मुख्य सामग्री पर जाएँ
गीता मैत्री अंक १जून से अक्टूबर २०२१
आनन्दोत्सव
१४गीता संथा वर्गों के अंतर्गत विभिन्न उत्सव

आनन्दोत्सव

भगवान् श्रीकृष्ण की साक्षात् कृपा एवं परमपूज्य स्वामी जी के आशीर्वाद से गीता परिवार द्वारा ऑनलाइन गीता कक्षाओं में हम गीता के 18 अध्यायों का शुद्ध उच्चारण करना चार स्तरों एवं 200 सत्रों में सीखते हैं।

गीता संथा वर्गों के अंतर्गत विभिन्न उत्सव

प्रत्येक स्तर के प्रत्येक वर्ग में समापन समारोह के रूप में आनंदोत्सव का आयोजन किया जाता है। इस ऑनलाइन समारोह में अपने वर्ग के सभी गीता साधक व कार्यकर्ता किसी विशिष्ट मुख्य अतिथि समक्ष एकत्रित हो अपने वर्ग में आये हुए अनुभवों को कविता, संवाद, वीडियो या अन्य रचनात्मक माध्यमों से साझा करते हैं।

सर्वप्रथम समूह संचालक एक आमंत्रण पत्र इमेज या वीडियो बनाते हैं, जिसे अपने प्रशिक्षार्थी समूह एवं फैकल्टी ग्रुप के साथ-साथ माननीय अतिथियों को भी भेजते हैं। वर्ग के सभी गीता साधक ज़ूम मीट में एकत्र होते हैं जहां साधक प्रार्थना, दीप प्रज्ज्वलन, भजन, नृत्य, संगीत, बाँसुरी, योगनृत्य, कवितायें आदि प्रस्तुत करते हैं। गीता को उन्होंने जीवन में कैसे अनुभव किया? क्या उनके जीवन में परिवर्तन हुआ? ऐसा अपना मनोगत व्यक्त करते हैं।

सबसे अधिक प्रसन्नता सभी को तब होती है जब गीता परिवार के अन्य वर्गों से वरिष्ठ कार्यकर्ता माननीय अतिथि बन समारोह में पधारकर अपना मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। एक दूसरे के साथ एक नये परिवार की तरह जुड़ जाना सभी के लिए अविस्मरणीय अनुभव हो जाता है। ऐसे कार्यक्रम से हमें पता चलता है कि गीता जी के माध्यम से अपने जीवन में कितना परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसे ही एक संस्मरण में किसी साधक ने कहा कि उनके गले में इतनी प्रॉब्लम थी वह यदि दो दिन भी बात कर लेते तो उनका गला बंद हो जाता था किन्तु अब गीता जी पढ़ते रहते हैं। उनके गले में सुधार है डॉक्टर ने उनको चुप रहने के लिए कह दिया था किन्तु अब वह बहुत अच्छे से गा सकते हैं । एक गीता साधक को जिन के चर्म समस्या थी और उनकी चमड़ी जलती रहती थी उन्होंने बताया जब क्लास करती थी उनको याद ही नहीं रहता था कि ऐसी कुछ बीमारी है वह बहुत रिलैक्स अनुभव करती हैं। एक साधक ने इस कोरोना काल मे अपने किसी प्रियजन को खो दिया था, उस दु:ख से निकलने के लिए गीता जी का सहारा उन्हें बहुत शांति प्रदान करता रहा।

जब छोटे-छोटे बच्चे श्लोक कंठस्थ करके बोलते हैं तो सचमुच कृष्ण रुपी लगते हैं। यह आनंदोत्सव लेवल 2 लेवल 3 लेवल 4 में भी मनाते हैं। इसमें हम एक दूसरे की प्रसन्नताओं के कारण व दुःखों को भी साझा करते हैं, एक दूसरे के बारे में जानकर परिवार की तरह मिलते हैं इसलिए यह मिलन समारोह “आनन्दोत्सव” है।

मूल अंक के पृष्ठ देखें २ पृष्ठ
मूल अंक, पृष्ठ ४४मूल अंक, पृष्ठ ४५