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गीता मैत्री अंक १जून से अक्टूबर २०२१
११आओ गीता सेवी बनें

आओ गीतासेवी बनें

जो भक्त ये मेरा परमगुह्य गीता शास्त्र, मेरे भक्तों को बताएगा वह मेरा प्रिय होगा।

भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं 18/68 वें अध्याय मे कहा

य इमं परमं गुह्यं मद्भक्तेष्वभिधास्यति ।
भक्तिं मयि परां कृत्वा मामेवैष्यत्यसंशय: ।।

‘आओ गीतासेवी बनें’ कार्यक्रम में गीता परिवार के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आ. डॉ. संजय जी मालपाणी ने सबको वंदन करते हुए बोला परम पूज्य स्वामी श्रीगोविंददेव गिरिजी महाराज के नेतृत्व में तथा उनके मार्गदर्शन और आशीर्वाद एवं प्रेरणा से यह उपक्रम चल रहा है।

गुरुर्ब्रह्मा ग्रुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः ।
गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः ॥

आ. संजय भैया ने पू. स्वामीजी का स्मरण कर कहा कई प्रकार की सेवाएं देकर इस महायज्ञ में साधक अपनी-अपनी समिधाएं अर्पित कर सकते हैं। इस प्रकार के यज्ञ जब-जब होते है तब-तब एक विशेष प्रकार की उर्जा प्रवाहित होने लगती है।

नेवले (Mongoose) की कहानी सुनाकर संजय भैया ने राजसी और सात्विक यज्ञ का अंतर समझाया। किसी विशिष्ट विषय की प्राप्ति के लिए होने वाले यज्ञ को राजसी तथा बिना किसी इच्छा, कामना के होने वाला सात्विक यज्ञ कहलाता है।

गीता संथा के इस यज्ञ में ना किसी से कुछ लिया जाता है, ना किसी को कुछ दिया जाता है, प्रतिपल साधना के पथ पर एक-एक कदम हम आगे बढ़ाते हुए आगे चलते जाते हैं । केवल सिखाना नहीं बल्की अनन्य भूमिका निभाना ये भी भक्ति है, परा भक्ति है ।

ऐसी अद्भुत सेवा देने के लिए गीता परिवार आमंत्रण लिए आपके सन्मुख खड़ा है। गीता सिर्फ पढ़िए नही पढ़ाइये, लोगों तक पहुचायें।
इस कार्यक्रम की शुरुआत गीता परिवार के शीर्षक गीत से हुई।

शशि त्रिपाठी दीदी ने कार्यक्रम के आरंभ में कहा कि नि:स्वार्थ भाव से सेवा प्रदान करना अर्थात् भगवान से जुड़ना होता है। किसी तरह से हम नि:स्वार्थ भाव से गीता परिवार से जुड़े।

कौन-कौन से क्षेत्र हैं, जहां हम सेवा प्रदान कर सकते हैं। इसमें धनदान की अपेक्षा नहीं, इसमें सेवादान की अपेक्षा है। सेवादान, समय दान में मन को जोड़े, वही दान सात्विक दान होता है जो किसी अपेक्षा से परे होता है।

दान ऐसा हो, “देशे काले च पात्रे च”, अर्थात् देशहित में हो, काल सुसंगत हो और सत्पात्री व्यक्ति के लिए हो, ऐसा जो दान है, वह सात्विक दान कहलाता है। इस सात्विक दान देने के लिए कृतसंकल्प हो जाएं, अतिरिक्त उर्जा, अतिरिक्त समय इस महान कार्य के लिये दें। यह भगवद्कार्य है, यह अपनी-अपनी साधना है।

संजय भैया ने सभी को आवाह्न किया कि आइए इस पवित्र कार्य में जुड़ जाएं।
गीता परिवार के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. आशू गोयल भैया, स्वामीजी की इच्छा पर गीता परिवार के लिए अपना तन , मन, धन सब न्यौछावर कर रहे हैं, उन्होंने सबको गीता सेवी बनने के लिए आवाह्न किया एवं फॉर्म ठीक से भरने का निर्देश देते हुए कहा कि हम लोग 950 से भी अधिक वर्ग चलाते हैं।

IT Dept. के प्रमुख प्रदीप भैया जो पुणे से हैं, वे गीता परिवार को सक्षम बनाने में दिन-रात कार्य कर रहे हैं, उन्होंने अलग-अलग समूह की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि सब मिलकर 28 समूह है जो back end में कार्य करते हैं ।

कुछ महत्वपूर्ण 10 समूह है, उनके जानकार ने बताया कि प्रत्येक समूह का क्या काम होगा और उसे किस तरह किया जा सकता है ।

  • 1. गगन भैया - Software Development
  • 2. सुधा दीदी - रचनात्मक लेखन - Creative Content Writing
  • 3. अमित भैया - तकनीकी सहायक - Tech Assistant
  • 4. गीत भैया - समूह संचालक - Group Coordinator
  • 5. नीलेश भैया - Graphic Designing
  • 6. रागिनी दीदी - शैक्षणिक साहित्य- Academic Literature
  • 7. कल्याणी दीदी - प्रशिक्षक - Trainer
  • 8 प्रसाद भैया - पंजीकरण समूह - Admission Team
  • 9. अनीश भैया - अन्य विशेष योग्यताएँ- Other Special Talent
  • 10. सुरेश भैया - गीता प्रचारक बने - Be a Geeta Pracharak

यह फॉर्म sewa.learngeeta.com पर उपलब्ध रहता है, यदि कोई एक से अधिक सेवाओं में सम्मिलित होना चाहें तो वह प्रत्येक सेवा के लिये दोबारा फार्म भर सकते हैं। आवश्यकता होने पर आपकी भरी हुई सेवा हेतु सम्बंधित विभाग के कार्यकर्ता आपसे संपर्क करते हैं।

अंत में प्रश्नोत्तर का सत्र हुआ एवं प्रार्थना के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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