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गीता मैत्री अंक ५जनवरी से जून २०२३
गीता मैत्री मिलन, संभाजीनगर, 21 जनवरी 2023
१४गीता मैत्री मिलन

गीता मैत्री मिलन, संभाजीनगर, 21 जनवरी 2023

गत 21 जनवरी, 2023 को “गीता परिवार मैत्री-मिलन” की एक अन्य कड़ी के रूप में छत्रपति शम्भाजीनगर स्थित तापड़िया नाट्य मन्दिर सभागार में 'गीता मैत्री समारोह' का आयोजन किया गया जहाँ बड़ी संख्या में उपस्थित होकर सदस्यों और गीता-प्रेमी साधकों ने इसे सफल बनाया।

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पावन सान्निध्य : प.पू.स्वामी गोविन्दगिरिजी महाराज
(संस्थापक-गीता परिवार)
स्नेहिल मार्गदर्शन : डॉ. आशू गोयल जी
(राष्ट्रीय उपाध्यक्ष , गीता परिवार)
समय : प्रातः 9.30 से अप. 12 बजे तक

अथर्ववेद के चौथे कांड के 10वें सूत्र का हवाला देते हुए शंखनाद द्वारा कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ । सभी वय के लोगों और बालकों के मधुर कंठों से गीता जी के श्लोकों के गायन के साथ अनुपम रथ पर सवार योगेश्वर कृष्ण और गांडीवधारी अर्जुन की मनोरम झांकी के साथ सम्माननीय अतिथि डॉ. आशू गोयल जी ने सभागार में प्रवेश किया।

श्रीमती माधुरी जी सोमानी डॉ आशू गोयल जी को और श्रीमती कनक जी मल्ल श्री राजकुमार जी लड्ढा (अध्यक्ष गीता परिवार, मराठावाडा) को ससम्मान मंच पर लेकर गईं जहाँ सर्वप्रथम इन्होंने गीता जी का पूजन कर तत्पश्चात् दीप प्रज्ज्वलन किया । अन्य सम्माननीय अतिथि श्री प्रदीप जी राठी और श्री श्याम जी मनियार ने भी इसमें सहयोग किया। आगन्तुक अतिथियों का सम्मान श्रीमती कनक मल्ल, श्रीमती सूरज होलानी व श्रीमती ऊषा जी धूत ने पुष्प-गुच्छ, शाल व दुपट्टा पहना कर किया । सम्मानित अतिथि व मार्गदर्शक डॉ. आशू गोयल जी को पगड़ी पहनाई गयी और पांडुरंगा विट्ठल राय की मूर्ति भेंट की गयी ।

गीता परिवार कार्यकारिणी संम्भाजीनगर की अध्यक्षा श्रीमती माधुरी जी ने “गीता परिवार” की कार्य-प्रणाली से सबको अवगत कराते हुए यह जानकारी दी कि 'गीता परिवार, शम्भाजीनगर' के सदस्यों द्वारा सवा करोड़ सूर्य नमस्कार के लक्ष्य को पूरा किया गया। साथ ही, बाल-संस्कार, नाट्य-संस्कार, योग नृत्य प्रशिक्षण, साहस संस्कार, प्रज्ञा-संवर्द्धन आदि कार्यक्रमों के लिए कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया गया । विश्व की सबसे बड़ी ऑनलाइन कक्षा-लर्न गीता के तहत 142 से भी अधिक देशों से लगभग साढ़े पाँच लाख लोग गीता परिवार से जुड़कर गीता सीख रहे हैं जो कि 12 भाषाओं मे सिखाई जा रही है ।

परम पूज्य स्वामी श्रीगोविन्द देव गिरि जी के शुभागमन पर उनका सम्मान उन्हें फेटा (पगड़ी), शाल व विट्ठल देव की तस्वीर प्रदान कर किया गया। पूज्य गुरुदेव ने आये हुए सभी 'गीताव्रतियों' का स्वागत सभी को सुवर्ण पदक पहना कर व प्रमाण-पत्र प्रदान कर किया। सबके साथ सामूहिक फ़ोटो भी ली गई। गुरुदेव के कर-कमलों द्वारा श्रीमान् विश्वास जी डोगरे द्वारा हस्तलिखित गीता पुस्तक का विमोचन भी किया गया। अपने उद्बोधन से पूर्व पूज्य गुरुदेव ने “शतकोटि हनुमान चालीसा पाठ” पूर्ण करने के तहत हनुमान चालीसा का एक पाठ सबके साथ किया । उन्होंने बतलाया कि किस तरह वेदों से लेकर गीता तक

“मैत्री” के सिद्धान्त का प्रयोग हुआ है और यह एक महत्वपूर्ण शब्द है। गीता परिवार का ध्येय ही पारिवारिक, सामाजिक मर्यादाओं के अन्तर्गत “मैत्री भाव” का रहा है। उन्होंने यह भी बतलाया कि किस प्रकार हमें गाँवों,मोहल्लों और गलियों में जाकर अधिक से अधिक लोगों को 'गीता परिवार' से जोड़ना चाहिए । जिस तरह हनुमान जी ने सीता जी के प्रति श्रद्धा के साथ लंका में प्रवेश किया, उसी प्रकार गीता के प्रति दृष्टिकोण लेकर हमें आस-पास की लंकाओं में घुसना है। उन्होंने सम्मानित 'गीताव्रतियों' से आह्वान किया कि वे कम से कम पाँच लोगों को सम्पूर्ण गीता का पाठ करवाया और अन्य कार्यकर्ता कम से कम दो लोगों को गीता से जोड़ें ऐसा आवाह्न किया । इस प्रकार हमारा 'ऋषि ऋण' कुछ कम होगा। गीता परिवार के समस्त कार्यकर्ताओं के तन, मन और धन द्वारा किये जा रहे सेवा-कार्य कि प्रशंसा करते हुए उन्होंने हेनरी वर्डस्वर्थ लौंगफेलो की प्रेरणादायक पंक्तियों को उद्धृत किया -

“The heights by great men reached and kept were not attained by sudden flight, but they, while their companions slept, were toiling upward in the night.”

अपने उद्बोधन में आदरणीय आशू गोयल जी ने कहा कि आज से 36 वर्ष पूर्व प.पू. स्वामी जी ने इस 'गीता परिवार' की संकल्पना की। इसे संस्था, फ़ाउन्डेशन, ट्रस्ट या समिति न बनाकर इसे एक परिवार बनाया । उन्होंने कहा कि जिस प्रकार की प्रेरणा उन्हें गीता परिवार से मिलती है, वह अन्यत्र नहीं मिलती। उन्होंने आगे बतलाया कि किस प्रकार एक छोटी सी बूँद महासागर का रूप ले सकती है उसका चिन्तन हम “बिन्दु से सिन्धु” में करेंगे ।

'गीता परिवार' के द्वारा किये जाने वाले विस्तृत कार्यों का 'सिन्धु-दर्शन' कराते हुए उन्होंने कहा कि गीता परिवार कार्य करने के ज्ञान की सही दृष्टि और दिशा देता है ।

उन्होंने गीता परिवार के “पंचसूत्री उद्देश्य कार्यों” के बारे में भी बताया ।

आगे कार्यकर्ता रूपी “बिन्दु” के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि एक उत्तम कार्यकर्ता में पालन करने योग्य ये 9 गुण होने चाहिए-

1. सेवा नहीं-साधना, 2. सहनशीलता, 3. शुचिता, 4. कार्य महत्त्वपूर्ण-मैं नहीं, 5. प्रतिस्पर्द्धा करें-प्रतिद्वन्द्विता नहीं, 6. श्रेय रखें नहीं-बाँटें , 7. चेतन बनें-जड़ नहीं, 8. कार्य में निष्ठा और 9. अपने शब्दों, कार्यों और विचारों पर निरंतर विचार और नियन्त्रण ।

अपने वक्तव्य के समापन पर उन्होंने कार्यकर्ताओं की पचास 'टीम इलेवन' बनाने का आह्वान किया ।

इसके बाद प्रश्नोत्तर काल, समारोह समापन पर आभार वक्तव्य हुआ । तदनन्तर प्रार्थना द्वारा समारोह का समापन किया गया ।

मंच व सूत्र संचालन श्री नन्दकिशोर जी मालपाणी द्वारा किया गया ।

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