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गीता मैत्री अंक १जून से अक्टूबर २०२१
प्रथम वार्षिकोत्सव
१४गीता संथा वर्गों के अंतर्गत विभिन्न उत्सव

प्रथम वार्षिकोत्सव

23 जून 2021,

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गीता परिवार ने अपना प्रथम वार्षिकोत्सव 23 जून 2021 को हर्षोल्लास से मनाया। कार्यक्रम का सूत्र संचालन गीता विशारद डॉ. आशू गोयल जी द्वारा किया गया। परम पूज्य स्वामी श्री गोविंददेव गिरि जी महाराज के सान्निध्य और प्रेरणा से आरंभ की गई, गीता संथा कक्षा के प्रथम वार्षिकोत्सव में कई पहलुओं पर प्रकाश डाला गया, जैसे सामाजिक धार्मिक एवं शिक्षा से संबंधित कार्य, आनंद योग, मंत्र उच्चारण, संतों की वाणी, गीता सार सभी पहलुओं को केंद्र बिंदु बना कर इस कार्यक्रम को आनंद पूर्वक मनाया गया। “घर-घर गीता, हर-घर गीता” के उद्देश्य से इन गीता संथा वर्गों की शुरुआत की गई थी। आज की इस शुभ घड़ी जेष्ठ शुक्ल त्रयोदशी एवं छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक का दिवस एवं गीता संथा के प्रथम वार्षिकोत्सव का दिवस सभी ने बहुत आनंद के साथ एकत्रित होकर मनाया एवं उस मंच पर सभी साधकों एवं कर्मठ कार्यकर्ताओं का स्वागत किया गया।

एक वर्ष पूर्व 2 जून 2020 गीता परिवार ने गीता संथा का प्रारंभ करने का मानस बनाया एवं अनुमान लगाया था कि लगभग 500 लोग तो जुड़ ही जायेंगे, लेकिन 2500 से अधिक साधक गीता परिवार से जुड़ गए, गीता विशारद डॉ. आशू गोयल जी ने हमारे दक्षिणांचल प्रमुख गीता परिवार के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हरि नारायण व्यास जी को आमंत्रित किया। उन्होंने सविस्तार बतलाया कि अक्टूबर माह में 10,000 दिसंबर में 16,000 एवं अप्रैल में 25,000, मई में 30,000, जुलाई में 50,000 से ज्यादा लोग अब तक जुड़ गए हैं, और लगभग 2,00,000 से अधिक लोग इसमें गीता सीख रहे हैं, जो कि10 भाषाओं में एवं 10 समय सारणी के अनुसार चार स्तर पर गीता संथा वर्गों में गीता सिखाई जाती हैं। वीडियो, ऑडियो, श्लोकों की पीडीएफ आदि सभी माध्यमों से गीता का विशेष प्रशिक्षण गीता साधकों को दिया जाता है। अब तक स्तर-1 के ग्यारह, स्तर-2 के आठ, स्तर-3 के चार, स्तर- 4 के दो बैच हो चुके हैं। यह संपूर्ण पावन कार्य भगवान श्रीकृष्ण के संरक्षण में एवं गुरुदेव के आशीर्वाद से संपन्न हो रहा है। गीता परिवार यह महान यज्ञ, 3000 कर्मठ कार्यकर्ताओं के अथक परिश्रम से निरंतर करते जा रहा है। गुरुदेव के श्री चरणों में नमन करते हुए हरिनारायण जी ने अपनी वाणी को विराम दिया।

प्रथम बैच के संस्मरण ने सभी को तरोताजा कर दिया। कार्यक्रम में वीडियो दिखाया गया एवं सभी पहलुओं को संजोकर, पिरोकर सभी के समक्ष रखा गया। गीता परिवार के कार्याध्यक्ष आ. गीता विशारद संजय मालपाणी जी ने स्वामी जी के चरणों में साष्टांग प्रणिपात किया एवं उन सभी कर्मठ कार्यकर्ताओं का मन:पूर्वक अभिनंदन व स्वागत किया, जिन्होंने इस संथा वर्गों को सुचारु रूप से चलाने में सहयोग दिया है।
आदरणीय संजय मालपाणी जी ने सर्वप्रथम आ. सुवर्णा काकी जी

का स्वागत किया एवं उनके कार्य की सराहना करते हुए यह बताया कि आदरणीय सुवर्णा काकी जी गीता परिवार की स्वर कोकिला हैं। गीता विशारद श्रीनिवास वर्णेकर जी एवं श्रीमती वंदना वर्णेकर जी का स्वागत किया गया, इन्होंने गीता के श्लोक उन विद्यार्थियों से पूछे, जिन्होंने अध्याय कंठस्थ किये थे।

तदुपरांत गीता परिवार के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष श्री महेंद्र भाई काबरा आर. आर. ग्लोबल ग्रुप के मालिक ने बताया भगवान श्रीकृष्ण का सुवाक्य है “ना हार चाहिए ना जीत चाहिए, जीवन में अच्छी सफलता के लिए, परिवार और मित्र का साथ चाहिए।”

उन्होंने गीता परिवार द्वारा आयोजित आर्ट प्रतियोगिता में पुरस्कृत प्रथम 10 विद्यार्थियों का नाम के साथ स्वागत किया एवं उनकी कृतियों को दर्शाया। आदरणीय गीता विशारद आशू भैया गोयल जी ने भी सभी प्रतिभागियों का अभिवादन किया एवं श्री सत्यनारायण जी मूंधड़ा की पुस्तकों का प्रकाशन परम पूज्य श्रीगोविंददेव गिरी जी महाराज द्वारा किया गया। स्वामी जी के समक्ष 13 पुस्तकों का प्रकाशन आज के दिन किया गया। दास बोध जीवन, जीने की कला, प्रबोधना चा स्वधाम, जीवन विद्या भाग 1-5, आत्मविश्वास के प्रभावी सूत्र, ऐसे अनेक पुस्तकों का प्रकाशन किया गया।

संत वाणी

परमपूज्य स्वामी गोविंददेव गिरी जी महाराज ने कहा अवरत दीप जलेंगे ऐसे पौरुष की आहुति से भारत का भाग्य जागेगा। स्वामी जी ने कहा, अत्यंत आनंद का दिन है कि आज गीता परिवार के द्वारा “learngeeta” का आयाम पिछले वर्ष आरंभ किया गया उसे 1 वर्ष पूरा हो गया है। जब कार्यक्रम में सिंहावलोकन किया जा रहा था तब मैं सभी कार्यक्रम का विवरण सुन रहा था। इन सभी कार्यकर्ताओं और गीता परिवार के सदस्यों की मुस्कुराहट को देख रहा था।

सभी कर्मठ कार्यकर्ताओं का एवं गीता परिवार राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सभी सदस्यों का स्वागत और अभिनंदन किया गया।
5 वर्ष के बालक से लेकर 75 वर्ष तक के लोगों ने भी गीता का कंठस्थीकरण किया है, गीता परिवार के साथ हम लोगों को तो ऐसा लगता है कि आश्चर्य ही घटित हो रहा है, ऐसा विदित होता है कि साक्षात भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त हो रहा है, एवं भगवान श्रीकृष्ण अपने विराट रूप का दर्शन दे रहे हैं। तदुपरांत स्वामी जी ने श्री नारायण जी मुदड़ा का स्वागत किया। सभी को यह संदेश दिया कि आप सभी यह समझे कि मैं आप सभी को भगवान का यह वस्त्र उढ़ा रहा हूं, इसे प्रसाद समझकर ग्रहण करें। भगवान श्री कृष्ण की जय, श्री ज्ञानेश्वर भगवान की जय।

स्वामी जी द्वारा स्वरचित छत्रपति शिवाजी महाराज की आरती को मुद्रित किया गया एवं उसका भी आज प्रकाशन किया गया। छत्रपति शिवाजी महाराज की जय आरती को आदरणीय संजय भैया ने ताल और लय के साथ, सभी गीता साधकों के समक्ष प्रस्तुत किया।

स्वामी जी ने कहा आज बहुत ही पावन दिवस है छत्रपति महाराज के राज्याभिषेक का दिवस एवं 23 जून का वर्ष पूर्ति का दिन जेष्ठ शुक्ल त्रयोदशी का दिन आया और यह संयोग हैं यह यज्ञ विशाल रूप लेने वाला है। स्वामी जी ने कहा मैं अपने भाषण में जब भी छत्रपति शिवाजी महाराज का भाषण या प्रवचन देता हूं तो, मैंने हमेशा से कहा है छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक का दिन इतिहास का सुवर्ण क्षण है, यह हमारे देश के लिए एक संजीवक अमृत पर्व है, इतिहास में हमारा धर्म संस्कृति, मानवता, सात्विकता इससे सब कुछ बचने की संभावना निर्माण होती है, छत्रपति महाराज के व्यक्तित्व ने एक घने अंधकार को चीर दिया उसी प्रकार गीता परिवार भी घने अंधकार को चीरता जा रहा है। यह 95 देश में पहुंच गया एवं सवा दो लाख गीता साधकों को जोड़ता चला गया, जब भगवान किसी का चयन करके इस प्रकार के कार्य करवाना चाहते हैं, तब इस प्रकार की बातें घटित होती हैं।

भगवान ने अर्जुन से भी यही कहा था कि कार्य तो मैं करने वाला हूं तुम्हें मात्र निमित्त बनना है। हम सभी को यह ध्यान रखना चाहिए कि हम सब निमित्त मात्र हैं, इसके लिए भी कुछ पुण्य और पुरुषार्थ की आवश्यकता होती है। भगवान ने हमारे पूर्वजों के सत्कर्म के कारण हमें इस कार्य को करने के लिए चुना है, और हम पर कृपा की है, यह वास्तव में बहुत ही महत्वपूर्ण बात है। जिस कार्य को हम लेकर चल रहे हैं वह हमारे समाज के लिए, देश के लिए एवं मानव जीवन के लिए सर्वोच्च कार्य है। स्वामी जी ने कहा गीता पढ़ने, गीता सिखाने एवं जीवन में लाने के अलावा और कोई भी कार्य सर्वोच्च नहीं हो सकता। राष्ट्र पहले, समाज पहले और मैं पीछे, इस प्रकार का कार्य करते जाएंगे तो हमारा देश आने वाले कुछ वर्षों में सारे विश्व का बलवान देश बनकर उभरेगा।
प. पू. स्वामीजी के ओजपूर्ण वचनों के पश्चात् छत्रपति शिवाजी महाराज की आरती का वीडियो दिखाया गया। संजय भैया मालपाणी जी ने कार्यक्रम में आरती की प्रस्तावना रखी। हर हर महादेव आरती हिंदू साम्राज्य शुभंकर की।

प. पू. स्वामीजी द्वारा हस्तलिखित पावन आरती से सभी को आनन्द की अनुभूति हो रही थी। अंत में राजस्थान कोटा से कार्यकारिणी सदस्या श्रीमती निर्मला मारू जी ने सभी को धन्यवाद देते हुए कार्यक्रम का समापन किया एवं सुंदर समापन प्रार्थना के साथ इस कार्यक्रम का समापन किया गया एवं सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया गया।

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