स्तर 2 शुभारम्भ समारोह
अत्यन्त हर्ष एवं आनन्द के साथ 26वैं स्तर - 2 (जुलाई) बैच का शुभारंभ समारोह दिनांक 7 जुलाई 2023 को सायं 7.00 बजे आरम्भ हुआ।
26th Batch - Jul23 - 7 जुलाई 2023
https: www.youtube.com/live/J47Lxk4Fn6I?si=VesPVWErQcyA66-t
परम श्रद्धेय स्वामी श्रीगोविंददेव गिरिजी के आशीर्वादों के साथ गीता परिवार के अन्तरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आदरणीय श्री आशू भैया की उपस्थिति में सौ. मृदुला दीदी असावा ने कार्यक्रम का सूत्र संचालन किया। हनुमान चालीसा पाठ के उपरांत मृदुला दीदी ने दीप प्रज्ज्वलन हेतु एक सुंदर काव्य के द्वारा राजस्थान, जयपुर से भावना दीदी शर्मा को आमंत्रित किया ।
आओ एक दीप जलायें,
भगवद्गीता घर घर लायें
हर मुखमंडल खुशियां डोलें,
ज्योतिर्मय हो मन लहराये
निशा दिवस बन जाये,
हर कर गीता आये
बरसते प्रेमरस में सभी नहायें
ज्ञान का अलख जले,
निर्भय जन मन प्राण हों
आज गंगा धरती पर लायें
विजया ताई गोडबोले की सुमधुर वाणी की ध्वनि मुद्रिका द्वारा शारदा स्तवन के साथ दीप प्रज्ज्वलन सम्पन्न हुआ। तदुपरांत आदरणीय आशू भैया गोयल जी ने सभी साधकों का स्वागत अपनी ओजस्वी वाणी से किया।
आ. आशू भैया ने कार्यक्रम का प्रास्ताविक आरम्भ करते हुए कहा कि भगवान की मंगलमय कृपा से आज हम पुनः एक नवीन शुभारंभ उत्सव मना रहे हैं। यह हमारी जीवन यात्रा को नवजीवन देने वाला क्षण है। मन आनंद से भर गया है, मुझे वह दिन याद है जब 2020 में कोरोना के संकट काल में हमने 2500 प्रशिक्षार्थियों के साथ यह
गीता ज्ञानयज्ञ आरम्भ हुआ था। आज छह लाख सोलह हजार प्रशिक्षार्थी, तेरह विभिन्न भाषाओं में लगभग 2000 वर्गों में प्रशिक्षकों सहित लगभग पाँच हजार सेवियों द्वारा इस अद्भुत गीतायज्ञ में अपने अज्ञान एवं दुर्बलताओं की आहुति देकर ज्ञानवान् बनेंगे।
यह संभव हुआ है परम पूज्य स्वामी श्रीगोविन्ददेव गिरिजी महराज के अनुपम कृपा एवं संकल्प से, एक महापुरुष की दिव्य ज्ञानदृष्टि से, जिनकी दूरदृष्टि मार्गदर्शक पाथेय बन गयी है। हम नहीं जानते थे कि एक छोटा सा बीज एक दिन बड़ा सा वटवृक्ष बन जायेगा, एक ऐसा गीता परिवार बन जायेगा, जो विश्व के सभी लोगों का समावेश कर 'वसुधैव कुटुम्बकम्' का वाक्य सार्थक करेगा। गीता परिवार में जो एक बार आ जाए वह फिर जाने का विचार भी नहीं ला सकता, यहाँ कोई अपने मित्र के कहने पर, कोई किसी रिश्तेदार के निर्देश पर, कोई आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक माध्यम जैसे इन्स्टाग्राम, फेसबुक या WhatsApp पर जानकारी पाकर जुड़ा हैं।
यह गीता आरंभ में संस्कृत भाषा में होने के कारण थोड़ी जटिल लगती है किन्तु बिना मूल्य अमूल्य सेवा देने वाले प्रशिक्षक इसे सरल बना देते हैं। जिस प्रकार मां के लिए अपने बेटे के तोतले बोल भी प्यारे होते हैं, ठीक उसी प्रकार आपके उच्चारण त्रुटिपूर्ण होते हुए भी आप प्रशंसा के पात्र बन जाते हैं ।
गीता परिवार का उद्देश्य केवल संस्कृत का शुद्ध उच्चारण सिखाना ही नहीं वरन् इन अमूल्य गीता में बताये गये योगों को जीवन का अंग बनाकर आपके जीवन में उतारने की शिक्षा देना है। योगशास्त्र क्या है ?
योगासन ही योगशास्त्र नहीं है, यह तो योगशास्त्र का अति सूक्ष्म अंग है। गीता योग सिखलाती है। गीता समग्र योग की बात सिखलाती है ‘योगः कर्मसु कौशलम्’ कुशलता से किसी कार्य को करना योग कहलाता है ।
यो न हृष्यति न द्वेष्टि,
न शोचति न काङ्क्षति।
शुभाशुभपरित्यागी,
भक्तिमान्यः स मे प्रियः॥
जो अनुकूल प्रतिकूल की परवाह न करते हुए समत्व भाव से सारे कर्म उस परमात्मा से जोड़ देता है, वह योगी भगवान को प्रिय है। हम जितने गीताजी में रममाण होंगे उतना हमारा उत्कर्ष होगा, हमारी सोच व कृति दोनो में परिवर्तन आता है और
सुखदुःखे समे कृत्वा,
लाभालाभौ जयाजयौ ।
ततो युद्धाय युज्यस्व
नैवं पापमवाप्स्यसि ॥
जय पराजय लाभ हानि किसी बात की परवाह न करने की स्थिति में हम आ जाते हैं ।
अब दूसरा प्रश्न यह है कि …..
गीताजी कंठस्थ क्यों की जाये ?
यदि हम गीताजी कंठस्थ न करें तो वह ग्रंथ में ही सीमित रहेगी, यदि आपके पास ग्रंथ नहीं तो गीताजी नहीं। कंठस्थ करने से गीताजी सदैव आपके साथ रहेंगी, रात - दिन, सोते - जागते आप भगवद्स्मरण कर सकते हैं।
शुद्ध उच्चारण क्यों आवश्यक हैं ?
शुद्ध उच्चारण से गीता के श्लोक गेय हो जाते हैं। गेय होने पर भाव समा जाते हैं, वह केवल एक क्रिया नहीं रह जाती, गेयता मन को आनंद देती है। एक बार कंठस्थ होने पर गाीताजी जन्म जन्मांतर हमारे साथ रहती हैं। एक तीन वर्ष का बालक मां की गोद में बैठकर, सारी गीता कंठस्थ करता है, यह उसके पूर्व जन्म का सुकृत है। श्री आशू भैया के इस वक्तव्य के पश्चात् कंठस्थीकरण के प्रात्यक्षिक हुए जिसमें आठ वर्ष का छोटा बालक कु. जयेष्णु, श्रीमती शिल्पा राठीजी, श्रीमती सोनाली महावर जी, श्रीमती सनिका जी व श्रीमती जयश्री जी सम्मिलित हुए।
प्रात्यक्षिकों का आनंद लेते व देते हुए श्री आशू भैया ने सभी से जीवन की व्यस्तता से कुछ समय निकालकर 40 मिनट की कक्षा के लिए प्रोत्साहित किया ।
भुवनेश्वर उड़ीसा में हो रहे मैत्री मिलन का व UAE (Dubai) में होने वाले 16 जुलाई के स्नेह मिलन का आमंत्रण जूम प्रांगण में उपस्थित सभी जनों को दिया। गीता कक्षाओं से संबंधित कुछ सकारात्मक प्रतिक्रियायें L2 में प्रविष्ट साधकों ने दीं, जिसमें एक तामिलनाडु के निवृत्त पुलिस निरीक्षक का कथन 'जो गीता अब तक कोर्ट तक सीमित थी, वह दैनंदिन जीवन में आ गयी' बड़ी सटीक व मार्मिक था। मृदुला दीदी का सूत्र संचालन सराहनीय था। इसी प्रकार अन्य भी बहुत सुंदर एवं भावुक मनोगत प्रशिक्षार्थियों द्वारा बोले गये। कार्यक्रम का समापन प्रार्थना के साथ हुआ। सभी आगामी वर्ग हेतु उत्साही थे।


