम लोग बहुत प्रसन्न है। आपसे निवेदन करते हैं कि आप आपके आशीर्वचन हम सबको प्रदान करें।

पूज्य भगवती सरस्वती जी ने अपने शब्दों को सबके समक्ष रखते हुए कहा परम पूज्य स्वामी जी, आशू भैया एवं संजय भैया तथा सभी गीता परिवार को मेरा प्रणाम है, उन्होंने कहा देश विदेश में भगवद्गीता लोग केवल सीख नहीं रहे, वे जी रहे हैं एवं पी रहे हैं एवं कहा स्वामी जी ने बहुत बड़ा कार्य शुरू किया है।

यह कोरोना का प्रसाद है। भगवद्गीता- ब्रह्म विद्या, योग शास्त्र है यह डिवाइन विश्व के लिए जरूरी है। यह बहुत

अद्भुत है। किसी भी सिटी में जाओ, किसी भी कोने में जाओ, लोग योग कर रहे हैं इस प्रकार ये संस्कृति विश्व में पहुँच गयी। यह हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री मोदी जी का लक्ष्य है भारत की संस्कृति देश- विदेश तक पहुँचाना, हम भी यही कार्य कर रहे हैं। योग प्रयागराज से लेकर यूनाइटेड नेशन तक पहुँच चुका है।

हमारा कनेक्शन टूट गया है और यही कारण है कि यहाँ सब डिप्रेशन, टेंशन में होते हैं। इसलिये हमे भगवान के साथ कनेक्शन बनाकर चलना है। यह भक्ति हमको स्वयं से जोड़ती है एवं भगवान से जोड़ती हैं। मैं 25 साल पहले भारत आई तो परम पूज्य स्वामी जी ने मुझे भगवद्गीता दी, ऐसा लगा जैसे मुझे अपने जीवन के सभी प्रश्नों के उत्तर मिल गयें। सबसे पहले मैं जब भारत आई तो गंगा जी का दर्शन किया और उसी से मेरा जीवन बदल गया। फिर मुझे पता चला कि मुझे यहाँ रहना है। अब लगता है कि मैं भारत में नहीं बल्कि भारत माता मुझ में रहती है। मुझे आप सब से मिलकर बहुत खुशी होती है। यही भारतीय संस्कृति है। यही जीवन का सार एवं रस है। गुरु, गंगा एवं गीता के संगम ने मेरा जीवन बदल दिया।

सभी लोग आजकल टेंशन में रहते हैं भगवान कृष्ण गीता में कह रहे हैं चिंता मत करो मैं तुम्हारे साथ हूँ। हम निरंतर चिंता में रहते हैं क्योंकि हम इस शरीर में चिंता का अनुभव करते हैं। लोग अपने जीवन का अर्थ समझना चाहते हैं एवं हम जीवन में क्यों है इसका मतलब समझना चाहते हैं, इंसान कुछ ना कुछ जीवन में बनना चाहता है, पाना चाहता है परंतु भगवान हमसे यह सब नहीं चाहते हैं। भगवान हमें कहते हैं की भक्ति में लीन हो जाओ जिससे भगवान हमें जीवन में प्रसन्नता देते हैं एवं जीवन का अर्थ बताते हैं। उस परमात्मा के साथ एक हो जाना ही जीवन का अर्थ है, यही सचमुच सफलता है। मैं परम पूज्य स्वामी जी का धन्यवाद ज्ञापित करती हूँ कि मुझे भारत कि संस्कृति से जोड़ा एवं गीता परिवार में आमंत्रित किया गया। आप सभी गीता यात्रा में निरंतर बने रहें तभी जीवन की चिंताएं प्रसन्नता में एवं शांतिपूर्ण जीवन में परिवर्तित होंगी । यह गीता सबके लिए है और हम इसे पूर्ण विश्व में फैल आएंगे।

फिर आदरणीय सुवर्णा काकी जी ने अपनी मधुर वाणी में 12वें अध्याय के श्लोकों का पठन किया। इसके उपरांत ज्योति जोशी ताई ने कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापित किया। सभी को धन्यवाद देते हुए कार्यक्रम को समापन की ओर लेकर गई। सुनील धूत जी ने कार्यक्रम में समापन प्रार्थना की एवं आदरणीय संजय भैया ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया एवं कार्यक्रम के समापन की घोषणा की। इस सुंदर उद्घाटन समारोह से L1 का शुभारंभ हुआ।

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