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गीता मैत्री अंक ५जनवरी से जून २०२३
०५विभिन्न समारोह

23rd Batch - L1 Opening Ceremony - 09.01.23

कार्यक्रम का शुभारम्भ अमेरिका से श्रीमती चारुशिला दांडे द्वारा सुन्दर प्रार्थना से हुआ एवं तत्पश्चात् ध्रुव ग्लोबल स्कूल संगमनेर के 20 छात्र-छात्राये जिन्होंने खेलो इंडिया में योगासन में गोल्ड मेडल प्राप्त किये थे, सुंदर नृत्य के साथ दीप प्रज्वलन स्तुति कर सबका मन मोह लिया।

23rd Batch - L1 Opening Ceremony - 09.01.23

विभिन्न समारोह

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लर्नगीता के 23वें बैच के उद्घाटन सत्र में 61 देशों से नये 42,000 नये साधकों का स्वागत करते हुए आ. आशू भैया ने सभी कि जून 2020 कोविड महामारी के दौरान प्रारंभ की गई ऑनलाइन गीता कक्षाओं में 142 देशों से अब तक 5,18,000 से अधिक लोग गीता कक्षाओं से जुड़ चुके हैं । ऐसा हमने नहीं सोचा था कि यह इतनी तेजी से विस्तारित हो सकता है परन्तु गीता के प्रति सम्पूर्ण विश्व का आकर्षण अद्भुद है। विश्व का एकमात्र ऐसा ग्रंथ, जिसकी जयंती मनाई जाती है। आदि शंकराचार्य ने तो यहाँ तक कह दिया कि यदि किंचित्मात्र भी गीता जी जीवन में धारण हो जाये तो इस मानव जीवन का ही कल्याण हो जाता है। इस नये बैच में पधारे साधक निश्चय ही अपने कल्याण पथ को गीता परिवार के साथ धारण कर सकेंगे, ऐसा हमारा विश्वास है।

आ. संजय भैया ने गीता परिवार के संस्थापक अध्यक्ष प. पू. स्वामी श्रीगोविंददेव गिरिजी महाराज तथा कार्यक्रम के अतिथि रूप में विशेष रूप से पधारे प. पू. स्वामी श्रीविज्ञानानंद जी महाराज का पूजन व स्वागताभिनंदन किया एवं पूज्यवरों से आज विशेषरूप से गीता कंठस्थीकरण का प्रात्यक्षिक देने हेतु पधारे पांच साधकों 8 वर्षीय गीताव्रती निकुंज राठी, शेगांव, 48 वर्षीय विनीत जोशी, धार (म.प्र.) 31 वर्षीय शीतल खरग, यूके, 31 वर्षीय गीताव्रती वी. वी. लक्ष्मी, जयपुर तथा 31 वर्षीय अनुराधा वी. मूर्ति, बंगलूरु का परिचय कराया। दोनों पूज्यवरों ने सभी पधारे परीक्षार्थियों से विभिन्न अध्यायों से श्लोक पूछे एवं सभी को हतप्रभ करते हुए सभी परीक्षार्थियों ने अनुस्वार विसर्ग आघात पद्धति से अत्यन्त शुद्ध वाणी में कंठस्थ श्लोकों का सस्वर गायन करके जूम, यूट्यूब, फेसबुक आदि पर देश विदेश से जुड़े हजारों साधकों का मन मोह लिया व सभी को प्रेरणा दी कि हमे भी गीता कंठस्थ करनी है।

संजय भैया ने परमपूज्य स्वामी श्रीगोविन्ददेव गिरि जी महाराज का परिचय देते हुए बताया कि स्वामी जी के सान्निध्य व प्रेरणा से 1986 गीता परिवार की स्थापना से ही विभिन्न प्रकल्पों के माध्यम से सनातन धर्म का प्रचार- प्रसार किया जा रहा

है । 36 वेद पाठशालाओं का निर्माण भी पूरे देश में किया गया है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ न्यास ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष प. पू. स्वामी जी ने कहा कि आज लर्नगीता के एक अन्य विशाल बैच के उद्घाटन में बड़े महात्मा विज्ञानानंद जी जुड़े हैं। हमें आश्चर्य होता है कि आज हम 161 देशों में पहुंच गये हैं जो कि सब साधक कार्यकर्ताओं के परिश्रम का परिणाम है। वह विनम्रता और मधुरता से गीता के श्लोकों को सभी को सिखाते हैं। चाहे कितनी ही बार पूछें किन्तु वे नाराज़ नहीं होते हैं। 18वें अध्याय में श्रीकृष्ण ने कहा भी है कि जो गीता ज्ञान मेरे भक्तों को कहेगा वह मुझे अत्यंत प्रिय होगा ।

न च तस्मान्मनुष्येषु कश्चिन्मे प्रियकृत्तमः...18/69

गीता परिवार द्वारा सरल पठनीय गीता के कन्नड़, हिंदी, मराठी संस्करण के बाद तेलुगु संस्करण का विमोचन प. पू. स्वामी जी द्वारा किया गया, शीघ्र ही गुजराती और अंग्रेजी में भी इसका प्रकाशन किया जा रहा है।

"गीता मैत्री" षड्मासिक पत्रिका के चतुर्थ संस्करण जुलाई 2022 से दिसंबर 2022 का विमोचन आशू भैया द्वारा किया गया । संजय भैया ने बताया कि कार्यक्रम के अतिथि IIT खड़गपुर के छात्र रहे हैं। इंजीनियर पूज्य स्वामी विज्ञानानंद जी महाराज एग्रीकल्चर, बैंकिंग, डिफेंस, फाइनेंस, ऐरोस्पेस आदि विभिन्न क्षेत्रों में पारंगत, विश्व हिंदू परिषद के संयुक्त महासचिव, विश्व हिंदू फाउंडेशन के संस्थापक, पाणिनि व्याकरण शास्त्र एवं हिन्दू तत्त्व ज्ञान के श्रेष्ठ अभ्यासक, कई संस्थाओं के मार्गदर्शक मनीषी आज हमारे उद्घाटन कार्यक्रम में साथ जुड़े हैं, आपके आशीर्वाद से हजार हाथियों का बल पाकर हम और भी अच्छा कार्य कर पायेंगे। विज्ञानानंद जी महाराज ने कहा स्वामी गोविंददेव गिरि जी जैसे 10 -20 संत देश में हो जाये तो हिंदू धर्म का कल्याण हो जाये । सर्वप्रथम गीता प्रेस गोरखपुर के माध्यम से धार्मिक पुस्तकों एवं गीता का प्रचार हुआ। प्रभुपाद जी ने गीता को पूरे विश्व में बहुत मान सम्मान दिलाया। स्वामी चिन्मयानंद जी ने गीता ज्ञान यज्ञ के माध्यम से पूरे विश्व में गीता का प्रचार किया । अब यह कार्य गीता परिवार उसके हजारों साधकों के द्वारा पूर्ण कर रहा है, जो बहुत ही आनंद की बात है। 21वीं शताब्दी की सबसे बड़ी चिंता यह है कि वेल्थ और टेक्नोलॉजी में मनुष्य बहुत प्रगति कर रहा है। कंफर्ट और लग्जरी की भी भरमार है किन्तु वैल्यू और संस्कार समाप्त हो रहे हैं। इंग्लैंड और अमेरिका की भी यही स्थिति है। हिंदू अभी भी नहीं जगा तो हमारे देश का क्या होगा। हमारे देश में यह भी दुष्प्रचार हुआ है कि गीता पढ़ने वाला तो साधु बन जाता है जबकि गीता सुनकर तो अर्जुन गृहस्थ रूप में ही रहे हैं। गीता जीवन में चरितार्थ करने से हम निर्भय बनते हैं। हेरोडोट्स का कथन था कि अलेक्जेंडर भारत पर आक्रमण करने आया तो पंजाब में लोगों ने इसका विरोध किया तो उसने यह सोचा कि ऐसा क्यों हो रहा है! वहां उसे पता लगा यहाँ साधु और ब्राह्मण जैसे लोग रहते हैं वह आत्मा को अजर और अमर मानते हैं और वह अपनी संस्कृति के लिये लड़ रहे हैं । क्रांतिकारियों के बारे में भी यह था कि दूसरे देशों में लोगों को फांसी के फंदे पर धक्का देकर चढ़ाया जाता था, लेकिन भारत में क्रांतिकारी भगवद्गीता लेकर दौड़ते हुये स्वयं ही फांसी का फंदा लगा लेते थे। एक मेरा व्यक्तिगत उदाहरण है कि मेरे मित्र आईआईएम के निदेशक थे बोस्टन अमेरिका में पीएचडी करने गये तो वहां टैक्सी वाले ने उनसे पूछा कि यहाँ क्या करने आये हो? उन्होंने कहा कि मैं यहां पीएचडी करने आया हूं तो टैक्सी ड्राइवर ने कहा कि आपके यहां तो भगवद्गीता जैसे बड़े-बड़े ग्रंथ हैं तो यहाँ क्या करोगे । मेरा आप सभी से यही कहना है कि भगवद्गीता बहुत सरल है, जैसा कि स्वामी जी ने कहा है कि 'गीता पढ़ें, पढ़ायें , जीवन में लायें '। प्रत्येक हिंदू को हिंदू धर्म की सेवा में थोड़ा समय लगाना ही चाहिये। अधिक से अधिक लोग जुड़ कर गीता का प्रचार करें। आप सभी को जो अभी गीता संथा वर्ग में जुड़ रहे हैं सभी को बहुत-बहुत शुभकामनायें । अंत में धन्यवाद ज्ञापन छत्तीसगढ़ से भूमिजा बन्डाले दीदी ने दिया जो कि 2021 से गीता परिवार में विभिन्न प्रकार की सेवाये दे रही हैं । समापन प्रार्थना सुनंदा नागोरी दीदी, मलेशिया में कॉस्टयूम डिजाइनर हैं, उन्होंने किया ।

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