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गीता मैत्री अंक ५जनवरी से जून २०२३
१४गीता मैत्री मिलन

गीता मैत्री मिलन धुलिया - 2 अप्रैल 2023

गीता परिवार सदा ही सक्रिय और क्रियाशील रहा है, इसी के अंतर्गत विभिन्न आयोजन होते रहते हैं। इस श्रृंखला में इस वर्ष 2 अप्रैल 2022 को धूमिल में पूर्ण वैभव के साथ गीता मैत्री मिलन समारोह आयोजित किया गया।

गीता मैत्री मिलन धुलिया - 2 अप्रैल 2023
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राधेकृष्ण राधे श्याम के मधुर संगीत के मध्य, गीता परिवार की ओर से सुनीता तांगत दीदी ने आदरणीय संजय जी मालपाणी एवं अतिथियों का सभागार में स्वागत व अभिनंदन किया। पावन योगेश्वर कृष्ण तथा भगवद्गीता की एक प्रति का पूजन एवं दीप प्रज्ज्वलन, श्री संजय जी मालपणी, श्री प्रकाश जी पाठक, गीता परिवार सचिव मनीषा जी, अध्यक्षा सुनीता राठी जी, रेखा जी व मंगला जी द्वारा किया गया।

गोवत्स पूज्य श्री राधाकृष्ण जी महाराज की उपस्थिति में कार्यक्रम और अधिक दिव्यता, भव्यता और गरिमा प्रदान की ओर बढ़ चला।

उन्होंने कहा की श्रद्धेय रामसुख देव जी की परिकल्पना थी कि हर घर गीता हो जो कि गुरुदेव श्री गोविंददेव गिरिजी के संकल्प प्रेरणा से संभव किया जा सका है। भगवद्गीता का स्वरूप विश्व व्यापक है, इसके स्पंदन से संपूर्ण विश्व धन्य हो रहा है, ऐसे भाव उन्होंने व्यक्त किये।

प्रस्तावना के लिए सुनीता दीदी राठी जी को आमंत्रित किया गया, उन्होंने गीता परिवार धुलिया की गतिविधियों, विशेष उपक्रम, कार्यक्रम एवं विविध आयामों से परिचय कराया। इसके पश्चात् आ. संजय भैया जी मालपाणी का स्वागत माल्यार्पण एवं स्मृति चिह्न द्वारा किया गया। सुनीता राठी दीदी ने मुख्य अतिथि श्री प्रकाश जी पाठक भैया का स्वागत किया। गीता परिवार की राष्ट्रीय कार्यकारिणी अध्यक्ष रेखा दीदी मुंद्रा जी का स्वागत मंगला दीदी ने किया।

गीता के अठारह अध्याय, सात सौ श्लोक कंठस्थ करने वाले साधकों का संजय भैया ने यथोचित सत्कार किया। रेखा मनोहर बरहाटे, कल्पना काबरा, नीलेश जी बेनी, राम बागुल जी को गीतव्रती होने का प्रमाण पत्र एवं मैडल प्रदान किया गया। शिल्पा जी काबरा जिन्होंने प्रथम बैच में गीताव्रती होने का गौरव पाया, उनका भी सम्मान किया गया।

रेखा दीदी ने जन समुदाय से गीता परिवार का संक्षिप्त परिचय करवाया।

शतकोटि हनुमान चालीसा यज्ञ आहुति के लिए किरण दीदी मुंद्रा जी द्वारा हनुमान चालीसा का पाठ किया गया।

शालिनी दीदी ने मुख्य अतिथि श्री प्रकाश जी पाठक का परिचय दिया। उन्होंने बताया वे चालीस वर्षों से CA के

अभ्यास के साथ अनेक शैक्षिक संस्थाओं से जुड़े हैं, बहुत अच्छे वक्ता हैं एवं विविध पुरस्कारों से सम्मानित हैं।

श्री पाठक जी ने अपने संबोधन में कहा की गीता किसी युग, किसी कालखंड के लिए नहीं अपितु परिपूर्ण ज्ञान प्रदान करने वाली ईश्वर की मुखवाणी है। हमारे जीवन के भीतर के अर्जुन के सारे प्रश्नो के उत्तर इसमें निहित हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में बल, बुद्धि एवं विनय का समावेश हो, यही प्रार्थना है।

मार्गदर्शक डॉ संजय जी मालपाणी जी ने अपनी ओजस्वी वाणी से सबको मंत्र मुग्ध कर दिया। उन्होंने गीता परिवार की यात्रा को स्मरण करते हुए बताया कि एक ज़ूम मीटिंग से शुरू हुई यात्रा अब विश्व के 147 देशों के हज़ारों गीता प्रेमियों को लाभान्वित कर रही है।

उन्होंने ने बताया गीता दिव्य दृष्टि की ओर ले जाने का प्रयास है। काम, क्रोध, लोभ तीन नरक के द्वार हैं, सीधा बैठना सीखो, आत्म संयमयोग सीखो, श्वास को एक समान करो। मन बुद्धि का समन्वय आवश्यक है, जहाँ मन बुद्धि, कर्म पर समर्पित हो, वहाँ यशस्विता भगवान् पीछे पीछे लेकर आते हैं। कार्य से निष्ठा, कार्य से प्रीति करें। स्नेह दान, श्रेय दान, समय दान, कुछ योग दान करें। उन्होंने कहा हर पीड़ा एक परीक्षा होती है, हर दुःख, संघर्ष परीक्षा समर्थ बनाती है। ईश्वर की इच्छा को सहज स्वीकार करते हुए प्रसन्न रहना चाहिए। संजय जी मालपाणी जी ने इतने जटिल व गूढ़ विषय को अत्यंत सरल भाषा में प्रस्तुत कर सबको धन्य किया।

अंत में उषा काबरा दीदी ने सम्मानित अतिथि गण, सभागार में उपस्थित गीता परिवार के सदस्यों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कार्यक्रम की सफलता में सहभागी रहे सभी प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष भाई बहनों का भी आभार व्यक्त किया।

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