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गीता मैत्री अंक १जून से अक्टूबर २०२१
१४गीता संथा वर्गों के अंतर्गत विभिन्न उत्सव

गीता भक्ति दिवस

7 फरवरी 2021,

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योगेश्वर भगवान् श्रीकृष्ण की मधुर वंदना और गीता परिवार के उत्तम गान से कार्यक्रम का आरंभ हुआ ।
भक्ति दिवस के अवसर पर भक्ति के रंग में रंग गया वातावरण। इस समारोह में गीता परिवार की सभी शाखाओं ने भाग लिया और उत्तम कार्यक्रमों से अनुपम छटा बिखेर दी ...

आज के इस उत्तम दिवस पर गीता परिवार की सभी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शाखाओं ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया । सभी ने परम पूज्य स्वामी श्रीगोविन्ददेव गिरि जी महाराज के जन्मदिवस को “भक्ति दिवस” के रुप में मनाने की तैयारी की थी । कार्यक्रम की उद्घोषणा एवं संचालन राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष श्री संजय जी मालपाणी के द्वारा किया गया। उन्होंने सभी उपस्थित लोगों का स्वागत किया ।

आज सारा विश्व इस कार्यक्रम को देखने के लिए उमड़ पड़ा है आज हम प. पू. स्वामी जी का 72वां जन्मदिवस गीता भक्ति दिवस के रूप में मना रहे हैं। 72 देशों से 72हजार लोग जुड़ेंगे, 72दीपों का प्रज्ज्वलन होगा और 72 हजार गीता जी के दो अध्यायों के पाठ होंगे, ऐसी परिकल्पना की गई थी जो परिकल्पना साकार हो सकी है आज जर्मनी से हमारे साथ जुड़े हैं यशराज पारीख जी वे प्रार्थना करते हैं और कार्यक्रम का आरंभ करते हैं, आज इस कार्यक्रम में जूनापीठाधीश्वर अवधेशानंद गिरि महाराज जी भी जुड़े हैं जिस कारण हम सबका सौभाग्य जागृत हुआ ।

राजस्थान की कोटा शाखा द्वारा 72 दीप प्रज्ज्वलित किये गये ।

ततपश्चात् दक्षिणांचल के उपाध्यक्ष आ. हरिनारायण व्यास जी द्वारा स्वागत संबोधन किया गया ...
उन्होंने बताया “आज हमारे प्रेरणा स्रोत पूज्य स्वामी गोविन्द देव जी महाराज का 72वां जन्मदिवस का पावन दिन आया है । इस अवसर पर उनके छोटे भ्राता श्री जूनापीठाधीश्वर महामंडलेश्वर श्री अवधेशानंद गिरि जी महाराज स्वामी जी भी उपस्थित हुए हैं यह हम सबका सौभाग्य है।

तत्पश्चात् हम सबके मध्य उनका परिचय प्रस्तुत किया उन्होंने बताया कि स्वामी जी सबसे पुराने जूनापीठ के पीठाधीश्वर है और भारत माता मंदिर हरिद्वार, और समन्वय परिवार के अध्यक्ष हैं एवं समस्त विश्व में आपकी ओजस्वी वाणी से प्रस्तुत प्रेरणादायक प्रवचनों की श्रृंखला गंगा का प्रवाह होता है, इससे करोड़ों जनमानस लाभान्वित हुए हैं, होते रहते हैं, हम सभी गीतासेवी आपको प्रणाम करते हैं ।

मित्रों पारस पत्थर के बारे में सबने सुना होगा हमारे स्वामी गोविन्द देव गिरि महाराज जी ऐसे ही पारस है जिन्होंने अपने श्री कमलहस्तों से ऐसे कई कार्य किए जो स्वर्णाक्षरों में लिखे जाएंगे। गीता और वेद के पथ पर समाज को अग्रसर करने का कार्य किया जिसके कारण जन - जीवन स्वर्णमय हो गया है, जिस कारण हम सभी स्वयं को सौभाग्यशाली समझते हैं ।

हमारे गुरुदेव अपने जन्मदिन को विशेष रुप से मनाने के लिए सहमत नहीं होते तो हमारे राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष श्री संजय मालपाणी जी ने विचार रखा कि आज के इस पावन दिवस को हम सब गीता भक्ति दिवस के रुप में आयोजित करेंगे और 35 वर्षों से जो कार्य हो रहे हैं उनको स्वामी जी को समर्पित करते हुए उनका सम्मान करें और जन्मदिन को मनाने का विचार किया। इसप्रकार हम सभी को स्वामी जी के दर्शन और इस पावन दिवस को स्मरणीय बनाने का अवसर भी मिल गया ।

आज से 35वर्ष पूर्व स्वामीजी ने जनमानस को संस्कारों का सृजन हो वे शक्तिशाली युवा बन सकें, इस हेतु स्वामी जी ने महर्षि वेदव्यास प्रतिष्ठान की नींव रखी। श्रद्धेय स्वामी जी ने आज से तीन दशक पूर्व ही यह अनुमान लगा लिया कि आने वाले समय में बालकों में संस्कार और वैदिक परंपराओं का ज्ञान समाप्तप्राय सा हो जाएगा तो हमें आज ही सजग होना होगा और आपने घर घर गीता जीवन में गीता के संकल्प का बेड़ा उठा लिया। प. पू. स्वामी जी की यह संकल्पना आज सत्य हो रही है। आज समाज में अपने पवित्र ग्रंथों की जानकारी उनका अध्ययन अध्यापन नगण्य सा होता जा रहा है। तब स्वामी जी के द्वारा प्रसारित गीता ज्ञान यज्ञ अंधेरे में प्रकाश पुंज सूर्य के समान अपना स्थान बना रहा है। 35 वेद विद्यालयों के माध्यम से वेदों की सेवा की जा रही है वैदिक मंत्रोच्चार, कर्मकांड, दैनिक पूजन शुद्ध पठन पाठन चल रहा है।

इसप्रकार की उत्तम जानकारी विश्वभर से जुड़े साधकों तक आ. हरिनारायण व्यास जी ने पहुंचाकर अपने दायित्व का निर्वहन किया। तत्पश्चात् गीता परिवार के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आ. संजय भैया जी ने अतिप्रशंसनीय शब्दों से आभार व्यक्त किया । और कहा कि “स्वामी जी का परिचय देना शब्दों के द्वारा असंभव है उनके दैवीकार्य स्वयं ही उनका परिचय देते हैं । पूज्य स्वामी जी ने पूरे विश्व को गीता पाठ और वेद पठन के माध्यम से कोरोना काल में जिस प्रकार गति प्रदान की है वह स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा।

आइये उनके परिचय को एक सुन्दर गीत के द्वारा जानते हैं गीत शब्दों की यह मालिका प.पू. स्वामीजी के ही प्रिय शिष्य श्री प्रणव पटवारी जी ने तैयार की है, जिसे आ.विजया गोडबोले जी ने उत्तम संगीत में संयोजित कर गाया है और संगमनेर ध्रुव ग्लोबल स्कूल के बच्चों ने उसको नृत्य में प्रस्तुत किया है।

**हे गुरु वर से संतप्रवर हे..भारत के गौरव साकार
चरणों में नित अवनत अवनी
गगन करे तव जय-जयकार...(3).....
मुख मंडल पर आभा अरुणिम, लोचन में विधु शीतलता
वाणी में गंगा मैया की अविरल सुंदर निर्मलता
कथा सुनें जो व्यथा हरे सब
कर दे सबको कृष्णाकार**

**करदे मनको कृष्णाकार
गगन करे तब जय जय कार......
श्रीज्ञानेश्वर कृपा सरोवर
तुम अरविंद सुगंध निधान
रस लोलुप हम भ्रमर निरंतर
करते हैं गुंजारव गान
गीतामृत मकरंद प्राप्त हो श्रुतियों का जो है रस सार
गगन करे तव जय-जयकार जय-जयकार....
वेदकोश आसेतु हिमाचल
चले महाभारत के साथ
रामकथा से मूल सीखकर सेवा में जुट जाएं हाथ
भारत का हर बालक पाए
भारतीयता का संस्कार
गगन करे तव जय-जयकार...
रामलला निजधाम विराजे
त्रिभुवन गूंजे मंगलगान सदियों से थे आस लगाए
कितने- कितने कर बलिदान
क्षण- क्षण कण -कण राम समर्पण
भरे भाग्य के कोश अपार
गगन करे तव जय-जयकार
क्लेश बचे मन में न कोई
लवलेश तमोगुण काया में
आस कौन सी रहे अधूरी
कल्पतरु की छाया में
पूर्ण चंद्र गोविंद कृपा कर
चकोर व्याकुल सुना सुना
गगन करे ..........**

इतनी मोहक भक्तिमय गुरु स्तुति मधुर गायन के साथ सबके हृदय भक्तिमय हो उठे। जिसका गायन लखनऊ से आ. विजया गोडबोले जी ने किया। नृत्य संयोजन सोनाली महापात्र जी ने एवं इसकी वीडियो एडिटिंग की विजय महापात्र जी ने अविस्मरणीय प्रस्तुति हो गई है।

आज विशेष दिन पर पू. स्वामी जी तो हमारे हैं ही परंतु श्रद्धेय जूनापीठाधीश्वर अवधेशानंद गिरि महाराज महामंडलेश्वर जी हमारे साथ हैं इससे आज का दिन और भी विशेष हो उठा है (स्वामी जी ने अपनी सुसंस्कृत मधुर वचनों से प्राकृतिक सौंदर्य का बखान करते हुए आधुनिकता की विशेषता और आवश्यकता को बताते हुए अपने आशीष वचन कहे) “परमपूज्य श्रीगोविन्ददेव जी महाराज जो विश्व वंदनीय सत्पुरुष जिन्हें पाकर हम धन्य हैं। पूरी धरा धन्य है, उनकी विद्या, विभूति, विचार, वैराग्य, विरति उनका विलक्षण व्यक्तित्व, विशेष चिंतन, आचरण आदि सब विलक्षणता लिए हुए है।

वह चारित्र्य की पारदर्शिता रखने वाले हैं जो आज के दिन धरा पर आविर्भूत हुए। संन्यासियों का कोई जन्म मरण होता नहीं फिर भी उनका जन्म राम कार्य हेतु हुआ जान पड़ता है भगवान् ने उन्हें चुना है ऐसा लगता है।

पाँच सौ वर्षों का संघर्ष हमारे हिन्दू समाज ने देखा, घोर अपमान सहन किया, एकलाख चौहत्तर हजार बलिदान हुए राम लला के लिए एक सुयोग आया कि हमारे भ्राता राम लला के कोषाध्यक्ष चुने गए यह केवल सरकार का काम नहीं है यह चयन श्रीराम द्वारा स्वयं किया गया जान पड़ता है जब हम ऐसा सोचते हैं तो एक विराटता की अनुभूति होती है।“मैं उन्हें पाकर अभिभूत हूं विद्या में वे ज्येष्ठ है। महाराज जी आपका यह जन्म दिन मंगलमय हो । आपके साथ इस पास देश-विदेश के साधक ज्ञान पिपासु भिक्षु सभी है उनके मध्य मुझ अकिंचन के भी शब्दों को पहुंच सके इस आशा से आपको जन्मदिन की मंगलकामना प्रेषित करता हूं।

**सुदिनं सुदिनं जन्मदिनम्,
तव भवतु मंगलं जन्मदिनम्।
तव विजयी भव सर्वत्र सदा,
भवतु मंगलं जन्मदिनं तव।।**
Happy Birthday to you swami ji
(मैं आंग्ल भाषा का भी प्रयोग यहां करुंगा।)

आप जियें हजारों साल, जब तक धरा में उर्वरा है, सूर्य में प्रकाश है, चांद में शीतलता है तब तक आपकी कीर्ति अक्षुण्ण रहे । कहते हुए अपनी वाणी को विराम देते हैं ।

इसके पश्चात संजय भैया जी ने अत्यन्त सुन्दर शब्दमालिका द्वारा पूज्य स्वामी जी का आभार व्यक्त किया और बताया कि किस प्रकार कोरोना काल में उत्तर भारत के अध्यक्ष आशू जी गोयल ने गीता जी का प्रचार प्रसार कर इसे 72 देशों तक पहुंचाया है ।

आशु भैया ने अपनी संयमित स्पष्ट मधुर वाणी में सबको प्रणाम निवेदित किया और गीता परिवार के प्रचार प्रसार अभियान की जानकारी दी । “मुद मंगलमय संत समाजू जो जग जंगम तीरथ राजू” के साथ अपना संभाषण आरंभ किया। “यह अवसर मंगलमय है ।आज हम 35 वर्षों से बाल संस्कार केन्द्र के माध्यम से गीता पढ़ने-पढ़ाने और बालकों में संस्कार सृजन के कार्य करते आ रहे थे परंतु करोना काल आते ही सब ठप हो गया तो स्वामीजी की प्रेरणा से विचार आया और जून माह की एकादशी तिथि से आरंभ की गई आनलाइन कक्षाएं। भय था कि लोग आएंगे अथवा नहीं परंतु पहली बार में ही 500 गीता साधकों के साथ ये कक्षाएं आरंभ करने हेतु परिकल्पना मन में की गयी किन्तु मात्र दो दिनों में ही 2000 साधकों ने फॉर्म भर दिया। आ.संजय भैया जी के निर्देशन में आरंभ किया पहली बार में 2000 एडमिशन हुए अभी जनवरी तक 72,000 एडमिशन होंगे हैं ये सब प. पू. स्वामी जी की कृपा और संजय भैया जी के निर्देशन में संभव हो सका।

10 भाषाओं में गीता शिक्षण कार्य चल रहा है जिसमें 1500 से अधिक सेवाभावी कार्यकर्ता बंधु है जो दिन रात कार्यरत है जो सीख रहे, वहीं प्रशिक्षक बन रहे, तकनीकी ज्ञान, व्याकरण ज्ञान तक प्राप्त कर रहे हैं ये सब स्वामी जी की कृपा से ही संभव हुआ है और हम सबको आप सभी महान संतों का आशीर्वाद बराबर मिल रहा है इतना बड़ा यज्ञ, जिसमें सभी बड़े-बड़े संत, स्वामी, योगाचार्य, चिंतक, विचारक आ रहे हैं और निरंतर आशीष वर्षा हो रही है तो वहां हमारी जय तो निश्चित ही लगती है। यहाँ लगता है भगवान ने 18वें अध्याय के 68वें श्लोक में जो कहा है वह नित्य साकार हो रहा है -

**य इमं परमं गुह्यं मद्भक्तेष्वभिधास्यति।
भक्तिं मयि परां कृत्वा मामेवैष्यत्यसंशयः।।18.68।।”**

इसके पश्चात् 72 हजार पाठ किए गए, आदरणीया विजया दीदी और पूजा दीदी के साथ रुपल दीदी, ज्योति दीदी, कविता दीदी, ख्याति दीदी, अंजली दीदी जो सभी गीता प्रवीण बन चुकी है उनकी भक्तिमय प्रस्तुति हुई। ततपश्चात् जयसिंहपुर के छात्रों की ऊर्जावान प्रस्तुति हुई जिसे मध्यांचल की प्रभारी आ. प्रमिला ताई जी द्वारा चलाए जा रहे अर्जुन मंच द्वारा प्रस्तुत किया गया। अतिउत्साह प्रदान करने वाली शक्ति आराधना ताण्डव स्तोत्र के माध्यम से प्रस्तुत हुई।

इन सभी प्रस्तुतियों के पश्चात् प.पू. स्वामीजी ने अत्यंत प्रफुल्लित हृदय से बोलना आरंभ किया तो सभी के मन एक डोर में बंध गये। भगवद्गीता वीरता का ग्रंथ है, गीता के श्रोता, वक्ता, दूसरे श्रोता रथ स्तंभ पर विराजमान हनुमान जी पराक्रम के साकार विग्रह हैं। सत्य यह है कि जब मन में पराक्रम बढ़ता जाएगा तब गीता जीवन में आएगी। स्वामी विवेकानंद जी का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए कहते हैं एक बालक स्वामी जी के पास आया उसने स्वामीजी से गीता सीखने का निवेदन किया उन्होंने उसकी शारीरिक स्थिति (जो अत्यंत दुर्बल थी) देखकर कहा कि तुम पहले छह माह तक फुटबॉल रोज खेलों तब मेरे पास आओ तभी तुम गीता सीखने योग्य हो सकोगे, ६ माह फुटबॉल खेलने का अर्थ न समझने पर समझाया कि यदि तुम जैसे दुर्बल लोग गीता सीख भी लें तो उसे जीवन में उतारने से तो वंचित रह जाएंगे। जीवन में गीता शक्ति के साथ समाहित होती है।’

इसके पश्चात् साधकों के हृदय में गीता के प्रति भक्ति प्रवाहित करते हुए प. पू. स्वामीजी अपनी बात को आगे बढ़ाते हैं -
“यें भगवद्गीता जिसकी समझ में आ जाए उसका तो जीवन सुधर जाए, यह ग्रंथ मानव कल्याण हेतु है । यह भगवान की वाणी है । संसार के कितने ही ग्रंथ पढ़ लीजिए और एक भगवद्गीता पढ़ ली जाए तो अन्य की आवश्यकता नहीं । ज्ञानेश्वर महाराज ने कहा समस्त ग्रंथों का सार महाभारत में आया और भगवद्गीता वेदो का सार है वेदों के अध्ययन के साथ पढ़ने पर गीता पूर्णतः समझ में आ जाती है। आज पवित्र दिवस पर यह संकल्प करें कि गीता सदा पढ़ते रहेंगे और पढ़ाएंगे। उसे छोड़ना नहीं । आप गीता पढ़ते रहें आपके पास तो कृष्ण और विजय स्वयं ही चले आएंगे।”

पूणा का गीता परिवार वेद की ऋचाओं के साथ वैदिक आरती उतारता है ।

गीता भक्ति दिवस जैसा नामकरण आपने आज के दिन का रखा तो इसमें गीता और भक्ति जैसे दो महत्वपूर्ण शब्द समाहित हैं। ये आए तो ये भगवद्गीता से ही है उन्होंने कहा मैं नित्य पढ़ता हूं और ज़्यादा पढ़ने का प्रयास करता हूं।

इस उत्तम दिवस पर गीता परिवार की इन सभी शाखाओं ने अनेक कार्यक्रम प्रस्तुत किए- आस्ट्रेलिया, यूएसए, जर्मनी, कुवैत, बहरीन, ओमान, स्वीडन, यूके, यूएई, लखनऊ, हैदराबाद, जयसिंहपुर, पुणे, पानीपत, कोलकाता, पूज्य भूमि धूलिया, मानवत, नागपुर, यवतमाल, औरंगाबाद, दिल्ली, इचलकरंजी, कुलबर्गी, खामगाँव, लातूर, सोलापुर, परभणी, अहमदनगर, शेवगाव, पाथरी सांगली कोल्हापुर, नांदेड़ आर्वी, अकोळे, श्रीरामपुर, दक्षिणकोल्हापुर, येवला, राहुरी, बल्लारी, जालना, जिंतूर, कुरुंदवाड, नासिक, पिंपरी-चिंचवाड़, पिपरिया, आग्रह, देवभूमि आळंदी, मोशी आळंदी, अलीगढ़ अंबड, बेलगाम, भुसावल, अकोळा, विदर्भ, धारूर, कोपरगांव, एरंडोल, गोकाक, इंदौर, , कुरुक्षेत्र, जलगांव, सिल्लोड, सेलू, गाडरवारा, लोहर्दा, लोणावळा, पंजाब, महू, नांदगांव, परतवाड़ा, राहटनी पुणे, रत्नागिरी, रिसोड, सादिया, असम, शहाबाद, उज्जैन, सिवनी वालुज, वर्धा, लासूर, औरंगाबाद, विश्वनाथ चारिआली, सोनीपत,परली, सिहोर, आमगांव, गोलियां, माजुली, अनंगपुर,गंगापुर, नसरूल्लागंज, सिहोर, कार्बु, श्री सद्गुरू निरानंद महाराज वेद विद्यालय आळंदी, श्रीसंतनामदेव महाराज वेद विद्यालय औंध ,श्री समर्थ विद्यालय ढालेगाव, महाराज प्रताप सिंह विद्यालय जम्मू श्री कृष्ण वेद विद्यालय पानीपत,वेद विद्यालय सावरगांव, श्रुति स्मृति विद्यापीठ त्र्यंबकेश्वर, महर्षि वेदव्यास प्रतिष्ठान पुणे, श्रीमती शांति देवी जालान इंटरनेशनल वैदिक सेंटर कोलकाता, स्वामी स्वरूपानंद वेद विद्यालय पुणे, वेद विद्यापीठ मणिपुर वेद विद्यालय पालघर, वेद विद्यालय नोखागाव, बीकानेर, संत ज्ञानेश्वर वेद विद्यालय वृंदावन उम्र प्रदेश , श्री गौरांग वेद विद्यालय कोलकाता,वेद विद्यालय अंजेर गुजरात, श्रीराम वेद विद्यालय धुळे,श्री जगदंबा वेद विद्यालय पाटपुरी पुणे, देवी अहिल्या वेद विद्यालय इंदौर, श्री संत गुलाबराम

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