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गीता मैत्री अंक ५जनवरी से जून २०२३
०७आओ गीता सेवी बनें

आओ गीता सेवी बनें

दिल्ली से श्री दिनेश जी पंडिता ने सत्र का प्रारंभ करते हुये कहा - अध्यात्म की पावन राह पर चारधाम की यात्रा का सेतु निर्माण कार्य करना है। इस सेतु को मजबूती व बल गीतासेवियों के अमूल्य योगदान से मिलेगा।

आओ गीता सेवी बनें

Be A Geeta Volunteer - 05/02/23

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आरम्भ प्रार्थना पारुल जी भार्गव दीदी द्वारा संपन्न हुई।

प्रेरणा विचार-

लर्नगीता के प्रोग्राम डायरेक्टर, गीता परिवार के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आदरणीय डॉ.आशू गोयल भैया ने गीता सेवियों को प्रेरणा देते हुये व मार्गदर्शन पर संभाषण में कहा कि भगवान् की मंगलमयी कृपा से हम सबके जीवन में ऐसी जागृति हुई है की इस जीवन को श्रेष्ठ बनाने के लिये, जीवन को नया आयाम देने के लिये हम गीता सेवी सत्र से जुड़े है। आगे उन्होंने कहा की जीवन में परिपूर्णता के मार्गों में हमने समाज और अन्य कई साधनों, सुविधाओं से सेवाये ली हैं। इसप्रकार बहुत ऋण हम सब के ऊपर हो जाते हैं, जिनसे उऋण होना हर समय संभव नहीं होता। सामाजिक ऋणों का निष्पादन करने का तरीका है कि जिसका ऋण मुझपर है, उनके लिये मैं कृतज्ञ भाव रखूं और अनुगृहीत होकर समाजसेवा करूँ। जितनी भी मात्रा में सेवा अर्पण करूं, कृतज्ञ भाव अर्पण करूं उससे मेरे भीतर बैठे परमात्मा इस कृतज्ञ भाव से प्रसन्न हो जाते हैं। इसलिये मेरे हाथों निःस्वार्थ सेवा होनी चाहिये।

समाज में हमारा स्तर चाहें जितना भी ऊँचा हो, सेवाधर्म का पालनकर्ता ही सबसे बड़ा कार्यकर्ता होता है। कार्यकर्ता का गुणधर्म निःस्वार्थ भाव के साथ विनम्र रहके सेवा अर्पण करना होता है ।

गीता सेवी ऐसे ही निःस्वार्थ रहकर शालीनता से व समय सूचकता के साथ निरंतर सेवा देते हैं। इतनी ऊर्जाभाव और सेवाभाव से किया यह कार्य भक्ति बन जाता है। आ. आशू भैया ने कहा कि पूज्य स्वामीजी महाराज ने अपने श्रीमुख से यह वाणीबोध किया हैं कि निष्काम, निःस्वार्थ भाव से की हुई गीतासेवा यह साधना है। और इस सेवामात्र से ही भगवद्प्राप्ति हो जायेगी व कल्याण हो जायेगा।

आ. आशू भैया नें साधकों को अधिक से अधिक सेवाओं से जुड़ने हेतु प्रोत्साहन देते हुये कहा कि साक्षात् सर्वेश्वर की विशेष कृपापात्र आप हो गये हैं । इसलिये अपने भक्तों की सेवा करने हेतु गीता सेवी रूप में आपका चयन होने वाला है।

तत्पश्चात् सत्र को आगे बढ़ाते हुये गीता परिवार के विभिन्न 10 विभागों की कार्यपद्धति व उनसे जुड़ने हेतु आवश्यक जानकारी सभीं विभागों के वरिष्ठ सेवार्थियों द्वारा दी गई।

1) कॉलिंग ऐंड माइग्रेशन टीम (Calling and Migration Team)

प्रस्तुतकर्ता : श्री अभिजीत जी जोशी, (वड़ोदरा, गुजरात)

कार्य प्रणाली :

  • a) नये साधक या अगले स्तर के लिये अग्रसर साधकों को सहायता हेतु कॉल करना। उनकी समस्याओं का निवारण करना
  • b) सप्ताह में 4 से 5 दिन व प्रतिदिन 2 से 3 घंटे का योगदान
  • c) आयु मर्यादा : 16 से 70 वर्ष तक
  • d) स्मार्टफोन को उपयोग करने की जानकारी आवश्यक

2) तकनीकी सहायक (Technical Assistance)

प्रस्तुतकर्ता : श्रीमती कोमल जी नायडू (मुंबई, महाराष्ट्र)

आवश्यकतायें -

  • a) मोबाइल व लैपटॉप की सामान्य जानकारी
  • b) आयु मर्यादा : 16 से 65 वर्ष
  • c) ज़ूम ऐप की जानकारी
  • d) बढ़िया नेटवर्क स्रोत

3) समूह संचालक टीम (Group Co–oridinator's Team)

प्रस्तुतकर्ता : श्री. श्रीनिवासजी कोलारकर (नागपुर, महाराष्ट्र)

आवश्यकतायें -

  • a) मेनेजमेंट के गुण, मेनेजमेंट क्षेत्र में पूर्वानुभव
  • b) नये नये लोगों से बातकर उनकी समस्या निदान व सहायता का गुण
  • c) 24घंटे में कुल 2–3घंटों का समय योगदान
  • d) कंप्यूटर एवम् मोबाइल का ज्ञान
  • e) आयु मर्यादा : 25 वर्ष से ऊपर

4) एडमिशन डिपार्टमेंट : (Admission Department)

प्रस्तुतकर्ता : श्रीमती विनी जी माहेश्वरी (मुंबई, महाराष्ट्र)

आवश्यकतायें -

  • a) साधक को उनके चयन किये हुये समय व भाषा के व्हाट्सप ग्रुप में जोड़ना
  • b) परीक्षा देने वाले परीक्षार्थियों से कॉल करके कंफर्मेशन लेना
  • c) आयु मर्यादा : कम से कम 14 वर्ष

5) रचनात्मक लेखन : (Creative Writing Department)

प्रस्तुतकर्ता : श्रीमती माला जी नारायण (कन्नूर, तमिलनाडु)

यहाँ मुख्यतः तीन विभाग हैं -

  • a)विवेचन लेखन : प्रत्येक शनिवार और रविवार के आयोजित विवेचन सत्रों का लेखन
  • b) ट्रांसलेशन विभाग 12 भाषाओं में संचालित लर्नगीता कक्षाओं में विभिन्न गतिविधियों की जानकारी के संदेश भेजना
  • c) गीता मैत्री न्यूजलेटर विभाग में लेखन
  • गीता परिवार की विभिन्न गतिविधियों पर सुलेखन
  • विभाग विषेषता
  • समयबद्धता ही रचनात्मक लेखन विभाग का बल है।

6) ग्राफिक व डिजाइनिंग : (Graphic & designing)

प्रस्तुतकर्ता : सुश्री रोहिणी जी मल्लाडी (मुंबई, महाराष्ट्र)

आवश्यकतायें :

  • a)आयुमर्यादा 16 वर्ष से ऊपर
  • b)बताये गये टूल्स में रूचि एवं जानकारी
  • c) Knowledge of Tools : Photoshop, Canva , After Adobe After Effects.

7) सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट : (Software Development)

प्रस्तुतकर्ता : पंकज जी अग्रवाल ( लखनऊ, उत्तर प्रदेश)

आवश्यकतायें :

  • a)LEARNGEETA.COM
  • b) REGISTRATION AND USER PORTAL
  • e) sewa.learngeeta.com
  • c) HELP PORTAL
  • d)VIVECHAN PORTAL
  • e)WEB CONTENT manage
  • f) sewa.learngeeta.com

Key Skills:

  • WORDPRESS, DESIGNING
  • CMS ADMIN, HTML/CSS/JS, PHP, MYSQL, YOUTUBE API, DBMS, SECURITY, LINUX, AUDIO/VIDEO, OPTIMIZATION

यज्ञार्थात्कर्मणोऽन्यत्र लोकोऽयं कर्मबन्धनः।
तदर्थं कर्म कौन्तेय मुक्तसंगः समाचर।।

उन्होंने गीता के सिद्धांत को इस कार्य से जोड़ते हुये कहा कि कर्म ऐसे करो जैसे भगवान् की पूजा की जाती है ।

पंकज भैया का निवेदन है कि; लर्नगीता के विशाल ज्ञानयज्ञ में अपने सॉफ्टवेयर स्किल्स के साथ कर्मयोग के इस ज्ञान को सार्थक करें।

8) बालसखा

प्रस्तुतकर्ता : तेजस जी पुजारी (बंगलौर, कर्नाटक)

आवश्यकताएं :

  • a)आयु मर्यादा 10 से 25 वर्ष
  • b) मैसेज भेजना
  • c) कॉलिंग
  • d) ग्रुप्स निर्माण तथा डिलीट करना
  • e) सोशल मीडिया द्वारा गीताजी का प्रचार व प्रसार करना

उपलब्धियाँ:

  • a)कौशल विकास
  • b)दिव्य कार्य में सक्रिय भागीदारी
  • c)आत्मविश्वास, विनम्रता, सेवाभाव के बीज बोये जाते हैं।

9) गीता प्रचारक विभाग : (Geeta Pracharak Team)

प्रस्तुतकर्ता : श्री राजीव जी गुप्ता (जयपुर, राजस्थान)

आवश्यकतायें :

  • a)संकल्प भाव
  • b)गीताजी से, मातृभूमि से, संस्कृति से प्रेम की, कुछ वापस देने की भावना।
  • c)व्हाट्सअप प्राचारक समूह से जुड़ना

प्रचार संपर्क साधन :

  • a)व्यक्तिगत
  • b) सामूहिक स्थानों में
  • c) सोशल मीडिया
  • d) पैंपलेट
  • e) बैनर
  • f) होर्डिंग्स द्वारा प्रचार

10) प्रशिक्षक बनें : (Be A Trainer)

प्रस्तुतकर्ता : श्रीमती रुचिका जी छांवगावकर (धर्मशाला, हिमाचल प्रदेश)

40मिनट की ज़ूम कक्षाओं में गीता जी के श्लोकों का शुद्ध, सटीक उच्चारण सिखाना

जीवन मार्गदर्शिनी श्रीकृष्ण की वाणी हमारे द्वारा घर-घर पहुंचे

आवश्यकताएं :

  • a) गीता जिज्ञासु , गीता पाठक, गीता पथिक, गीताव्रती परीक्षाओं में 85%से ज्यादा अंक प्राप्त
  • b) आयु 18 वर्ष से अधिक
  • c) उत्तम इन्टरनेट
  • d) श्लोक उच्चारण एवं साक्षात्कार में उत्तीर्ण

इसके पश्चात् आ. आशू भैया एवं 10 विभागों का दिशादर्शन करते वरिष्ठ सेवियों द्वारा साधकों के प्रश्नों के उत्तर दिये गये।

तदनंतर श्री हनुमान चालीसा का पाठ हुआ ।

सत्र समापन करते हुये श्रीमती रुचिका जी छांवगावकर दीदी ने समापन प्रार्थना गाई थी।

अन्य गीता सेवी सत्र -

Be a Geeta Volunteer - आओ गीता सेवी बनें - 26/03/23
https://www.youtube.com/live/n9ouJzz3vos

आओ गीता सेवी बनें - Be a Geeta Volunteer - 7/05/23
https://www.youtube.com/live/R6txbgTubFo

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