१२Pondering Pages of Geeta Maitri
चौपाई पहचाने खेल
नीचे दी हुईं चौपाइयों के शब्द इधर-उधर किये गए हैं,
क्या आप उन्हें पहचान कर ठीक कर सकते हैं
| 1. | सदा सिद्धि नौ माता राम रसायन दाता जानकी निधि बर दीन के अस के रघुपति दासा अष्ट पासा रहो तुम्हरे |
|---|---|
| 2. | सीता रसिया को काज गुनी सुनिबे अति प्रभु लखन आतुर चरित्र राम विद्यावान करिबे मन को राम चातुर बसिया |
| 3. | सहस्र जोजन ताहि जानू मधुर लील्यो माना मंत्र लंकेस्वर तुम्हरो भए जुग पर बिभीषन सब जाना भानू जग फल |
| 4. | क्रम संकट ध्यान पीरा हनुमान लावै निरंतर हरै मन तें हनुमत छुड़ावै बीरा सब जपत बचन जो नासै रोग |
| 5. | तुम के और मनोरथ सकल राजा फल पर कोई सोइ तपस्वी राम पावै लावै अमित तिन काज जो सब जीवन साजा |
| 6. | मूंज जग सुवन औ जनेऊ महा बज्र ध्वजा केसरीनंदन कांधे तेज बन्दन प्रताप संकर हाथ साजै बिराजै |
| 7. | हनुमत सर्ब सुमिरै धरई चित्त सुख जो न पीरा मिटै संकट कटै सब सेइ बलबीरा करई देवता और हनुमत |
| 8. | दुआरे काहू तुम्हारी लहै रक्षक पैसारे सब सरना तुम राम आज्ञा तुम ना बिनु होत को सुख रखवारे न डर |
| 9. | आवै सुनावै लोक सम्हारो पिसाच तीनों भूत कांपै जब महाबीर तें हांक नाम आपै तेज निकट नहिं आपन |
| 10. | उपकार कुबेर दिगपाल सके सुग्रीवहिं जहां कबि कोबिद कहां तुम राम कहि जम ते पद राज मिलाय कीन्हा ते दीन्हा |
चौपाई पहचाने खेल
उत्तरमाला
| 1. | अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता अस बर दीन जानकी माता राम रसायन तुम्हरे पासा सदा रहो रघुपति के दासा |
|---|---|
| 2. | विद्यावान गुनी अति चातुर राम काज करिबे को आतुर प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया राम लखन सीता मन बसिया |
| 3. | तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना लंकेस्वर भए सब जग जाना जुग सहस्र जोजन पर भानू लील्यो ताहि मधुर फल जानू |
| 4. | नासै रोग हरै सब पीरा जपत निरंतर हनुमत बीरा संकट तें हनुमान छुड़ावै मन क्रम बचन ध्यान जो लावै |
| 5. | सब पर राम तपस्वी राजा तिन के काज सकल तुम साजा और मनोरथ जो कोई लावै सोइ अमित जीवन फल पावै |
| 6. | हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै कांधे मूंज जनेऊ साजै संकर सुवन केसरीनंदन तेज प्रताप महा जग बन्दन |
| 7. | और देवता चित्त न धरई हनुमत सेइ सर्ब सुख करई संकट कटै मिटै सब पीरा जो सुमिरै हनुमत बलबीरा |
| 8. | राम दुआरे तुम रखवारे होत न आज्ञा बिनु पैसारे सब सुख लहै तुम्हारी सरना तुम रक्षक काहू को डर ना |
| 9. | आपन तेज सम्हारो आपै तीनों लोक हांक तें कांपै भूत पिसाच निकट नहिं आवै महाबीर जब नाम सुनावै |
| 10. | जम कुबेर दिगपाल जहां ते कबि कोबिद कहि सके कहां ते तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा राम मिलाय राज पद दीन्हा |

