मुख्य सामग्री पर जाएँ
गीता मैत्री अंक ५जनवरी से जून २०२३
वर्धिष्णु विश्ववंदिता लर्नगीता - तृतीय वार्षिकोत्सव
१०इतिहास और पड़ाव

वर्धिष्णु विश्ववंदिता लर्नगीता - तृतीय वार्षिकोत्सव

वर्धिष्णु विश्ववंदिता तृतीय वार्षिकोत्सव गीता परिवार की पारंपरिक पद्धति के अनुसार कार्यक्रम का आरम्भ सुमधुर प्रार्थना से हुआ। तदुपरांत 300 गीता साधकों के द्वारा सुंदर, अति मनमोहक, सुशोभित, रमणीय दीप प्रज्ज्वलन किया गया। यह एक बहुत ही सुंदर व सौभाग्य की बात है कि एक साथ 300 लोगों ने दीप प्रज्ज्वलन एक साथ किया। यह गीता परिवार की तृतीय वर्ष गांठ है। आदरणीय संजय भैया ने कहा ! आज अत्यंत आनंद का दिन है हम सभी चौथे वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं।

आदरणीय संजय भैया जी ने कहा - इस कार्यक्रम का नाम वर्धिष्णु विश्ववंदिता इसलिये रखा गया है क्योंकि यह नाम छत्रपति शिवाजी महाराज की जो राजमुद्रा बनी थी उस पर यह लिखा गया था। यह प्रतिपदा के चंद्र की तरह है। गीता परिवार का यह लर्नगीता का प्रकल्प चंद्र की तरह ही दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है इसलिये इस प्रकल्प को वर्धिष्णु विश्ववंदिता कहा गया है। छत्रपति शिवाजी महाराज ने उस समय शपथ ग्रहण किया था तथा कहा था कि भगवान् की इच्छा से ही राज्य व संपूर्ण कार्य चल रहा है। शिवाजी महाराज जीजा माता के द्वारा दिये गये संस्कारों के साथ बड़े हुये। भगवद्गीता पढ़कर बड़े हुये हैं एवं इसप्रकार का लोकतंत्र बनेगा इसकी इन्होंने उस समय शपथ ली थी और उनकी मुद्रा पर वर्धिष्णु विश्ववंदिता लिखा था। तत्पश्चात् स्वराज्य स्थापित किया अर्थात् लोककल्याण, लोकहित हेतु युद्ध करना गलत नहीं है यह भगवान श्रीकृष्ण, छत्रपति शिवाजी महाराज ने बता दिया। उसी तरह यह कार्यक्रम भी निश्चित ही परम पूज्य स्वामी जी महाराज के आशीर्वाद से चल रहा है।

आज गीता परिवार 160 देशों तक फैल गया है। 6,50,000 साधक जुड़ गये हैं। 'योगक्षेमं वहाम्यहम्' भगवान् इस कार्य को संभाल रहे हैं। इस लर्नगीता उपक्रम में गीता पुस्तक का भी प्रकाशन हुआ है। यह वंदन वाला कार्य है, आज भगवद्गीता का चिंतन करने का दिन है, भगवान को धन्यवाद देने का दिन है, भविष्य की ओर इस उपक्रम को कैसे ले जाए यह भी सोचने का दिन हैं। तृतीय वर्षगांठ के उपलक्ष्य पर आदरणीय संजय भैया जी ने सभी गीता साधकों का अभिनंदन किया जिन्होंने गीता का गोवर्धन पर्वत उठाया एवं अपनी वाणी को विश्राम दिया।

लर्नगीता एकमात्र संस्था का कार्यक्रम नहीं यह एक औषधी है जिसने अनेक मनों व जीवनों को बदल दिया है। अनेकों चरित्रों को गढ़ दिया है, पत्थरों पर प्रेम माधुर्य, अनुशासन, सेवा भक्ति, साहस, सहानुभूति का एक चित्र उकेर दिया है।

आज से 3 वर्ष पूर्व कोरोना की त्रासदी से सकुचा विश्व त्रस्त एवं अस्त व्यस्त था तब कुछ कृष्ण भक्तों की टोली गीता जी गाने में मस्त थी। सनातन धर्म की, कृष्ण रंग में रंग जाने की, जो भक्ति सदियों पूर्ण विलुप्त हो गई थी इसका पुनः आरंभ किया गया,

इससे ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से लोगों के घर-घर गीता, हर कर गीता के लक्ष्य को मन में स्थापित कर, कृष्ण भाव व कृष्ण लीला का परचम लहराया गया। हम सौभाग्यशाली हैं इस क्रांति अभियान अर्थात् लर्नगीता के साक्षी बनें।

लर्नगीता के कुछ पक्ष आपके समक्ष प्रस्तुत हैं।

  • प्रतिदिन कक्षा
  • विवेचन सत्र
  • परीक्षाओं का स्वरूप
  • सेवाओं का प्रकार
  • अन्य नवीन उपलब्धियाँ व कीर्तिमान

गीता कक्षा - इन कक्षाओं का एकमात्र उद्देश्य गीता पढ़ें, पढ़ायें और जीवन में लायें हैं।

विवेचन सत्र - विवेचन सत्र गीता परिवार का विविध व विशेष कार्यक्रम है। गीता विवेचक - आदरणीय संजय मालपाणी भैया जी, आदरणीय आशू गोयल भैया जी, आदरणीय विकास वैद्य भैया एवं आदरणीय श्री निवास वर्णेकर काका जी, आदरणीय वंदना वर्णेकर काकी जी, आदरणीय कविता दीदी, आदरणीय रुपल दीदी यह सभी हर शनिवार व रविवार को अत्यंत सुंदर व गुह्य अर्थपूर्ण विवेचन सत्र लेते हैं ।

परीक्षाओं का स्वरूप - विश्व में संचालित हो रही यह गीता परीक्षायें अत्यंत ही अद्भुत है। इसने परीक्षा की परिपाटी बदल ही दी है। एक अत्यंत अनोखी परीक्षा है इसमें परीक्षा लेने वाला और परीक्षा देने वाला दोनों की होड़ लगी रहती है सभी ओर हर्ष उल्लास व प्रेम का वातावरण होता है यह कृष्ण की कृपा है।

प्रशिक्षण की भी अत्यन्त अनोखी रीति है यहां। कार्यकर्ताओं की ऊर्जा देखने लायक होती है यह कभी नहीं थकते, न रुकते हैं निरंतर चलते ही रहते हैं। गीता परिवार का कार्य 35 विभागों में चल रहा है। 18 समय विकल्पों के साथ 13 भाषाओं में गीता सिखाते हैं। 9 भाषाओं में गीता की पुस्तक प्रकाशित की गई है। इस संपूर्ण कार्यक्रम की डॉक्यूमेंट्री कार्यक्रम में दिखाई गई। इसके पश्चात् गीता पर आधारित 5 वर्ष से 65 वर्ष तक के सभी वर्ग के गीता साधकों के द्वारा रुचिपूर्वक अंत्याक्षरी संपन्न की गयी। बहुत ही रोमांचक अंत्याक्षरी थी। परम पूज्य स्वामी गोविंददेव गिरी जी महाराज कार्यक्रम में पधारे हैं। स्वामी जी ने 141 कार्यकर्ताओं का अभिनंदन किया जो लोग पहले दिन से जुड़े हुये हैं।

कार्यक्रम में परम पूज्य स्वामी जी के आशीर्वचन -

परम पूज्य स्वामी गोविंददेव गिरि जी ने कहा कि जो इस गीता सेवा में समर्पित हैं उनकी सभी सेवायें अद्भुत है। यह 141 कार्यकर्ताओं के नाम नहीं, यह नामावली हैं। सभी कार्यकर्ताओं का अभिनंदन किया। परम पूज्य स्वामी जी ने कहा कि सभी ने लॉकडाउन में अद्भुत कार्य किया है। छत्रपति शिवाजी महाराज का जीवन जिन मूल्यों पर आधारित है वे सभी जीवन मूल्य

भगवद्गीता में उपलब्ध है। वास्तव में भगवद्गीता ही जीवन उत्थान का आधार है और यह आधार जिन-जिन लोगों को प्राप्त हो जाये वे निश्चित ही चमकेंगे। भगवान् इस प्रकार का कार्य गीता परिवार के कार्यकर्ताओं द्वारा करा रहे हैं यह देख कर मन प्रसन्न हो जाता है। हम 'गीता पढ़ें, पढायें, जीवन में लायें' सूत्र को प्रमाणित कर अपने जीवन का उत्थान करेंगे, उसी प्रकार हमें इस कार्य को करते रहना चाहिये। अभ्यास करते रहें। अभ्यास करते रहने से हम आगे बढ़ेंगे। गीताव्रती हम बन ही गये हैं, अब हमें गीता मनीषियों को भी आगे लाना चाहिये एवं गीता समर्पित जीवन जीने वालों की भी अपेक्षा रहेगी यह कार्य भगवान् स्वयं अपनी इच्छा से निर्माण करके अपनी शक्ति से चला रहे हैं। भगवान् में मन लगाने वाले कार्यकर्ताओं को हमें अगले वर्ष तक आगे लाना होगा। गीता जीवनव्रती निर्माण करना होगा। हम आदर्श रख सकते हैं जो अनेक क्षेत्रों से हैं।

परम पूज्य स्वामी जी ने गीता प्रेस का भी अभिनंदन किया है। परम पूज्य स्वामी जी ने कहा चुनौतियों का सामना हमें करना होगा। जैसे छत्रपति शिवाजी महाराज ने एक प्रकाश संसार को दिया उसी प्रकार गीता परिवार एक प्रमाण और प्रकाश भारतवर्ष को और पूरे विश्व को देगा। ऐसा मेरा विश्वास है इसलिये अपने मार्ग पर सुदृढ़ रहने का मार्गदर्शन दिया। गीता मनीषियों को बनाने का आग्रह किया। शतकोटी हनुमान चालीसा के प्रसंग की ओर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है यह परम पूज्य स्वामी जी ने कहा एवं गंगा मैया से प्रार्थना की, सबको आशीर्वाद दिया और अभिनंदन किया। आदरणीय आशू भैया जी ने परम पूज्य स्वामी जी के वचनों को ग्रहण किया एवं स्वामी जी को सुनिश्चित किया कि वह उनके आशीर्वाद से यह कार्य पूर्ण करेंगे ऐसा आश्वासन दिया।

आदरणीय संजय भैया ने कहा - यह गीता भक्ति, शक्ति, साधना मार्ग है। 5000 से अधिक गीता सेवी इस कार्य को मन लगाकर निरंतर कर रहे हैं। गीता सेवी जो जून 2020 से जुड़े हैं उनका आदरणीय आशू भैया जी एवं संजय भैया जी ने स्वागत किया।

साधकों के मनोगत -

  • श्रीमती किरण मुंदडा जी - यह विश्वव्यापी कार्य चलता रहे। यह कार्य गीता परिवार का महान कार्य है। योगेश्वर भगवान् कृष्णजी से यही वरदान मिलता रहे।
  • संगीता जी - अमेरिका में गीता का प्रचुर मात्रा में इन्होंने प्रचार प्रसार किया एवं इतनी अच्छी और सुंदर सेवा मिली है, जैसे भगवान् श्रीकृष्ण स्वयं गीता का प्रचार और प्रसार कर रहे हैं। कहा जब हम एक कदम बढ़ाते है तो भगवान् चार कदम बढ़ाते हैं। यह उनका अनुभव है।
  • नारायण शेट्टे जी - ये गीता व्याकरण की कक्षाओं का गीता परिवार में संचालन करते हैं। इनकी व्याकरण में अच्छी पकड़ है इन्होंने परम पूज्य स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज के आश्रम आळंदी में शिक्षा प्राप्त की है। इन्हें वहीं से भिक्षा भी प्राप्त होती थी। बाद में ये घर आ जाते थे और सोचते थे कि इस दान को मैं कैसे भगवान को लौटाऊँगा। एक दिन वे कविता वर्मा दीदी से व रूपल शुक्ला दीदी से मिले। इन्होंने अपना सौभाग्य समझा और अपनी सेवायें गीता परिवार में देना आरम्भ कर दिया।

आदरणीय आशू भैया जी ने कहा यह बड़ा प्रकल्प महापुरुषों के संकल्प से पूर्ण हो रहा है। कार्य करने की हमारी विशेषता के साथ हमें भगवान् का आशीर्वाद भी चाहिये। जो गीता संथा वर्ग इतना ऊपर पहुंच गया, देश- विदेश में पहुंच गया हैं। यह भगवान श्रीकृष्ण स्वयं करा रहे हैं।

गीता संवाद कार्यक्रम के आरंभ की उद्घोषणा आदरणीय संजय भैया जी मालपाणी ने किया और यह जुलाई महीने के प्रथम रविवार से आरम्भ किया गया।

इसप्रकार से देविका कुलकर्णी जी के द्वारा कार्यक्रम का समापन प्रार्थना से किया गया एवं दिनेश पंडिता भैया जी के सूत्र संचालन ने कार्यक्रम को एक तार में बांधे रखा। आनंदमयी वातावरण में दिनेश भैया ने कार्यक्रम को संभाला।

सभी साधकों का व कार्यकर्ताओं का अभिनंदन करते हुये कार्यक्रम का समापन हुआ।

मूल अंक के पृष्ठ देखें ४ पृष्ठ
मूल अंक, पृष्ठ ३०मूल अंक, पृष्ठ ३१मूल अंक, पृष्ठ ३२मूल अंक, पृष्ठ ३३