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गीता मैत्री अंक ६जुलाई से दिसम्बर २०२३
११Soulfull Stanzas

गीता पढ़ें, पढ़ायें और जीवन में लायें; गीता आनंद उत्सव

गीता पढ़ें, पढ़ायें और जीवन में लायें

(१)"गीता ", गीता है जीवन का सार
आओ इसका नित्य पाठ करें !
तन मन में बसा लें प्रभु ध्यान......,
मन से सदा संकीर्तन करें !!

(२)"पढ़ें ", पढ़ें गीता के नित्य श्लोक
भावों को मन में अपने उतारें !
करें ना जीवन में दुःख शोक.....,
हर पल प्रभु छवि ही निहारें !!

(३)"पढ़ाएं ", पढ़ाएं उसे जो मन लगाए
रखे जो धर्म शास्त्रों में निष्ठा !
जीवन में लाए बदलाव गीता.....,
बढ़ाएं प्रभु में प्रीत आस्था !!

(४)"और ", और की चाह मन में ना धरें
है जो उसी में आनंदित रहें !
अपना नहीं है यहां पे कुछ भी....,
फ़िर जीवन से मोह हम क्यों करें !!

(५)"जीवन ", जीवन है जब तक इस धरा पे
मोह माया का बंधन बना रहेगा !
इससे हो यदि पार पाना.....,
तो 'गीता', से हमको जुड़ना पड़ेगा !!

(६)"में ", मेंड ज्ञान की बना इर्द-गिर्द
स्वयं को भ्रम से हम बचाएं !
सदा रहते कर्मों के प्रति सतर्क....,
इस भव सागर से पार हम हो जाएं !!

(७)"लाएं ", लाएं स्वयं से स्वयं में बदलाव
समझें जीवन का सत सार !
रखें जीवन में सम्यक भाव......,
जीवन में उतारें गीता सार !!

(८)"गीता पढ़ें, सबको पढ़ाएं
जीवन में लाएं हम बदलाव !
जुड़के गीता परिवार संग.....,
जीवन में फैलाएं सदभाव !!

गीता आनंद उत्सव

(१)"गीता", गीता है एक महाकाव्य
आओ मिलकर इसको गायें !
लें इससे प्रेरणा हर समय....,
नित जीवन में इसको उतारें !!

(२)"आनंद", आनंद में जीएं हर समय
और आनंद ही हम यहां पे बांटे !
जीवन में मनाएं आनंदोत्सव......,
जीवन को हंसते यहां गुजारें !!

(३)"उत्सव", उत्सव है जीवन का शुभ पल
इस पल को हम तुम यहां रचायें !
उत्साह उमंग उल्लास संग......,
नित्य जीवन को जीते हम जायें !!

(४)"गीता आनंद उत्सव ", पर्व मनायें
हर पल नाचें और गुनगुनायें !
है जीवन का ये सुखद अवसर.....,
आओ इसमें रच बस जायें !!

(५)"गीता आनंद उत्सव ",हर्षाता आए
जीवन में खुशियां भर लाए !
बना जीवन को गीतामय....,
जीवन के लक्ष्यों को पा जायें !!

  • श्री सुनीलानंद, जयपुर
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