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गीता मैत्री अंक ५जनवरी से जून २०२३
4th Batch - L4 (II) Opening Ceremony - 17-01-23
०५विभिन्न समारोह

4th Batch - L4 (II) Opening Ceremony - 17-01-23

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स्तर 4 बैच का शुभारंभ दिनांक 17 जनवरी 2023 को हुआ। इस बैच में 6 हजार से अधिक प्रशिक्षार्थियों ने रजिस्टर किया। एनीमेशन फ़िल्म के द्वारा गीता पढ़ने के महत्व को समझाया गया । प्रार्थना हेतु नेपाल से रुचि टोडी दीदी जो फरवरी 21 से गीता परिवार से जुड़ी हैं, को आमंत्रित किया गया । दिव्य दीप प्रज्वलन रायपुर छत्तीसगढ़ से सीमा मिश्रा दीदी जो गीता परिवार से 2 वर्ष से जुड़ी हैं और विभिन्न प्रकार की सेवाये दे रही हैं, के द्वारा किया गया ।

20 दिनों में 2 अध्याय का शुद्ध पठन, नि:शुल्क पीडीएफ, ऑडियो सामग्री एवं संस्कृत व्याकरण कक्षाओं के विषय में बताया गया ।

इसके पश्चात् गीता परिवार के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. आशू जी गोयल भैया को आमंत्रित किया गया, उन्होंने कहा कि हम सोचते हैं कि मैं गीता सीखूं, गीता पढ़ूँ किन्तु हमारे सोचने से कुछ नहीं होता है। भगवान ने हमें इस कार्य हेतु चुना है, हम भगवान के कृपा पात्र बने हैं। स्वामी रामसुखदास जी ने भी कहा है कि गीता सुनने, पढ़ने वालों की मुक्ति निश्चित है। अत: हमें गीता से पृथक् नहीं होना है। अपने सम्पूर्ण जीवन को गीता में लगाये एवं गीतमय बन जाये। इस ओजस्वी प्रस्तावना के पश्चात् गीता परिवार के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष डॉ. संजय मालपाणी भैया ने अपने उद्बोधन में कहा कि चौथे चरण की यात्रा कुछ कठिन है, ये घाटी वाला धाम है इसमें बड़े अध्याय हैं लेकिन रुकना नहीं है , झुकना नहीं है, चलते रहना है ।

चौथे स्तर में अपने आप को देखना प्रारंभ करना है ये आपको अपने धर्म की याद दिलाता है जो जिसका कार्य है वही उसका धर्म है, सभी को अपने-अपने धर्म की पालना करनी चाहिये । योगेश्वर श्रीकृष्ण 18वें अध्याय में कहते हैं।

सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज...... 18/66

इस श्लोक का अर्थ समझ लेंगे तो गीता की यात्रा पूर्ण हो जाएगी। भगवान् कहते हैं मेरे शरणागत हो जाओ। मन विचार शून्य हो जाये तो विकार शून्य हो जायेगा। बांसुरी बजाते श्रीकृष्ण का ध्यान करते हुए, भगवान के कमल पत्र जैसे चरणों को निहारते हुए भगवान में रम जाएं। इस प्रकार विभिन्न श्लोकों के माध्यम से गीता जी को अपनाने को प्रेरित किया।

अब चार विशेष प्रशिक्षार्थियों से सबका परिचय करवाया गया। हरिप्रिया दीदी आयु 8 वर्ष, पुणे से, इन्हें 12 अध्याय कण्ठस्थ हैं। सूर्य कुमारी दीदी आंध्र प्रदेश से, उषा सुब्रह्मण्यम दीदी उम्र 63 वर्ष ने 5 अध्याय श्लोकांक सहित एवं सम्पूर्ण गीता कण्ठस्थ करके

गीताव्रती बनी हैं , आपने ये दिखा दिया कि आयु किसी भी कार्य हेतु बाधक नहीं होती है । गुंजन गुप्ता दीदी दिल्ली से 6 अध्याय श्लोकांक सहित कण्ठस्थ करके गीताव्रती बनी हैं । आ. आशू भैया ने कहा कि गीता को कण्ठस्थ करने का प्रयास करें, सभी आयु के व्यक्ति अभ्यास से यह कार्य कर सकते हैं । इन सभी साधकों द्वारा सुन्दर कण्ठस्थीकरण का प्रत्याक्षिक प्रस्तुत किया गया।

गीता जी का हमारे मानस पर क्या प्रभाव पड़ता है, यह दर्शाने हेतु जिन साधकों ने तीन स्तर पूर्ण कर लिये हैं, उनके मनोगत सुने गये जो कि संक्षिप्त में इस प्रकार हैं -

  • हेमंत गोयनका जी - जीवन में धैर्य आने लगा है, मन को शांति मिलती है
  • आशा जोशी दीदी - अनुस्वार का सही प्रयोग करने लगे हैं , गीता सिखाने वाले सभी बहुत अच्छे एवं धैर्यवान् हैं।
  • शशांक जी - गीता परिवार से जुड़ने के बाद मस्तिष्क में आध्यात्मिक प्रश्न आते हैं ।
  • प्रणव पंचोली जी - आज कार्य में तनाव बहुत है किन्तु गीता जी पढ़ने के बाद बी. पी. नॉर्मल हो गया है।
  • अनीता आनंद दीदी - मैं गीता कक्षा में थी तभी माँ ने प्राण त्यागे तो उनके कान में जरूर गीता जी के श्लोक गये होंगे, उनको मुक्ति मिली होगी कृष्ण कृपा से।
  • वेंकट सूर्यवंशी जी छोटी सी कविता सुनाई। जयंत काम्बले जी, सुकेतु शाह जी, सुधीर जी, दत्तात्रेय जी, गीतिका जी, गोविंदराम जी , प्रशांत जी, विवेक जी, कविता शर्मा जी, एस. बी. मोहता जी, पी . एल. बोन्दर दीदी आदि ने हृदय स्पर्शी मनोगत सुनायें।

औरंगाबाद से हनुमान दास बाहेती भैया, जो अक्टूबर 2020 से गीता परिवार से जुड़े हैं, ने धन्यवाद ज्ञापित किया। टोरंटो-कनाडा से डिंपल रूपरेलिया दीदी जो जनवरी 2022 से गीता परिवार से जुड़ी हैं, ने बहुत मीठे स्वर में समापन प्रार्थना की।

अंत में अनुजा भट्टड़ दीदी ने सभी को शुभकामनाये एवं धन्यवाद ज्ञापित किया ।

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