मुख्य सामग्री पर जाएँ
गीता मैत्री अंक १०जुलाई से दिसम्बर २०२५
०७गीता परिवार की उपलब्धियाँ

अनहोनी से होनी: वैशाली दीदी की गीता कहानी

वैशाली दीदी गीता परिवार में सम्मिलित हुई व सारे अठारह अध्यायों को कंठस्थ कर, ग्यारह जनवरी को श्रृंगेरी मठ की परीक्षा केलिये सिद्ध होकर मॉक टेस्ट दी।

वैशाली दीदी और एक अन्य महिला वीडियो कॉल पर अपनी गीता-अनुभव कथा साझा करती हुईं।
वैशाली दीदी और एक अन्य महिला वीडियो कॉल पर अपनी गीता-अनुभव कथा साझा करती हुईं।

मूकं(ङ्) करोति वाचालं(म्), पंगु (लॅं) लंघयते गिरिम्।

यत्कृपा तमहं(वॅं) वन्दे, परमानन्द माधवम्॥

हे कृष्ण भगवान् आप प्रत्यक्ष सगुण साकार रूप में वैशाली दीदी के साथ रहे। अट्ठाईस वर्षों से फेशियल पाल्सी से ग्रस्त वैशाली दीदी के मुख कमल को आपके मुखारविन्द से प्रवाहित गीता मॉं के श्लोंकों के उच्चारण ने जो रूप प्रदान किया है वह हम सभी को दाँतों तले अंगुली दबाने पर विवश करता है। हे भगवान आप पुराणपुरुष व सबके आश्रय स्थान हो।

दीदी के मुख पर आया परिवर्तन मंत्रों की शक्ति का जीता जागता उदाहरण है।

श्रद्धेय स्वामीजी श्री गोविन्ददेव गिरिजी ने एक वक्तव्य में कहा था ……

“ chanting of pure and correct pronunciations changes the vibrations of brain cells programming “

वैशाली दीदी के लिये यह यथार्थ है।