- स्थान
- भाग्यनगर (हैदराबाद)
- तिथि
- 19, 20 एवं 21 दिसम्बर
- सहभागी
- लगभग 150 साधकों
- कार्यकर्ता
- 45–50 कार्यकर्ताओं
गीता परिवार ‘तेजस’ दक्षिणांचल कार्यकर्ता शिविर
समाज और संगठन की नींव कार्यकर्ताओं पर टिकी होती है। कार्यकर्ता ही वह जीवंत शक्ति है जो विचारों को कर्म में परिणत करती है।
भाग्यनगर (हैदराबाद) में 19, 20 एवं 21 दिसम्बर को आयोजित ‘तेजस’ दक्षिणांचल कार्यकर्ता शिविर इस दृष्टि से अद्वितीय रहा। दक्षिण भारत के पाँच राज्यों से आए 18 से 75 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 150 साधकों ने इस शिविर में भाग लेकर गीता परिवार की कार्यपद्धति, साधना और सेवा की गहन अनुभूति प्राप्त की। यह शिविर केवल एक आयोजन नहीं था, बल्कि दक्षिणांचल में गीता परिवार के offline कार्य की सशक्त नींव रखने वाला ऐतिहासिक क्षण था।
नेतृत्व और मार्गदर्शन
शिविर की विशेषता यह रही कि साधकों को गीता परिवार के तीनों आंचल प्रमुखों के मार्गदर्शन का सौभाग्य मिला। राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष डॉ. संजय मालपाणी जी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (दक्षिणांचल) श्री हरिनारायण व्यास जी, अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष एवं LearnGeeta के प्रोग्राम डायरेक्टर डॉ. आशु गोयल जी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (मध्यांचल) श्रीमती प्रमिला माहेश्वरी जी तथा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (उत्तरांचल) श्रीमती मीनाक्षी गुप्ता जी के सान्निध्य ने शिविरार्थियों को अद्भुत वैचारिक समृद्धि प्रदान की। विशेष रूप से चिलकुर बालाजी मंदिर के महंत श्री सी. इस. रंगराजन जी के आशीर्वचन साधकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने।
विविध सत्र और अनुभव
योग एवं आत्मिक साधना के सत्र श्री गिरीश जी डागा, श्री दत्ता जी भांदुर्गे तथा श्री सौरभ जी म्हाळस के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुए। साथ ही अन्य प्रशिक्षकों के निर्देशन में प्रज्ञा‑संवर्धन, संस्कृत‑संथा, हस्तकला एवं रंगोली, नाट्यकला, कथा‑कथन तथा प्रात्यक्षिक प्रबोधन की कार्यशालाओं का आयोजन किया गया। इन विविध सत्रों ने साधकों को आत्मिक, बौद्धिक और सांस्कृतिक समृद्धि प्रदान की। अंतिम दिन डॉ. संजय मालपाणी जी के हृदय ब्रह्म ध्यान के दैवी अनुभव ने साधकों को आत्मिक कृतार्थता का भान कराया।
संगठनात्मक उपलब्धि
इस शिविर ने दक्षिणांचल में गीता परिवार के कार्य को नई ऊर्जा और दृढ़ता प्रदान की। गीता परिवार, भाग्यनगर की अध्यक्षा सौ. श्रद्धा रावदेव जी एवं मंत्री गौरव हेडा जी के नेतृत्व में कार्यरत 45–50 कार्यकर्ताओं के अथक परिश्रम और दृढ़ सेवाभाव ने इस आयोजन को अत्यंत यशस्वी और आनंददायी बना दिया। शिविरार्थियों ने संकल्प लिया कि वे गीता परिवार के कार्यों को और अधिक व्यापकता और गहराई से आगे बढ़ाएँगे।
‘तेजस’ दक्षिणांचल कार्यकर्ता शिविर' ने यह सिद्ध कर दिया कि कार्यकर्ता ही संगठन की आत्मा हैं। जब वे गीता के आदर्शों से प्रेरित होकर सेवा और साधना का संकल्प लेते हैं, तब संगठन केवल बढ़ता ही नहीं, बल्कि समाज में परिवर्तन का वाहक बनता है। गीता परिवार का यह शिविर दक्षिण भारत में एक नवीन अध्याय का आरम्भ है—जहाँ गीता का प्रकाश कार्यकर्ताओं के माध्यम से जन‑जन तक पहुँचेगा।
_"संगठन ही शक्ति है; जब साधना और सेवा से जुड़कर संगठन आगे बढ़ता है, तब समाज में परिवर्तन की नई किरण प्रस्फुटित होती है।"_
भाग्यनगर (हैदराबाद) में 19, 20 एवं 21 दिसम्बर को आयोजित ‘तेजस’ दक्षिणांचल कार्यकर्ता शिविर इस दृष्टि से अद्वितीय रहा।
