चिंतनिका सत्र
गीता परिवार के माध्यम से आध्यात्मिक चिंतन और निष्काम भक्ति का अनुभव


मुख्य संदेश:
गीता परिवार द्वारा संचालित चिंतनिका सत्र साधकों को श्रीमद्भगवद्गीता के शुद्ध पठन, गहन चिंतन और निष्काम भक्ति में निर्देशित करता है।
परम पूज्य स्वामी श्री गुरु गोविंद देवगिरी जी महाराज के प्रेरक मार्गदर्शन में, गीता परिवार ने गीता जी के ७०० श्लोकों का शुद्ध उच्चारण सीखने हेतु ऑनलाइन कक्षाओं की व्यवस्था की है।
साधक जब समस्त अध्यायों का अध्ययन पूर्ण कर लेते हैं और गीता जी को कंठस्थ कर लेते हैं, तो उन्हें यह प्रश्न आता है—
“अब इसे कैसे समझें और अपने जीवन में कैसे उतारें?”
इसी भाव को जीवन में लाने हेतु आयोजित किया जाता है चिंतनिका सत्र, जो साधक के हृदय में आध्यात्मिक जागृति और गीता की निष्काम भक्तिका संचार करता है।
सत्र का उद्देश्य
चिंतनिका सत्र का प्रमुख लक्ष्य है समस्त विश्व में आध्यात्मिक जागृति का प्रसार।
यह दिव्य प्रयास गीता परिवार द्वारा जगाई गई अलौकिक अलख है, जो साधकों को चिंतन और भक्ति के मार्ग पर अग्रसर करता है।
“चिंतनिका सत्र साधक के हृदय में गीता के शिक्षापथ को जीवंत कर देता है।”
चिंतनिका सत्र कैसे संचालित होता है?
- सत्र प्रत्येक एकादशी के पावन अवसर पर रात्रि ९ बजे से १० बजे तक झूम प्लेटफ़ॉर्म पर आयोजित किया जाता है।
- पूरे १८ अध्यायों का पठन एवं चिंतन ६ भागों में विभाजित किया जाता है।
o प्रत्येक एकादशी में तीन अध्यायों का पठन और तीन अध्यायों का चिंतन होता है।
o छः सत्रों के माध्यम से पूरा पारायण सम्पन्न होता है।
- गीताव्रती साधक पठन और चिंतन के माध्यम से श्रीमद्भगवद्गीता के समस्त अध्यायों में निष्काम भक्ति का अनुभव करते हैं।
- प्रत्येक अध्याय का चिंतन केवल ५ मिनट में समेटना कठिन कार्य है; फिर भी साधकों द्वारा किया गया यह कार्य अत्यंत सराहनीय है।
“साधक पठन और चिंतन में तल्लीन होते ही गीता का सार उनके हृदय में अंकित हो जाता है।”
- प्रत्येक तीन अध्याय में से एक अध्याय का चिंतन क्षेत्रीय भाषा में किया जाता है, जिससे सभी साधक सहजता से जोड़ सकें।
- झूम सदन में १०००+ गीता प्रेमी साधक उपस्थित रहते हैं।
- सोशल मीडिया और यू ट्यूब के माध्यम से हज़ारों साधक भी इस दिव्य आयोजन का लाभ उठाते हैं।
- जुलाई से दिसंबर तक के ६ महीनों में, १२ सत्रों में, ३६ साधकों द्वारा पठन और ३६ साधकों द्वारा चिंतन किया गया।
- १२ सत्रों में से ८ सत्रों में एक अध्याय का चिंतन क्षेत्रीय भाषा में सम्पन्न हुआ।
“चिंतनिका सत्र केवल ज्ञान नहीं, बल्कि अनुभव और भक्ति की यात्रा है।”
सूक्ष्म आह्वान
इस दिव्य सत्र में भाग लेकर आप:
- गीता के संदेश को जीवन में उतार सकते हैं।
- आध्यात्मिक जागृति का अनुभव कर सकते हैं।
- निष्काम भक्ति के मार्ग पर अग्रसर हो सकते हैं।
आप भी इस पुण्य सत्र से जुड़ें और अपने जीवन को सार्थक बनाएं।