कार्यक्रम एवं विवेचन नियोजन - सूत्र सञ्चालन समूह
कोरोना के वैश्विक संकट में एक ओर जहाँ सभी घर में बैठे थे एवं नकारात्मकता से भर चुके थे, वहीं दूसरी ओर प्रातः स्मरणीय परम पूज्य गुरुदेव स्वामी गोविंददेव गिरिजी महाराज द्वारा संस्थापित गीता परिवार के कर्ताकर्ता एक अत्यन्त सकारात्मक ऊर्जा से पूर्ण होकर विश्वकल्याण का नवीन स्वप्न देख रहे थे। गीता परिवार के पंचसूत्री में से एक सूत्र भगवद्गीता को लेकर "हर घर गीता, हर कर गीता" इस ध्येय को अपनाकर ऑनलाइन गीता संथा वर्गों का आरम्भ बड़े सकारात्मकता और नि:स्वार्थ भाव से हुआ। साथ ही अनेक साधकों ने गीताजी को समझने की भी मांग रखी तो उसके लिये शनिवार-रविवार अर्थ विवेचन सत्रों का आरम्भ हुआ।
आज हम यह विवेचन नियोजन विभाग किस तरह कार्य करता है इस पर प्रकाश डालेंगे -
इस कार्य को सुचारू रूप से ऑनलाइन माध्यम से चलाने में तकनीकी संघ पर्दे के पीछे रहकर किसी भी कठिनाई या समय पर समस्या की कोई भी शिकायत किये बिना बड़े ही शांतता से आदरणीय गोपाल भैया नाथावत के मार्गदर्शन में कार्य करता है।
इसी के साथ प्रार्थना और दीप प्रज्ज्वलन करने वाले सेवियों से बात करके उनको सभी विषयों को समझा कर जूम प्रांगण तक पहुंचाने का कार्य नीता दीदी आसपत एवं श्रद्धा करवा दीदी के मार्गदर्शन में चलता है ।
अब इस विभाग का दर्शनीय हिस्सा, जो आप सबके सामने प्रस्तुत होता है वह कैसे? इसकी संक्षिप्त जानकारी जानते हैं...! अर्थात् सूत्र संचालकों का चयन और संचालन कैसे होता है? इसको सभालने का दायित्त्व..नहीं !नहीं ! सौभाग्य मुझे मिला।
सबसे पहले तो प्रत्येक स्तर के आनंदोत्सव में जा जाकर कौन कैसी प्रस्तुति दे रहा है और कैसे बोल रहा है इसका परीक्षण किया जाता है। उनसे कांटेक्ट करके किसी भी माननीय विवेचक का परिचय करते हुये एक से डेढ़ मिनट का वीडियो मंगवाया जाता है। उसके पश्चात् ज़ूम पर दो से तीन बार उनसे पर्सनल मीटिंग करके कैमरा सेटिंग, अपीयरेंस, वेशभूषा, भाषा आदि विषय समझाये जाते हैं। लगभग 1 सप्ताह तक एक एंकर पर कार्य करने के पश्चात् उन्हें स्तर दो या तीन का सूत्र संचालन दिया जाता है। धीरे-धीरे सभी सत्रों के सूत्र संचालन बड़ी सहजता से होने लगते हैं। अब देखते हैं सूत्र संचालकों की चयन पद्धति....! शनिवार रविवार के विवेचन के पश्चात् सोमवार का अवकाश लेकर मंगलवार से ही चुनाव प्रक्रिया आरंभ हो जाती है। सूत्र संचालन ग्रुप में आने वाले विवेचन का समय, दिन और भाषा डाली जाती है। सूत्र संचालक अपने उपलब्ध समय अनुसार समय, दिन और भाषा समूह में लिखते हैं। फिर उन्हें पर्सनल में विवेचन के अध्याय का नाम और विवेचक का नाम भेज कर उनसे स्क्रिप्ट मंगवाते हैं और वह चेक होती है उसमें करेक्शन बतला कर फिर ऑडियो मंगवाते हैं। स्क्रिप्ट लगभग 3:30 मिनट के आगे बिल्कुल भी न जाये इसका बड़ी कड़ाई से ध्यान रखा जाता है। इस प्रकार अत्यन्त सूक्ष्मता से यह सारा कार्य किया जाता है। यही कारण है कि लर्नगीता के अद्भुत प्रबंधन कि चर्चा चारो ओर है। किसी भी तकनीकी समस्या हेतु बैकअप टीम भी रखी जाती है। इसके अतिरिक्त व्याकरण, ट्रेनिंग, चिंतनिका, उद्घाटन समारोह, उत्सव... आदि सत्रों में भी हमारी टीम बढ़-चढ़कर साथ देती है। 20 से 25 सूत्र संचालकों का यह समूह है। जिसमें सभी बड़ी उत्सुकता और प्रसन्नता से सदैव तैयार रहते हैं ।इन सभी प्रक्रिया में नमिता दीदी मेहरा बड़े ही प्रेम और धैर्य से साथ निभाती हैं । पू. स्वामीजी की कृपा से हम इसीप्रकार इस दिव्य कार्य में लगे रहें इसकी ईश्वर के चरणों में पुन: प्रार्थना है।
