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गीता मैत्री
— ४४
स्थान
ईश्वर देशमुख कॉलेज ऑफ़ फिजिकल एजुकेशन ग्राउंड, नागपुर
प्रतिभागी
52,559 छात्र (कक्षा 5 से 12), 302 विद्यालयों से
अध्याय
श्रीमद्भगवद्गीता के 12वें, 15वें और 16वें अध्याय का पाठ
प्रमाणन
World Book of Records, India Book of Records, World Record Book of India
गीता परिवार : चार दशकों की संस्कार-साधना से विश्वचेतना तक

नागपुर में 52,559 बालकों द्वारा सामूहिक गीता पाठ से विश्व कीर्तिमान!

नागपुर की पावन भूमि पर इतिहास रच गया! "ईश्वर देशमुख शारीरिक शिक्षण महाविद्यालय मैदान", हनुमान नगर में आयोजित सामूहिक श्रीमद्भगवद्गीता पाठ ने ऐसा अध्याय लिखा, जो युगों तक प्रेरणा देगा।

नागपुर में सामूहिक गीता पाठ के मंच पर अतिथिगण, पीछे विशाल जनसमूह में बैठे हजारों बालक।

खासदार सांस्कृतिक महोत्सव समिति एवं गीता परिवार के संयुक्त तत्वावधान में हुए इस महाआयोजन में 302 विद्यालयों के 52,559 बालकों ने एक स्वर में भगवद्गीता के 64 श्लोकों का (३ अध्याय, १२वा, १५वा तथा १६वा), संस्कृत में पठण किया — और इसी के साथ यह आयोजन World Book of Records में दर्ज होकर विश्व कीर्तिमान बन गया।

 प्रेरणा, संकल्प और साधना से साकार हुआ गीता महायज्ञ

इस महाभव्‍य आयोजन की प्रेरणा संस्कार भारती की अध्यक्षा सौ. कांचनताई गडकरी एवं केंद्रीय मंत्री माननीय नितिन जी गडकरी के संकल्प से मिली। गीता परिवार नागपुर के अध्यक्ष आ. श्रीनिवास जी वर्णेकर एवं सौ. वंदनाताई वर्णेकर के नेतृत्व में सैकड़ों समर्पित कार्यकर्ताओं ने गत छह माह विद्यालय-विद्यालय जाकर गीता के तीन अध्यायों का शुद्ध उच्चारण सिखाया। लखनऊ से एक लाख गीता पुस्तकें विद्यार्थियों तक पहुँचाई गईं — हर पुस्तक एक दीपक की तरह बन गया, जिसने बालमन में ज्ञान का प्रकाश जगाया।

माननीय नितिन जी गडकरी की गरिमामयी उपस्थिति

भारत सरकार के केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री, माननीय नितिन जी गडकरी ने कहा

“भगवद्गीता जीवन का मार्गदर्शक ग्रंथ है। विद्यार्थियों द्वारा किया गया यह सामूहिक पाठ केवल एक विश्व रिकॉर्ड नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा में आध्यात्मिक चेतना का संचार है।”

उन्होंने इसे नागपुर का गौरव और भारत की संस्कृति का उत्सव बताया।

दिव्यता, भक्ति और गौरव का संगम

परम पूज्य स्वामी गोविंददेव गिरिजी महाराज (संस्थापक, गीता परिवार; कोषाध्यक्ष — श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास) की दैवीय उपस्थिति से आयोजन अलौकिक बन गया। उन्होंने कहा —

“हमारे राष्ट्र को ऐसे भव्य सामूहिक आयोजनों की आवश्यकता है, जो हमें एकता के सूत्र में बाँधें। गीता केवल ग्रंथ नहीं, जीवन का विज्ञान है — जिसका अध्ययन मानव जीवन को श्रेष्ठ, संतुलित और सफल बनाता है।”

गीता परिवार की चतुर्दशकपूर्ति का प्रथम भव्य आयोजन

पांडव पंचमी 1986 से आरंभ हुआ गीता परिवार अब अपने 40 वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। इस चतुर्दशकपूर्ति वर्ष (2025-26) का यह पहला भव्य दिव्य कार्यक्रम आयोजित हुवा है। देश-विदेश में ऐसे अनेक कार्यक्रम आयोजित होने जा रहे है, जिसका समापन कोटा, राजस्थान में एक और दिव्य महोत्सव के साथ किया जाएगा।

प्रमुख अतिथिगण

आयोजन में गीता परिवार के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आ. डॉ. संजय मालपाणी जी, अंतर्राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आ. डॉ. आशू गोयल जी, विधायक प्रवीण दटके, ~डॉ. भागवत कराड, चंद्रशेखर बावनकुले, मेयर दयाशंकर तिवारी~ प्रा . अनिल जी सोले सहित अनेक गणमान्य अतिथियों ने सहभागिता की।

 जब गीता के श्लोक गूंजे

बालकों के कोमल कंठों से जब गीता के श्लोक एक साथ गुजायमान हुए — तो सम्पूर्ण वायुमंडल रोमांचित हो उठा। वातावरण में भक्ति की ऐसी लहर उठी मानो स्वयं देवगण भी आशीर्वाद देने उतरे हों। श्रद्धा से भरी आँखें, कम्पायमान स्वर और हर दिशा में गूंजती “जय श्रीकृष्ण” की ध्वनि — यह केवल एक आयोजन नहीं, आध्यात्मिक ऊर्जा का महासंगम था।

 विश्व रिकॉर्ड के मुख्य बिंदु

आयोजन: “जागर भक्ति का” — खासदार सांस्कृतिक महोत्सव समिति एवं गीता परिवार द्वारा

स्थान: ईश्वर देशमुख कॉलेज ऑफ़ फिजिकल एजुकेशन ग्राउंड, नागपुर

प्रतिभागी: 52,559 छात्र (कक्षा 5 से 12), 302 विद्यालयों से

अध्याय: श्रीमद्भगवद्गीता के 12वें, 15वें और 16वें अध्याय का पाठ

प्रमाणन: World Book of Records, India Book of Records, World Record Book of India

विशेषता: शहर के 7 केंद्रोमे उसी समय तीनो अध्यायोंका पठण ऑनलाइन जुडके; 3,000 विद्यार्थी केवल कुही केंद से ; 1.5 लाख श्रद्धालुओं की साक्षी में आयोजन संपन्न हुआ।

इस कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि इसमें दृष्टिबाधित, विशेष रूप से सक्षम (Differently Abled) बालक-बालिकाओं के साथ-साथ आदिवासी बहुल एवं ग्रामीण क्षेत्रों के अनेक विद्यार्थी उत्साहपूर्वक सम्मिलित हुए।

इस ऐतिहासिक क्षण ने यह सिद्ध किया कि जब बालमन में गीता का प्रकाश जागता है — तब केवल इतिहास नहीं, विश्व कीर्तिमान जन्म लेते हैं। गीता परिवार का यह प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए एक जीवंत प्रेरणा है — “गीता से ही जीवन, गीता से ही भारत।”

पांडव पंचमी 1986 से आरंभ हुआ गीता परिवार अब अपने 40 वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है।

52,559 छात्र (कक्षा 5 से 12), 302 विद्यालयों सेप्रतिभागी
श्रीमद्भगवद्गीता के 12वें, 15वें और 16वें अध्याय का पाठअध्याय