- कुल सहभागिता
- 43,155 सक्रिय प्रतिभागी
- भारत
- 5,723 शहरों से 38,915 प्रतिभागियों
- भाषाएँ
- हिन्दी, अंग्रेजी, मराठी, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, गुजराती, बंगाली, ओडिया और नेपाली
- प्रश्न-बैंक
- 5,000 से अधिक अनूठे प्रश्नों
गीता ओलंपियाड – एक दिव्य यात्रा
यह आयोजन केवल भारत तक सीमित न रहकर एक वैश्विक आध्यात्मिक महायज्ञ के रूप में प्रतिष्ठित हुआ।



“गीता पढ़ें, पढ़ाएँ, जीवन में लाएँ” इस पावन ध्येय-वाक्य को हृदय में धारण किए LearnGeeta महाभियान का दिव्य रथ आज अपनी यात्रा के ऐसे स्वर्णिम क्षितिज पर आ पहुँचा है, जहाँ श्रीमद्भगवद्गीता केवल ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन का जीवंत मार्गदर्शन बनकर अवतरित हो रही है। गीता को व्यवहार में उतारना—यही इस महाअभियान का मूल संकल्प है।
इसी संकल्प की पुष्पित-पल्लवित वाटिका में गीता ओलंपियाड एक ऐसे कुमुद-सरोवर के रूप में शोभायमान हुआ है, जिसकी मनोहारी आभा ने जन-मानस को आकृष्ट ही नहीं किया, बल्कि उसे ज्ञान और आनंद की अविरल धारा में स्नान करा दिया। इस उपक्रम ने श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य आध्यात्मिक ज्ञान को अनुष्ठानों की सीमाओं से बाहर निकालकर सरल, सुबोध और सर्वसुलभ रूप में समाज के सम्मुख प्रस्तुत किया है।
खेल, कौशल और संस्कार—एक अद्भुत संगम
25 से अधिक गतिविधियों और सृजनात्मक खेलों के माध्यम से गीता के सूक्ष्म सूत्रों को जीवन में उतारने का एक सहज राजमार्ग निर्मित किया गया। इनमें—
‘अर्जुन के बाण’ (Archery): लक्ष्य-सिद्धि हेतु एकाग्रता, अभ्यास और साधना का महत्व सिखाया
‘अमृत कलश’:जीवन के पाथेय का चयन और मूल्यबोध कराया
स्नेक गेम’:सुख-दुःख की परिस्थितियों में समता और संतुलन का अभ्यास सिखाया
डिवाइन कलरिंग’:द्वारा सबने गीता-सूत्रों में स्थिरता और ध्यान का विकास सीखा
गौ-सेवा एवं संस्कार-सृजन: से सर्वभूत हिते रता:के भाव का प्रस्फुटन सभी के हृदय में हुआ
इन सभी नवाचारों ने मोबाइल गेमिंग की आकर्षक किंतु दिशाहीन प्रवृत्ति को रोचक, लाभदायक, ज्ञानवर्धक और जीवन-परिवर्तनकारी अनुभव में रूपांतरित कर दिया। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि बच्चों और युवाओं को खेल-खेल में अध्यात्म से जोड़ने हेतु गीता के सूत्रों को Gamified किया गया।
एक वैश्विक महायज्ञ | सहभागिता और विस्तार
यह आयोजन केवल भारत तक सीमित न रहकर एक वैश्विक आध्यात्मिक महायज्ञ के रूप में प्रतिष्ठित हुआ।
कुल सहभागिता: 43,155 सक्रिय प्रतिभागी
महिला शक्ति की प्रभावशाली उपस्थिति: 43% महिलाएँ (18,443), 20% पुरुष (8,607), तथा अन्य सहभागी—सभी ने अतिउत्साह से भाग लिया
वैश्विक विस्तार: भारत के 5,723 शहरों से 38,915 प्रतिभागियों के साथ अमेरिका (443), यूके (184), कनाडा (159) और ऑस्ट्रेलिया (86) सहित सहित विश्व के अन्य देशों से भी लोग इस आध्यात्मिक प्रवाह में सम्मिलित हुए।
निष्ठा, पुरुषार्थ और तकनीकी सुदृढ़ता
इस विराट आयोजन के पीछे असंख्य निष्ठावान सेवियों का अथक और समर्पित पुरुषार्थ निहित है।
10 भाषाओं में आयोजन: इसे हिन्दी, अंग्रेजी, मराठी, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, गुजराती, बंगाली, ओडिया और नेपाली में उपलब्ध कराया गया।
5,000+ प्रश्नों का विशाल प्रश्न-बैंक: ओलम्पिआड की सेवी टीम ने 5,000 से अधिक अनूठे प्रश्नों का बैंक तैयार किया, जो सनातन धर्म और गीता के ज्ञान के साथ साथ गीता परिवार के पञ्चसूत्रीय सिद्धांत पर आधारित थे।
सुदृढ़ तकनीकी सुरक्षा: लोकप्रियता के साथ आए साइबर-आक्रमणों को आईटी टीम द्वारा विकसित अभेद्य सुरक्षा प्रणाली ने हर बार निष्फल कर दिया।
तीन आयु-वर्ग, एक साध्य
सुव्यवस्थित संचालन और व्यापक सहभागिता हेतु ओलंपियाड को तीन आयु-वर्गों में विभाजित किया गया है
1. अभिमन्यु वर्ग: 20 वर्ष से कम
2. अर्जुन वर्ग: 20 से 40 वर्ष
3. भीष्म वर्ग:40 वर्ष से अधिक
प्रत्येक वर्ग से सेमीफाइनल प्रतियोगिताओं द्वारा शीर्ष 3–3 प्रतिभागियों का चयन किया जाएगा, जो 1 मार्च को होने वाले मेगा फाइनल में आमने-सामने होंगे।
सम्मान और प्रेरणा
विजेताओं के लिए सम्मान राशि भी उतनी ही भव्य एवं प्रेरक राखी गई है
प्रथम पुरस्कार: ₹1,00,000 + ट्रॉफी
द्वितीय पुरस्कार: ₹51,000 + ट्रॉफी
तृतीय पुरस्कार: ₹21,000 + ट्रॉफी
गीता ओलंपियाडने प्रतिस्पर्धा की पारंपरिक परिभाषा को परिवर्तित कर उसे ईश्वर-भक्ति, आत्म-विकास और लोकमंगल के रंग में रंग दिया है। आधुनिक तकनीक और विज्ञान के इस युग में यह एक दिव्य शंखनाद है—एक ऐसा आह्वान, जो घर-घर, विद्यालयों, महाविद्यालयों, कॉर्पोरेट जगत, ग्रामों-नगरों और विश्व-पटल पर गूँज रहा है। “हर घर गीता, हर कर गीता” इस दैवीय अभियान का यह दिव्य रथ प्रत्येक व्यक्ति के सामान्य जीवन का अभिन्न अंग बनकर सनातन भारतीय ज्ञान-परंपरा का पोषण और संवर्धन करता रहेगा।
25 से अधिक गतिविधियों और सृजनात्मक खेलों के माध्यम से गीता के सूक्ष्म सूत्रों को जीवन में उतारने का एक सहज राजमार्ग निर्मित किया गया।


