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गीता मैत्री अंक ६जुलाई से दिसम्बर २०२३
०९गीता मैत्री मिलन

UAE SNEH MEET

AN OFFLINE INTERNATIONAL EVENT - 16th Jul 2023

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अत्यंत हर्ष का विषय है कि जिस गीता परिवार का बीजारोपण 1986 में प. पू. स्वामीजी द्वारा संगमनेर में किया गया था आज वह वट वृक्ष के रूप में परिणत हो चुका है और उसकी छाया न केवल भारत वर्ष किन्तु विश्व के 163 देशों तक जा चुकी है। अब तक इस वटवृक्ष की शाखायें ऑनलाईन माध्यम से फैली हुई थी, किन्तु दिनांक 16 जुलाई को प्रथम अंतर्राष्ट्रीय ऑफलाईन गीता स्नेह मिलन UAE में हुआ।

कार्यक्रम का आरंभ गीता जी के 12वें अध्याय भक्तियोग से किया गया और प. पू. स्वामीजी के विशेष रूप से भेजे गये आशीर्वचनों से सभी ने कृतज्ञता का अनुभव किया। परम पूज्य स्वामी जी ने समझाया कि गीता क्यों पढ़नी चाहिये और अपने जीवन में क्यों लानी चाहिए।

गीता परिवार के कार्याध्यक्ष डॉ. संजय मालपाणी जी एवं अन्तर्राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष डॉ. आशू गोयल जी ने ऑनलाइन जूम माध्यम से श्रोताओं को संबोधित किया। आदरणीय श्री संजय भैया जी ने बताया कि जीवन में योग का क्या महत्व है। गीता जी का पठन-पाठन हमारी आध्यात्मिक उन्नति के लिए और योग हमारे शरीर के लिए अति आवश्यक है।

मुख्य वक्ता के रूप में लर्नगीता कार्यक्रम की प्रोग्राम संयोजक गीता प्रवीण रूपल शुक्ला दीदी जी भारत से वहाँ पहुँची व अत्यन्त गूढ़ विषय 'अहं ब्रह्मास्मि - The Concept of oneness' का निरूपण सहज, सरल व मनमोहक ढंग से किया। उन्होंने बताया कि हम सभी में ईश्वर तत्त्व विद्यमान है। 'ईश्वर अंश जीव अविनाशी। उन्होंने चंद्रमा का उद्धरण देते हुए बताया कि जिस प्रकार चंद्रमा एक है किन्तु यदि हम किसी बर्तन में पानी भर कर चंद्रमा की परछाई देखें तो हमें भिन्न - भिन्न बर्तन में विभिन्न चंद्रमा दिखाई पड़ते हैं उसी प्रकार हम सभी जीव अलग-अलग होते हुए भी उसी एक ईश्वर की प्रतिकृति हैं। अब इससे किसी के मन में विचार आ सकता है कि फिर सभी जीव उतने पवित्र क्यों नहीं है जितनें ईश्वर? तो यह हम सबके पात्र पर निर्भर करता है। पात्र जितना स्वच्छ होगा चंद्रमा भी उतना ही स्वच्छ दिखाई देगा।

क्रोध पर नियंत्रण रखें और क्रोध पर नियंत्रण रखने का सरल उपाय बताया कि क्रोध बढ़नें न दें। उसे महत्व न दें। क्रोध आने पर कुछ समय शांत रहकर उसे रोका जा सकता है। एक अध्याय गीता का पढ़ें क्रोध अपने आप शांत हो जाएगा। हम जितना अध्यात्म तत्त्व के पास जाते जाएंगे उतना ही आनंदित रहेगें।

चले विवेकानंद मार्ग पर शुभ संदेश हमारा यह गीता परिवार के गीत की पंक्तियाँ आज आशू भैया के सान्निध्य में रूपल दीदी ने चरितार्थ किया।

आदरणीय आशू भैया जी ने प्रश्नोत्तर सत्र में बताया कि सद्गुरु की पहचान कैसे हो? हमें लक्ष्य की प्राप्ति के लिए नियम बना कर चलना होगा और उन नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। धर्म की व्याख्या करते हुए बताया कि हमारे निश्चित कर्म ही हमारा धर्म है। भगवान् ने अर्जुन को अपना कर्तव्य न छोड़ने का उपदेश दिया क्योंकि कर्तव्य छोड़ कर किसी का भी कल्याण सम्भव नहीं है। गीता का ज्ञान हमारे ऋषि मुनियों ने संभाल कर हम तक पहुँचाया है और हमें गीता सीख कर अपने ऋषि मुनियों का ऋण चुकाना है।

इस कार्यक्रम के नियोजन हेतु आबूधाबी से बार बार दुबई आकर टेक मैनेजमेंट टीम के प्रमुख श्री सूरज शर्मा भैया ने अद्भुत परिश्रम किया व उनके साथ मिलकर अक्षता दीदी, पूजा दीदी, आकांक्षा दीदी आदि सभी कार्यकर्ताओं ने भी इस आयोजन का बीड़ा उठाया एवं इसको सफलता के उत्कर्ष पर पहुँचाया। श्री वैद्यनाथन जी ने पूरी रात जागकर इस स्नेह मिलन के लिए पोस्टर एवं बैनर्स को प्रिंट करवाकर रात में ही कार्यक्रम स्थल पर लगवाए। श्रीमती सविता बत्रा दीदी का मंच संचालन बहुत ही अद्भुत रहा।

सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि यह रही कि उसी कार्यक्रम में अत्यंत उत्साह के साथ UAE में गीता परिवार की तीन शाखाएँ दुबई, शारजाह व आबूधाबी में स्थापित हो गयीं हैं।

यह कार्य अत्यंत तीव्र गति से चलायमान है। स्वयं योगेश्वर भगवान ही यह कार्य कर रहे हैं, ऐसा अनुभव कार्यक्रम में सभी उपस्थित साधकों व गीतासेवियों ने किया। ऑनलाइन देश विदेश से जुड़कर हज़ारों साधकों ने इस आयोजन का आनंद प्राप्त किया। UAE में नवीन टीम - 11 का भी गठन हुआ जो कुछ इसप्रकार है -

टीम 11 - UAE

  • 1. श्री सूरज शर्मा जी- अध्यक्ष
  • 2. श्री वैद्यनाथन जी - कोषाध्यक्ष
  • 3. श्रीमती अनुजा लाहोटी जी - सचिव
  • 4. श्रीमती भूमिका शाह जी
  • 5. श्रीमती सुमति जी
  • 6. श्रीमती पूजा राय जी
  • 7. श्रीमती सविता बत्रा जी
  • 8. श्रीमती आकांशा राव जी
  • 9. श्रीमती अक्षता जी
  • 10. श्रीमती मनीषा अत्रे जी
  • 11. श्रीमती मनीषा जगेतीआ जी
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