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गीता मैत्री अंक ५जनवरी से जून २०२३
१४गीता मैत्री मिलन

गीता मैत्री मिलन

गीता मिलन मैत्री इस कार्यक्रम को समझने के लिए इसके पूर्व के नेपथ्य को समझना आवश्यक है। विश्व में कभी-कभी कुछ नए शब्दों का आविर्भाव होता है, एक उदाहरण है आप लोगों में से अनेक लोगों को ब्लैकआउट का मतलब नहीं पता होगा। जिन लोगों ने सन् 1962, सन् 1965, सन् 1971 की युद्ध की विभीषिका को देखा है, वही ब्लैकआउट का मतलब समझते हैं।

उसीप्रकार लॉकडाउन शब्द को मानवजाति ने प्रथम बार सुना। एक तरफ महामारी की विभीषिका आसपास गली मोहल्लों में सुनसान वातावरण केवल एंबुलेंस अथवा शववाही वाहन के सायरन की आवाज और जब भी कोई फोन की घंटी बजी तो किसी न किसी परिजन के कोरोना से आक्रांत अथवा निधन का समाचार। उस विभीषिका के मध्य गीता परिवार एक आध्यात्मिक आंदोलन लेकर आया। जिन लोगों के पास प्रातः से संध्याकाल तक कुछ भी करने को नहीं था, अब वे पूरे दिन के लिए व्यस्त हो गयें। 40 मिनट की कक्षा पर उसके पीछे की जीवन व्यवस्था ने हम सब को एक नई राह पकड़ा दी। गीता कक्षा और गीता कण्ठस्थीकरण, सप्ताहांत में गीता विवेचन पूरी की पूरी दिनचर्या ही बदल गई।

शनैः शनैः स्थिति सामान्य होने लगी लॉकडाऊन में ढील दी जाने लगी, जनजीवन सामान्य होने लगा। तब तक गीता परिवार ने भी एक विशाल वटवृक्ष का आकार ले लिया था। परिवार के सदस्य हर दिन ज़ूम में मिलते मिलते साक्षात मिलने को आतुर होने लगे और तब हमारे गुरुदेव आचार्य गोविन्द देव गिरि जी के मार्गदर्शन में आदरणीय सञ्जय भैया, आशू भैया लेकर आए एक नवीन प्रयोग गीता मैत्री मिलन। एक अभिनव कार्यक्रम जिसमें एक शहर एवं उसके आस पास के गीता साधकों को एक स्थान पर मिलने का सुअवसर प्राप्त हुआ। यहाँ मात्र श्रीमद्भगवद्गीता पर चर्चा नहीं थी, इसके माध्यम से परस्पर एक दूसरे से साक्षात् सशरीर मिलने का आनन्द था। मित्रता को और प्रगाढ़ और प्रभावी करने का अवसर था एवं तभी इसे एक अभिनव नामकरण से सुशोभित किया गया गीता मैत्री मिलन। गीता भी मैत्री भी और मिलन भी।

साधकों और सदस्यों में परस्पर प्रतिस्पर्धा होने लगी। हर शहर हर नगर से आवेदन आने लगे। जिन शहरों के नामों का चयन हो गया, वे अपने को सौभाग्यशाली मानने लगे। आयोजन की रूपरेखा तैयार करने में तत्परता से संलग्न होने लगे। आगन्तुक अतिथियों का हवाई अड्डे पर स्वागत, उनके निवास की समुचित व्यवस्था, सांस्कृतिक कार्यक्रम, अतिथि स्वागत, मञ्च सज्जा, उद्घोषण, अल्पाहार अथवा स्वरुचि भोज सभी के ऊपर आयोजकों का सूक्ष्म चिन्तन अद्भुत, अविस्मरणीय प्रेरणादायी। ऐसा लगता था मानो अपने घर में पुत्र विवाह हो रहा है।

इन सबके पश्चात् के आनन्द की स्मृति भी रोम- रोम को पुलकित कर देती है। गीता मिलन मैत्री का वह अविस्मरणीय दिन, साधकों का उत्साह चरम पर, एक जैसे पारम्परिक सात्विक भारतीय परिधान से सुसज्जित महिला और पुरुष साधक वृन्द, ठसाठस भरा परिसर, श्रृंखला बद्ध अनुशासित श्रोता अद्भुत, अकल्पनीय दृश्य। आदरणीय सञ्जय भैया एवं आशू भैया ने जहाँ - जहाँ यह कार्यक्रम किया, उस शहर का वातावरण उस नगर का परिवेश उस स्थान की ऊर्जा ही बदल गई। वहां के साधकों का श्रीमद्भगवद्गीता के प्रति, गीता परिवार के प्रति, गीता के प्रचार-प्रसार के प्रति, नये साधकों को गीता परिवार से युक्त करने के प्रति दृष्टिकोण ही बदल गया।

अंग्रेजी में एक शब्द है After Effect इस गीता मैत्री मिलन समारोह का After Effect अर्थात् उत्तर प्रभाव दीर्घस्थाई है, सदस्य नित्य नए कार्यक्रमों से युक्त हो रहे हैं। सबसे सुन्दर और प्रभावी कार्य है इस गीता मैत्री मिलन समारोह के पश्चात् गुरुदेव के स्वप्न हर घर गीता हर कर गीता अभियान और शतकोटि हनुमान चालीसा अभियान को नवीन दिशा प्राप्त हुई है। साधक प्रचार के किसी भी अवसर का भरपूर लाभ लेते हैं।

धन्य है गीता परिवार धन्य धन्य है गीता मैत्री मिलन।

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