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गीता मैत्री अंक ६जुलाई से दिसम्बर २०२३
०९गीता मैत्री मिलन

गीता मैत्री मिलन, उड़ीसा

डॉ. आशू जी गोयल के संग 9 जुलाई 2023

https: www.youtube.com live sg4ShNdxYXw?si Xl8124-e0ega1-aA

गीता देश की एक-एक गली में गुंजायमान हो जाये इस उद्देश्य से हो रहे इन गीता मैत्री कार्यक्रमों की श्रृंखला में गीता परिवार पहुँचा भगवान् जगन्नाथ की भूमि में। उड़ीसा में 9 जुलाई 2023 श्रावण मास कृष्ण पक्ष सप्तमी तिथि रविवार को गीता मैत्री मिलन समारोह का आयोजन किया गया। समारोह का आरंभ मंत्रोच्चार द्वारा कलश स्थापना के साथ किया गया। पूरा हॉल गीता मैया की जय के उद्घोष से गूँज उठा। तत्पश्चात् आदरणीय डॉ. आशू भैया जी, उनकी धर्मपत्नी आदरणीया पूजा दीदी जी व गीता प्रवीण रूपल शुक्ला दीदी जी, श्री केशव पात्रो जी, श्री प्रमोद मोहन्ती जी, श्री रघुनाथ पाड़ी जी द्वारा दीप प्रज्जवलन किया गया। दीप जो कि ज्ञान व सकारात्मकता का प्रतीक है। हमारी सभ्यता व संस्कृति की अलौकिकता का प्रतीक है।

कार्यक्रम के आरम्भ में 12वीं शताब्दी के प्रसिद्ध कवि जयदेव जी के सुप्रसिद्ध गीत गोविन्द की भावपूर्ण प्रस्तुति दी गई। कहते हैं गीत गोविन्द भगवान जगन्नाथ जी को अत्यंत प्रिय है और जहाँ गीत गोविन्द गाया जाता है वहाँ भगवान जगन्नाथ जी स्वयं विद्यमान रहते हैं। कु. नव्या व कु. सुश्री बिटिया ने उड़िया शैली में मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को मुग्ध कर दिया।

परमपूज्य गुरुदेव स्वामी गोविन्ददेव गिरिजी महाराज ने ऑनलाइन रह कर अपने आशीर्वचनों से साधकों को भक्ति एवं ऊर्जा से पूरित कर दिया और बताया कि गीता पठन-पाठन ही विश्व कल्याण का मार्ग है। सभी गीताव्रती साधकों को आदरणीय आशू भैया जी ने शाल व पुष्प गुच्छ से सम्मानित किया। गीताव्रती चिरंजीवी स्पंदन हर्षित व चिरंजीवी चंदन चर्चित जी को सादर नमन जिन्होंने बहुत ही छोटी आयु में गीता जी का कंठस्थीकरण कर लिया है।

आ. आशू भैया जी ने सभी को 'अपनी बात अपने से' इस विषय के मध्यम से आत्मसंवाद का महत्व बताया उन्होंने बताया कि हमारा चित्त ही चित्रगुप्त है जो हमारे हर सत्य असत्य से परिचित रहता है। उन्होंने बताया कि एक सफल व्यक्ति के जीवन में पांच बातों का समन्वय आवश्यक है - 1) ज्ञान 2) वित्त 3) स्वास्थ्य 4) परिवार 5) अध्यात्म

ज्ञान - जीवन में व्यवहारिक ज्ञान आवश्यक है और व्यवहारिक ज्ञान हमें बड़ो की सेवा करने से प्राप्त होता है। ज्ञान असीमित है।

हमें ज्ञान अर्जित करने के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए। ज्ञान की उत्सुकता सदैव बनी रहनी चाहिए। हम अपने बुजुर्गों के अनुभवों से ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं। और यह वरिष्ठों के अनुभव से प्राप्त ज्ञान ही जीवन जीने हेतु सच्ची पूँजी है। राष्ट्र को मजबूत बनाने हेतु भी वृद्धों की सेवा एवं उनसे सीखना अत्यावश्यक है इससे हम भूत से सीख लेकर भविष्य को और सुंदर बना सकते हैं। एक राष्ट्र को मजबूत बनाने हेतु ज्ञान सबसे बड़ा साधन हैं अतः निरन्तर अपने ज्ञान में वृद्धि करते रहें।

वित्त - Money is a great servant but bad master. वित्त का प्रबंधन करें। भविष्य को ध्यान में रखकर वित्त खर्च करे। कर्ज की आदत न डालें। संतोष की आदत डालें। वित्त का उपयोग भोग एवं सदुपयोग दान से होता है। अतः उसका उपयोग उसीप्रकार करें। हम जितना उसका सदुपयोग करेंगे उतना ही उसमे वृद्धि भी होगी। अतः दानादि हृदय के द्वार खोलकर करना भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग रहा है।

स्वास्थ्य - Prevention is better than cure. सदा मुस्कुराते रहें। मुस्कराहट सबसे बड़ी औषधि है। भगवान ने गीता में भी इस पर जोर डाला है। वे स्वयं युद्ध क्षेत्र में अर्जुन को मुस्कुराते हुए ही गीता कहते हैं। साथ ही उन्होंने प्रसन्नता एक मानसिक तप बतलाया है। अतः जीवन मे सदा प्रसन्न रहना आवश्यक है। प्रसन्नता शांति से आएगी एवं शांति से स्वास्थ्य।

परिवार - परिवार में संतुलन बना कर रखें, दायित्वों का पालन करें। आज जो हमारे अधिकार है कल वही हमारे दायित्व हैं। बालक वही सीखते हैं जो देखते हैं। अतः अपना व्यवहार संतुलित रखें। जब बालक आपके सुव्यवहार को देखेंगे तो वे भी वैसा ही ग्रहण करते हुए उन्नति को प्राप्त होंगे एवं हम जानते है कि समाज अनेक परिवारों से मिलकर बना होता है अतः यदि हम समाज के लिए उपयोगी कार्य करना चाहते हैं तो आवश्यक है कि उसका आरम्भ परिवार से करें। हम घोषणा करते हैं - हम बदलेंगे युग बदलेगा। अतः परिवार में मधुरता बनाए रखें। सदैव समभाव रखें। छोटो को संरक्षण प्रदान करें व मित्रता का भाव बनाए रखें। तथा इस माध्यम से समाज मे भी इन सभी गुणों को विकसित करें।

अध्यात्म - स्वयं को जानना ही अध्यात्म है। पुरुष प्रकृति का सबसे अधिक उपयोग करता है। विभिन्न जंतुओं में अनेक शक्तियाँ है किंतु मनुष्य सभी का स्वामी है। अतः यदि हमारे पास शक्ति अधिक है तो दायित्व भी अधिक हैं। अतः मनुष्य को मनुष्य तभी माना जा सकता है जब उसके जीवन मे भक्ति या आराधना हो। यही वह तत्व है जो मनुष्य को अन्य जंतुओं से भिन्न दर्शाता है। अतः प्रतिदिन कुछ भक्ति, धर्म प्रचार व संरक्षण, समाज सेवा करें एवं BE SIMPLE BE SAMPLE बनें। 'देश हमे देता है सबकुछ हम भी तो कुछ देना सीखें।' हमे अवश्य ऐसा बनना है तथा अपने जीवन मे अध्यात्म तो प्रत्यक्ष लाना है।

इस प्रकाश आ. आशू भैया के द्वारा गहन दार्शनिक विचारों को बड़ी सरलता से सभी साधकों के समक्ष रखा। उन्होंने साधकों को टीम इलेवन जॉइन करने हेतु प्रेरित किया। टीम 11 का उद्देश्य है कि गीता परिवार के कार्य को ऑफलाइन माध्यम से विस्तारित करना। घर घर गीता पहुँचाने हेतु आवश्यक है कि हम धरातलीय स्तर पर कार्य करें। इस हेतु विद्यालयों, मंदिरों, सार्वजनिक हॉल इत्यादि उपलब्ध स्थानों पर गीता के पारायण, बाल संस्कार शिविर एवं अन्य सभी कार्यक्रम कर सकते हैं। इससे जन जन तक प. पू. स्वामीजी का संदेश पहुँच सकता है।

अंत में प्रश्नोत्तर सत्र में आदरणीय आशू भैया जी ने प्रबुद्ध गीताप्रेमियों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए उनकी जिज्ञासा को संतुष्ट किया। तत्पश्चात् प्रार्थना के साथ सभा का समापन किया गया।

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