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गीता मैत्री अंक ५जनवरी से जून २०२३
१४गीता मैत्री मिलन

गीता मैत्री मिलन गुजरात, 18 जून 2023

लर्नगीता के अन्तर्गत गीता गुजरात के स्वयं सेवकों और गीता साधकों व प्रेमियों की प्रात्यक्षिक भेंट 18 जून को गुजरात के अहमदाबाद में सम्पन्न हुई। गीताजी में श्रद्धा रखने वालों इन सभी गीताप्रेमियों का मैत्री मिलन हुआ।

गीता मैत्री मिलन गुजरात, 18 जून 2023
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गीता परिवार के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं लर्नगीता कार्यक्रम के प्रोग्राम डायरेक्टर गीता विशारद डॉ. आशू जी गोयल के साथ सुश्री ज्योति शुक्ला, सुश्री रूपल शुक्ला, सुश्री कविता वर्मा ये तीनों ही प्रोग्राम कॉर्डिनेटर दीदियों और वरिष्ठ गीता सेवियों सहित सुंदर दीप प्रज्ज़्वलन से कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। लोक गीत नृत्य “श्री कृष्ण शरणं मम” की मधुर ध्वनि पर पारंपरिक कथक प्रस्तुति व बासुरी धुन प्रस्तुति अति रमणीय थी।

आशू भैया और त्रिवेणी संगम (तीनो दीदियों) का यथोचित सम्मान - माल्यार्पण और शॉल पहना कर हुआ। समूह संचालक डिपार्टमेंट की प्रमुख कार्यकर्त्ता श्रीमती कविता तापडिया दीदी ने गीता परिवार के अनेकों उपक्रमों की जानकारी उपलब्ध कराई। उन्होंने बताया की स्वामीजी द्वारा पंचसूत्री न सिर्फ़ 159 देशों तक पहुँची है बल्कि कारागृहों में भी गीता का प्रकाश फैल रहा है । श्री दिनेश भाई अखानी, मीनाक्षी शाह दीदी, पूर्वी दीदी और कविता दीदी को आशू भैया के साथ मंच पर विराजमान होने का अवसर मिला । दिनेश भैया ने आ. आशू भैया को मार्ग- दर्शन हेतु मंच पर आमंत्रित किया।

आशू भैया ने आह्लादित होते हुए बतलाया गीता परिवार द्वारा बाल-संस्कार और गीता प्रचार गत 36 वर्षों से हो रहा हैं। 2018 में मुंबई में राष्ट्रीय अधिवेशन के समापन समारोह में परम पूज्य स्वामीजी द्वारा एक स्वाभाविक प्रश्न पूछे जाने पर कि कौन गीता कंठस्थ करेगा, इस पर संजय भैया और आशू भैया को नया लक्ष्य मिला। कड़ी मेहनत से संजय भैया प्रथम गीताव्रती हुए। 2019 के गीता जयंती उत्सव में 72 गीताव्रती हुए। आगे कोरोना काल में सामान्य गतिविधियाँ ठप्प हो गई। तभी ऑनलाइन गीता संथा वर्ग चलाने की परिकल्पना हुई और इस प्रकल्प का शुभारम्भ हुआ। पहली सैम्पल क्लास फरवरी से प्रारम्भ होकर जून 2020 तक आयोजित हुई। तत्पश्चात् 2500 लोगों का प्रथम वर्ग आरंभ हुआ। जब लर्नगीता का यह उपक्रम आरंभ हुआ तो उन्होंने देखा दक्षिण, उत्तर, काशी, महाराष्ट्र, उज्जैन आदि में उच्चारण भिन्न थे। गीता परिवार की अनुसंधान समिति ने नियमों का शोधन किया।57000 साधको के साथ रजत बैच जून 2023 में भगवद्कृपा से चल रहा है। आज तक साढ़े तीन लाख ज़ूम कक्षाएँ हो चुकीं हैं। एक आंदोलन की तरह सब गीता-सेवी व प्रेमी जुड़ गये ।5000 से अधिक स्वयं सेवकों को भगवत्कृपा से गीता- भक्ति

की प्रेरणा मिली। आपस में संवाद की अपेक्षा भीतर मन से संवाद करें। जैसे चित्रगुप्त के न्यायालय में झूठी गवाही नहीं चलती वैसे ही अपने चित्त का आँकलन करे। 6 विषयों पर अपनेआप को अंक दे। सभी विषय 100 अंक के हैं।

निम्नलिखित विषय है :-

  • 1) ज्ञान
  • 2) वित्त
  • 3) स्वास्थ्य
  • 4) परिवार
  • 5) आध्यात्मिक
  • 6) अन्य

सर्वश्रेष्ठ पांच की गणना की जानी चाहिए।

33 प्रतिशत से ऊपर आप उत्तीर्ण हैं।

हर विषय में 5 प्रश्न हैं, हर एक 20 अंक का।

ज्ञान - सबसे महत्वपूर्ण ज्ञान है। जिसने भूत का ज्ञान कर लिया, वही अपने भविष्य का निर्धारण कर सकते हैं।

  • शास्त्रों का नियमित अध्ययन।
  • किसी एक कला में प्रवीणता।
  • कुछ अच्छा सुनने लिखने का नियम।
  • व्यावहारिक ज्ञान।
  • नया कार्य सीखने का प्रयास।

वित्त - स्वावलंबी रहें।

  • क़र्ज़ न लें।
  • खर्च न बढ़ायें।
  • संयम से खर्च करे।
  • न्याययुक्त धनार्जन।
  • दुख देकर धन न कमायें।
  • वर्तमान और भविष्य का धनलक्ष्य निर्धारण।

स्वास्थ्य - मानव जीवन में सुख के ढाई स्रोत हैं-गाढ़ी नींद ,कोई दवाई का सेवन नहीं, अन्य जैसे परिवार, भौतिक लाभ। पहले दो को ज़्यादा महत्व देना चाहिए ।

“हितभुक्, मितभुक् और ऋतभुक्” भोजन करें।

प्रत्येक अंग से काम लें। नियमित योग, प्राणायाम, टहलना, तैरना इत्यादि।

गीता पढ़ने वाले साधक अविकम्प योग में रहें अर्थात् शीघ्रता से विचलित नहीं हों ।

दवा से ज़्यादा परहेज़ पर ध्यान दें।

वजन का ध्यान रखें।

सदा प्रसन्न चित्त रहते हुए मुस्कुराते रहे।

परिवार - सफल जीवन के लिए त्याग, लचीलापन और अनुकूलन बहुत आवश्यक हैं।

  • बड़ों को प्रसन्न रखना।
  • बच्चों को संरक्षण देना।
  • पति पत्नी मित्रवत् रहें।
  • पहले नाता फिर रिश्ता
  • समाज और मित्र

आध्यात्मिक -

  • स्वयं की आराधना
  • धर्म प्रचार
  • देश सेवा
  • समाज सेवा
  • Be simple, Be sample.

अन्य - कोई अन्य विषयों में आप विशेषज्ञ हो सकते हैं।

कुल अंक - अपनी और अपने से बात करके 250 और उससे ऊपर अंक पाने का प्रयास करें ।

टीम 11 ऑफ़लाइन सेवा दे सकते है। इसमें सेवा देने हेतु फॉर्म भरे।

आशू भैया द्वारा कई प्रश्नों के समाधान के पश्चात् गीताव्रतियों का सम्मान हुआ। कुल 63 गीताव्रतियों में से 37 उपस्थित जनों को सुवर्ण पदक, शॉल और प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया।

1500 साधक इस गीता मैत्री मैत्रीमिलन में सम्मिलित हुए। सबने प्रसादी ग्रहण कर आशू भैया के आशीर्वचनों का लाभ उठाया। कृष्ण कृपा से हर्षोल्लास के साथ यह समारोह संपन्न हुआ। कृष्ण कृपा की यह धारा ऐसे ही अनवरत बहती रहे ऐसी प्रार्थना।

मूल अंक के पृष्ठ देखें ३ पृष्ठ
मूल अंक, पृष्ठ ६१मूल अंक, पृष्ठ ६२मूल अंक, पृष्ठ ६३