SOULFUL STANZAS: श्री कृष्णाचा जयजयकार; मनोगत
SOULFUL STANZAS
श्री कृष्णाचा जयजयकार
भला लाभला गीतापरिवार
सई ताईंनी अध्याय बारावा
सराव करवून शिकविला बरावा
छाया ताईंनी वर्ग घडविला
पंधरावा अध्याय सुलभ करविला
अभय दादांची होती साथ
कायम दिला मदतीचा हात
सुवर्णाताईंचे ऑडिओ ऐकून सुरस
गीता सोपी वाटू लागली खरच
ज्योतीताईंनी साधत प्रापंचिक मेळ
विडिओ तपासायला काढला वेळ
व्याकरण-विवेचन सादरीकरण शिक्षणाचे सूत्र
चारधामयात्रेचे सहज पार झाले पहिले सत्र
प्रभू हेचि दान सर्वांना देवो
श्रीभगवद्गीता कंठस्थ होवो
- सौ. रश्मी प्रविण महाजन, थाणे
मनोगत
(१)"म", मन में आ रहा है बड़ा बदलाव
हूँ जबसे जुड़ा 'गीता', संग मैं !
है ये 'गीता परिवार', वृहत.....,
जिसके हैं साधक लाखों में !!
(२)"नो", नोट्स प्रिंट वीडियो के द्वारा
ये कराते सामग्री उपलब्ध !
नित लेते हैं ऑनलाइन कक्षाएं....,
कराते हैं नित गीता पाठ !!
(३)"ग", ग़र ना हो हिंदी संस्कृत का ज्ञान
तब भी कराते हैं ये याद !
है बड़ी सुलभ इनकी विधि....,
हों जाते हैं सब श्लोक याद !!
(४)"त", तप साधना, हो ध्यान कैसे
ये बतलाते हैं गुरूजी !
हैं गीता परिवार के संस्थापक....,
श्रीगोविन्ददेवगिरी महाराजजी !
(५)"मनोगत", मनोगत है मेरा यही
कि, सभी जुड़ें इससे साधक !
दें जीवन को एक नयी दिशा....,
बनाए 'गीता', जीवन को है व्यापक !!
(६)"मनोगत", मनोगत है कि स्वयं पढ़ें
और पढ़ाएं 'गीता', सभी को यहां !
उतारें जीवन में गीता सार....,
तो, निश्चित होगा कल्याण यहां !!
