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गीता मैत्री अंक ३जनवरी से जून २०२२
०८आओ गीता सेवी बनें

आओ गीतासेवी बनें

“गीता परिवार” के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और उत्तर भारत के प्रभारी डॉ. आशू जी गोयल, जो कि ऑनलाइन गीता संथा वर्ग के प्रोग्राम डायरेक्टर भी हैं, ने अपने स्वागत-भाषण में नये गीता-सेवियों का स्वागत करते हुए कहा -

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“त्यागो सारी दुर्बलता को, राष्ट्र समर्थ बनाओ !
बन्धु-भाव समता ममता से, सबको गले लगाओ !

“गीता परिवार” का यह ध्येय वाक्य है और इसी भावना को लेकर हमारा कार्यक्रम “आओ गीतासेवी बनें” दिनांक 6 फरवरी, रविवार, 2022 को आयोजित किया गया ।

कार्यक्रम का शुभारम्भ उद्घोषक सौ. सोनाली काला जी ने

“ नमन है माँ शारदे, ज्ञान का वरदान दे !
सेवा के सन्मार्ग को आलोकित हम करें “

इन पंक्तियों के साथ किया । विद्या के दाता गणेश जी और विद्या की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती जी से प्रार्थना की गई - “ अबोधता से उठा कर, प्रज्ञा का तू दान दे “ !

परम विदुषी सौं. वन्दना वर्णेकर जी ने अपने स्वागत-भाषण में “गीता परिवार” के सदस्यों के निष्काम सेवा-भाव और कार्य-कुशलता की प्रशंसा करते हुए कहा कि गीताजी की सेवा से हमारा जीवन अधिकाधिक पावन होता चला जाता है । उन्होंने परम पूज्य गुरुवर स्वामी श्रीगोविन्ददेव गिरि जी का मूल सन्देश- “ घर-घर गीता, हर कर गीता” को दोहराते हुए सन्त ज्ञानेश्वर जी की वाणी को भी उद्धृत किया -“ जो काया,वाचा और मन से गीताजी की सेवा करेगा वह सानन्द साम्राज्य का चक्रवर्ती सम्राट बनेगा”। हम सभी इस गीता-यज्ञ में सम्मिलित होकर अपनी आहुति प्रदान कर सकते हैं ।

इस महायज्ञ में 4000 से अधिक कार्यकर्ता अपनी सेवाएँ एक टीम-भावना के साथ (Together Everyone Achieves More) दे रहे हैं । “ जयतु जयतु गीता वांगमयी मूर्ति” मोहरूपी असुर को मारने वाली सप्तशती है ।

वह शक्ति हमें दो दयानिधे,
कर्तव्य-मार्ग पर डट जाएँ,
पर-सेवा पर-उपकार में हम,
जग-जीवन सफल बना जाएँ ।

उन्होंने कहा कि सेवा का काम दूसरों को तार कर, खुद तर जाने का होता है । हमारा जन्म होते ही हम पर विभिन्न प्रकार के सामाजिक ऋण प्रारम्भ हो जाते हैं । हम समाज से जो लेते हैं, उसका मूल्य तो सेवा-द्वारा ही चुकाया जा सकता है । गीताजी में भी “सर्वभूत हिते रताः” दो बार आया है । उन्होंने परम पूज्य स्वामी गोविन्द देव जी गिरि महाराज, जो कि “गीता परिवार” के संस्थापक और संरक्षक हैं, के शब्दों को उद्धृत करते हुए कहा कि “गीता-परिवार” में कर्म की दृष्टि कर्म की और भाव की दृष्टि सेवा की होती है । इसके पश्चात “गीता-परिवार” में दी जाने वाली सेवाओं से सम्बन्धित एक “ परिचय वीडियो” को भी दिखलाया गया ।

गीता-परिवार में दी जाने वाली सेवाएँ क्रमानुसार हैं ः-

1.तकनीकी सहायक 2.सूचना और प्रौद्योगिकी विभाग 3. समूह-संचालक 4. रचनात्मक लेखन और विवेचन 5. ग्राफ़िक डिजाइनिंग और ऐनीमेशन 6. प्रशिक्षक 7. गीता परम प्रचारक

गीता-परिवार में लगभग 35 विभाग हैं और 4000 से भी अधिक गीता-सेवी कार्यकर्ता इन सबमें अपनी सेवाएँ दे रहे हैं ।

श्री सुरेश जी व्यास ने “टेक्निकल सहायक” सेवा सम्बन्धी, श्री मनीष सिंह जी तोमर ने “सूचना और प्रौद्योगिकी” , श्री हनुमान दास जी बाहेती ने “ समूह संचालक”, श्रीमती कामिनी जी पन्त ने “रचनात्मक लेखन व विवेचन” और श्रीमती श्रुति जी नायक ने “प्रशिक्षण विभाग” सेवा सम्बन्धी जानकारी दीं । इसके पश्चात् प्रश्नोत्तर का सत्र हुआ जहाँ पर गीता-सेवा सम्बन्धी जिज्ञासुओं ने विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे जिनके समुचित और सन्तोषजनक उत्तर दिए गये ।

कार्यक्रम का समापन प्रार्थना श्लोक द्वारा किया गया ।

इसी प्रकार अन्य सेवी सत्र भी प्रति माह होते रहे हैं जिनसे जुडकर अनेक गीता साधक इस गीता महायज्ञ में अपनी आहूति दे रहे हैं-

आओ गीता सेवी बनें -
Be a Geeta Volunteer - 27-03-22
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आओ गीता सेवी बनें -
Be a Geeta Volunteer - 8/05/22
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