ऑनलाइन गीता संथा वर्गों का आरम्भ
पृष्ठभूमि
रामकाज कीन्हें बिनु मोहि कहाँ विश्राम
बात 2020 के मार्च-अप्रैल की है जब कोरोना के अचानक आ जाने से सब कुछ एकदम थम सा गया था। गीता परिवार का कार्य भी, जो विगत 34 वर्षों से ऑफलाइन चल रहा था, उसका पहिया भी इस आपदा में मद्धम पड़ गया था। किन्तु पूज्य स्वामी जी में श्रद्धाभाव रखने वाले गीता परिवार के अत्यंत उत्साही कार्यकर्ता कैसे रुक सकते थे। उनके मन में तो रह रह कर एक ही बात आ रही थी कि “रामकाज कीन्हें बिनु मोहि कहाँ विश्राम”। इस विचार से ओतप्रोत कार्यकर्ताओं ने तत्काल ही इस विषय पर चिंतन-मनन किया। जैसे ही कुछ कुछ गतिशीलता दिखी, इसे दैवीय संकेत मान गीता परिवार की दृष्टि ऑनलाइन प्रशिक्षण माध्यम की ओर गई। बस फिर क्या था, गीता परिवार की युवा कार्यकर्ता लखनऊ की गीताव्रती-गीता प्रवीण ज्योति शुक्ला दीदी के निर्देशन में चल रही ऑफलाइन गीता कक्षाओं को संस्कृताचार्या श्रीमती पूनम मिश्रा जी के निर्देशन में ऑनलाइन प्रशिक्षण में परिवर्तित करने का विचार का उद्गम आ. आशू भैया के मार्गदर्शन में आरम्भ हुआ। आरम्भ में 20-25 साधकों के साथ एक ऑनलाइन ज़ूम कक्षा एक व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से प्रयोग रूप में आरम्भ की गयी। फिर शीघ्र ही ऐसी 2-3 कक्षायें और आरम्भ की गयीं।
ऑनलाइन गीता कक्षाओं का प्रयोग व पद्धति देखने हेतु गीता परिवार के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष डॉ. संजय मालपाणी जी भी पधारे व इनका नियमन और लाभ देखकर वह इतने अभिभूत हो गए कि तुरंत ही उन्होंने आशू भैया के साथ मंत्रणा करके इसको विस्तारित कर एक भव्य प्रोजेक्ट के रूप में रूपरेखा बनाने को कहा।
इन कक्षाओं को सैकड़ों, हज़ारों गीताप्रेमियों तक पहुँचाने हेतु एक त्वरित योजना का निर्माण हुआ, जिसमें उत्तम प्रशिक्षित प्रशिक्षकों द्वारा संस्कृत की शुद्ध वैदिक उच्चारण पद्धति जिसमें अनुस्वार, आघात आदि के नियमों का भी समावेश हो ऐसी एक विशिष्ट पद्धति विकसित करने हेतु गीता परिवार के मनस्वी तत्परता से लग गये। सामान्य व्यक्ति को शुद्ध उच्चारण की सुलभता, उनकी भाषा में, उनके समय पर वह भी पूर्णत: नि:शुल्क यह अद्भुत कल्पना थी।
आरम्भ में मात्र 500 साधकों का आँकड़ा मन में लेकर पहला ऑनलाइन प्रशिक्षण प्लेटफार्म लॉन्च किया गया। परन्तु भगवद्कृपा से मात्र 24 घंटे में ही, फेसबुक एवं व्हाट्सएप्प पर सूचना देने मात्र से 2000 से अधिक गीताप्रेमियों के आवेदन प्राप्त हो गये और फॉर्म को तत्काल बंद करना पड़ा। 2000 साधकों को सुगमता से ऑनलाइन गीता सिखाने हेतु एक विस्तृत योजना का क्रियान्वयन आरम्भ हुआ। गीता का शुद्ध उच्चारण सिखाने हेतु प्रशिक्षक एवं तकनीकी सहायता हेतु तकनीकी सहायकों का चयन कर, उन्हें आवश्यक ट्रेनिंग दी गयी व तत्काल इस हेतु आवश्यक साहित्य
कि– कक्षा के बाद भेजने हेतु प्रत्येक श्लोक की ऑडियो, नित्य अभ्यास हेतु अनुपठन विडियो, अनुस्वार, विसर्ग, अघात पद्धति से अभ्यास हेतु पीडीएफ आदि के निर्माण का कार्य आरम्भ किया गया। धीरे धीरे जहाँ जैसी आवश्यकता लगी नये सत्रों एवं नई प्रक्रियाओं का निर्माण हुआ । गीता कक्षाओं में सिखाई जाने वाली शुद्ध संस्कृत पद्धति को प्रशिक्षार्थियों के लिए सुलभ बनाने हेतु श्री नारायण जी शेटे द्वारा “विशेष व्याकरण वर्ग” का एवं परीक्षाओं में उत्तम प्रदर्शन हेतु सुश्री ज्योति जी शुक्ला के निर्देशन में सभी अतिरिक्त आवृत्ति कक्षाओं का आयोजन होने लगा ।
“गीता पढ़ें, पढ़ायें, जीवन में लायें “ इस सूत्र को लेकर इस चार धाम यात्रा में निकले सभी लोगों हेतु पढ़ने, पढ़ाने का कार्य तो आरंभ हो चुका था अब समय था इसे जीवन में लाया जाये इस हेतु से विवेचन सत्रों का आरंभ हुआ। हिंदी अंग्रेजी भाषाओं समेत वर्तमान में आ. संजय भैया, आ. आशू भैया, आ. वर्णेकर काकाजी, आ. वंदना काकी जी, आ. प्रणव जी पटवारी, सुश्री कविता वर्मा जी, सुश्री रूपल शुक्ला जी द्वारा गीता विवेचन किये जा रहे हैं।
कार्य की तीव्र गति को देखते हुये बहुत सारा कार्य जो बिना सॉफ्टवेर की सहायता के बहुत संसाधन लगाने पर हो पा रहा था उस हेतु सॉफ्टवेर निर्माण का कार्य भी आरम्भ हुआ और श्री प्रदीप राठी जी के निर्देशन एवं श्री कवडे सर के अथक प्रयासों से वह अक्टूबर तक इतना तैयार हो गया कि अक्टूबर स्तर 1 का कार्यान्वयन सॉफ्टवेर से ही हुआ। सॉफ्टवेर की टीम रुकी नहीं और एक के बाद एक सभी प्रक्रियाओं को ऑटोमेट करने के लिए सिस्टम का निर्माण होता गया इसीक्रम में गीता साधकों की सभी समस्याओं के समाधान हेतु हेल्प पोर्टल सामने आया। परीक्षा प्रक्रिया को आसान करने हेतु आ. हेमंत भैया द्वारा सिस्टम निर्मित किया गया । अभी एप्प निर्माण के कार्य में भी विवेक सिन्हा जी, श्री गगन जी होलानी, मीनाक्षी जी शाह, आशीष जी, सहित पूरी टीम तीव्रता से इसमें लगी हुई है।
23 जून, 2020 को 2000 गीता प्रेमियों का पहला ऑनलाइन गीता वर्ग आरम्भ हुआ। इसके उद्घाटन समारोह में गीता परिवार की सभी शाखाओं ने बढ़चढ़ कर भाग लिया। तत्पश्चात् यह कार्य अपना विराट रूप लेता गया । जुलाई माह में सभी जनों को गीता के शुद्ध उच्चारण के साथ ही अर्थ के अवगमन हेतु आ. संजय भैया व आ. आशू भैया के द्वारा सप्ताह में एक दिन विवेचन सत्र होने आरम्भ हो गये। सितम्बर से हिंदी, अंग्रेजी के साथ ही मराठी भाषा में भी कक्षा आरम्भ की गयी । रात्रि 10 बजे का समय सत्र जुड़ गया। अब कुल 10 समय सत्रों एवं 3 भाषाओं में गीता सिखाई जाने लगी । इसके अतिरिक्त देशों के जुड़ने की संख्या भी बढ़ती जा रही थी अतः NRIs गीता प्रेमियों हेतु अलग से कुछ कक्षाएं आवंटित की जाने लगी । गीता कक्षाओं में से ही लोग आगे आये कि हमारी अन्य भाषाओं में भी कक्षाएं आरंभ करें, साहित्य तैयार करवाने का बीड़ा वह उठाने को तैयार हैं। इसके फलस्वरूप ओड़िया, गुजराती, तेलुगु, बंगला, तमिल इन भाषाओं के समावेश के साथ ही अब कुल 8 भाषाओं में कक्षाएं उपलब्ध थी। अक्टूबर माह में गीता सीखने हेतु 36 देशों से साधकों की संख्या 2000 से 12000 तक पहुँच चुकी थी । जनवरी तक 50 देशों से 20 हज़ार एवं जुलाई में 1 वर्ष पूर्ण करते करते यह संख्या ४० हज़ार तक पहुँच चुकी थी। पूरे देश में फैली गीता परिवार की शाखायें, कोरोना की आपदा को सुअवसर में परिवर्तित करने हेतु एक मंच पर आकर खड़ी हो गयीं। तेलुगु भाषा का रागिनी पोलीसेट्टि जी, तमिल का गोपालरत्नम जी, ओडिया का प्रमोद बारीक़ जी, मलयालम का विवेक विजयन जी, बांग्ला का आशा साबू जी एवं कविता तापडिया जी, गुजराती में हीरल पटेल, कन्नड़ का संतोष सोमानी जी, सुरेश कुम्भर जी, श्रीवत्स जोशी जी सहित उनकी पूरी टीम ने मुख्य रूप से कार्यभार संभाला ।
लगभग एक वर्ष की यात्रा पूर्ण करते हुए 10 भाषाओं में 13 समय सत्रों में 117 देशों से दो लाख सत्तर हजार से भी अधिक गीता साधकों को 10 भाषाओं में 13 समय विकल्पों के साथ दृश्य-श्रव्य माध्यमों से गीतामृत का रसपान कराने का कीर्तिमान गीता परिवार स्थापित कर चुका है।
इस यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में अक्टूबर 2020 में ‘गोल्डन बुक ऑफ द वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में गीता परिवार की ऑनलाइन संथा का नाम विश्व के सर्वाधिक गीता प्रतिभागियों के पंजीकरण हेतु अंकित हुआ। तब से इस संख्या में
सतत् वृद्धि हो रही | इस विराट यात्रा को प. पू. स्वामी गोविंददेव गिरिजी महाराज, संस्थापक गीता परिवार का प्रत्यक्ष मार्गदर्शन व राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर के अन्य संतों के आशीर्वाद प्रत्येक वर्ग के उद्घाटन समारोह में प्राप्त हो रहे हैं। अभी तक प. पू. स्वामी रामदेव जी महाराज, प. पू. स्वामी अवधेशानंद जी महाराज, प. पू. स्वामी शरणानन्द जी महाराज, प. पू. स्वामी राजेन्द्रदास जी महाराज, प. पू. ब्रह्मविहारी जी महाराज, प. पू. रमेश भाई ओझा, प. पू. सद्गुरु जी, प. पू. रविशंकर जी, प. पू. सुगुणेंद्र तीर्थ जी महाराज आदि अनेक संतों के आशीर्वाद प्राप्त हुये । 5157वीं गीता जयंती के पावन अवसर पर देश/विदेश के 70 देशों के 50,000 साधकों के द्वारा श्रीमद्भगवद्गीता के 12वें अध्याय के 1 लाख पाठ के साथ, गीता परिवार द्वारा पहली बार एक दिव्य वातावरण का निर्माण कर कोरोना काल में समूचे विश्व को भारत के उज्ज्वल भविष्य के प्रति आश्वस्त किया।
Learngeeta गीता संथा वर्ग के प्रमुख आकर्षण बिंदु - https://youtu.be/CURS9MQ3w98 –
1. हिंदी व अंग्रेजी सहित भारत की 10 प्रमुख भाषाओं में प्रशिक्षण
2. प्रातः 6 से रात्रि 2 बजे तक 13 समय सत्रों का चुनाव
3. उत्तम प्रशिक्षकों के सान्निध्य में सप्ताह में 5 दिन 40 मिनट की लाइव ऑनलाइन ज़ूम कक्षा
4. चार स्तरों में सम्पूर्ण 18 अध्यायों का प्रशिक्षण
(L1- दो अध्याय, L2- चार अध्याय, L3- छः अध्याय, L4- छः अध्याय)
5. गीता कंठस्थीकरण की परीक्षायें एवं उत्तीर्ण करने पर अंकपत्र एवं प्रशस्तिपत्र
6. शीघ्रातिशीघ्र प्रशिक्षार्थियों की सभी शंकाओं का समाधान
7. कक्षा के बाद WhatsApp ग्रुप में प्रशिक्षार्थियों द्वारा भेजी गयी ऑडियो का ट्रेनर द्वारा भूलसुधार
8. Learngeeta.com पर पंजीकरण व अन्य साहित्य की उपलब्धता
9. नि:शुल्क ऑडियो/वीडियो/पीडीएफ आदि अनुस्वार, विसर्ग, आघात आदि के नियमों के साथ शुद्ध साहित्य की उपलब्धता
10. हिंदी व अंग्रेजी भाषा में गीता समझने हेतु साप्ताहिक अर्थ विवेचन सत्र
11. समस्याओं हेतु त्वरित टोलफ्री हेल्पलाइन, सेल्फ हेल्प पोर्टल, ऑनलाइन चैट व ईमेल सपोर्ट आदि की उपलब्धता


