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गीता मैत्री अंक १जून से अक्टूबर २०२१
१४गीता संथा वर्गों के अंतर्गत विभिन्न उत्सव

गीता संथा दीपोत्सव

गीता परिवार द्वारा दीपावली का पर्व प.पू. गुरुदेव के सान्निध्य में ऑनलाइन आयोजित किया गया। दीपोत्सव पर्व का आरंभ श्रीकृष्णाष्टकम् के मधुर संगीत पर एक नाट्य प्रस्तुति के साथ हुआ। अप्रतिम नृत्य विधा कथकली के प्रदर्शन ने सम्पूर्ण वातावरण को भक्तिमय बना दिया ।

15 नवम्बर 2020, https://fb.watch/v/12b9nJDK2/

तत्पश्चात् गीता परिवार के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. आशू जी गोयल ने सभी को सम्बोधित किया, साथ ही प.पू स्वामी जी के सान्निध्य में पूजन करने का आवाह्न किया।

गीता परिवार के सभी विशिष्ट एवं वरिष्ठ गणमान्य सदस्यों, राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आ. संजय जी मालपाणी, प्रशिक्षकगण, तकनीकी बंधुगण, कार्यकर्ता बंधुओं, गीता जी की सेवा में लगे संयोजक बंधुओं एवं सभी गीता सेवियों से आग्रह किया गया कि सभी परम पूज्य स्वामी जी द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ ही अपने अपने घरों के मंदिर, छतों, बाल्कनी आदि पर एक-एक दीप जलाएं।

गीता परिवार के तकनीकी संचालकों से निवेदन किया गया कि इस पावन पर्व दीपोत्सव से जितने भी लोग जुड़े हैं उनकी रिकार्डिंग करें। तत्पश्चात् प. पू. स्वामी जी ने दीप प्रज्ज्वलित किया।

आदरणीया विजया ताई गोडबोले द्वारा अपने मधुर कंठ से दीप प्रज्ज्वलन प्रार्थना प्रस्तुत की गयी, जिसने सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। इस गीत के साथ ही विजया ताई ने सभी को दीपोत्सव पर्व की शुभकामनायें प्रेषित की । आ.आशू भैया ने विजया ताई जी को आभार व्यक्त किया और कहा कि आज आपके मधुर संगीत ने इस पर्व को अविस्मरणीय बना दिया है ।

तत्पश्चात् प.पू. स्वामी जी से निवेदन किया गया कि वे अपने आशीर्वचन से सभी भक्तों को कृतार्थ करें। पूज्य स्वामीजी के आशीष वचनों से सभी के हृदय में मंगलमय ज्ञानदीप प्रज्ज्वलित हो उठे। उनके हस्तकमलों से इसी कार्यक्रम में गीता परिवार पुणे द्वारा जीवन विद्या 1/2 भाग का प्रकाशन हुआ, जिसे पू. स्वामीजी द्वारा सराहा गया। पू. स्वामी जी ने इस प्रार्थना के साथ अपने आशीष वचनों का आरंभ किया “जीवन प्रबन्धन के बारे में मैंने पूरे लॉकडाउन के समय में 135 दिनों तक Life management according to Vedic Vidya बोलता रहा इन प्रवचनों को कलम बद्ध किया गया उनमें से केवल 20 प्रवचन ही आए हैं इन दो पुस्तकों में। इसमें जीवन प्रबंधन के सभी नियम और परम्पराएं जो हमारे ऋषियों द्वारा बताई गई है उनको समाहित किया गया है। जीवन प्रबंधन की इस पुस्तक के लेखन, संकलन और प्रकाशन का कार्य, गीता परिवार के उत्साही सदस्य आ. सत्यनारायण जी मुदड़ा जो लगातार सेवा में रहते हैं, द्वारा संचालित किया गया है। इसका मुद्रण अत्यंत सुंदर व आकर्षक ढंग से हुआ। आज मैं उसके प्रकाशन की विधिवत् घोषणा करता हूं। “भारत माता की जय।”

इसके पश्चात् भगवत् धाम को सिधारे, उनके अत्यंत प्रिय एवं कृपापात्र शिष्य, धुलिया के पूर्व नगर प्रमुख स्व. केळे काका जी को विनम्र श्रद्धांजलि दी गई। कठिन समय से गुजर रहे उनके परिजनो को सांत्वना देते हुए उनके द्वारा बताया गया कि भगवद्गीता में कहा गया है कि जीवन और मृत्यु का खेल तो अनवरत चलता ही रहता है। परिजनों में शोक भी सदा रहता है। उसको विराम किस तरह दिया जाए यह सीखने की बात है। दुःख को, विषाद को सहन कर, पचा कर पुनः नव उत्साह और ऊर्जा से कर्म में प्रवृत्त हो जाना ही गीता को जीवन में समाहित करने का प्रयास है। इस बात से हम यह बताना चाहते हैं कि हमें अपने दुःख पर विजय पाकर अपने कर्तव्य को करना चाहिए। इसका उदाहरण हमारे समक्ष केळे काका का परिवार है।

इसके बाद सामने पधारे हजारों साधकों को सम्बोधित करते हुए उन्होंने गीता परिवार के कार्य के बारे में कहना आरंभ किया। ‘विद्या धर्मेण शोभते’ यही गीता परिवार का मूल उद्देश्य है। विद्या धर्म से सुशोभित होती है, धर्म का मूल है अपना

बढ़ाते जाएं। हम अपने कर्तव्य मार्ग पर सरलता से चलते जाएं यही हमारा पुरुषार्थ है। हम सब मिलकर इस गीता के मार्ग पर चलते रहें।

दीपोत्सव पर्व पर यह उत्तम संदेश प. पू.स्वामी जी द्वारा दिया गया। तत्पश्चात् गीता परिवार के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आ. संजय जी मालपाणी से आशीर्वचनों का एवं परिवार को शुभकामनायें देने का निवेदन किया ।

संजय भैया जी ने प. पू. स्वामी जी के श्री चरणों में प्रणाम निवेदित कर अपनी मधुर वाणी और संयत संयोजित शब्दों में अपना संभाषण आरंभ किया। उन्होंने कहा कि गत 6 माह में ही साठ देशों के 35 हजार से अधिक साधकों को गीता सीखने का अत्यन्त सरल सुलभ प्रकल्प गीता परिवार ने नि:शुल्क उपलब्ध करवा दिया है। धन्यवाद के सैकड़ों सन्देश जब हमारे पास देश-विदेशों से आते हैं तो भगवान् की कृपा से चल रहे इस मंगलकार्य से जनमानस को हुए प्रत्यक्ष लाभ को देखकर मन प्रसन्न हो जाता है। हम सबने जो ज्ञान दीप जलाया है वो अब अनवरत सदा सदा प्रकाशित रहे। इस सन्देश के माध्यम से उन्होंने सभी को दीपावली पर्व की शुभकामनायें अर्पित की।

तत्पश्चात् आ. प्रशिक्षक श्री विकास वैद्य जी ने अपना मनोगत व्यक्त किया और कहा कि में एक दिन में होने वाली सभी कक्षाओं में प्रशिक्षक रूप में सम्मिलित हो सकूं यही भगवान से प्रार्थना है।

गीता विशारद आ. श्री श्रीनिवास वर्णेकर जी ने सभी को दीपावली पर्व की शुभकामनाएं दी। तत्पश्चात् यू.एस.ए.से श्रीमती रश्मि काकानी जी ने अपने सुखद अनुभवों को मनोगत रूप में व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जब मैंने गीता परिवारके learngeeta को ज्वाइन किया था तब मैं एक दुरूह जीवन जी रही थी, दु,:खी थी, मार्ग नहीं सूझ रहा था, तभी मुझे मेरी एक मित्र ने इन कक्षाओं से जोड़ दिया बस तबसे हमारा तो जीवन ही बदल गया।

यू.एस.ए से ही श्रीसोमेश जी व श्रीमती चंचल जी ने भी इस कार्यक्रम में सम्मिलित होकर अपने भाग्योदय को सराहा। तकनीकी विभाग प्रमुख पुणे से आ. प्रदीप राठी जी ने बताया कि हम अगली दीपावली को एक लाख लोगों के साथ होंगे। किन्तु किसे पता था की लगभग 2 लाख 50 हजार संख्या तो अगस्त 2021 में ही हो गयी और पता भी न चला। यह कार्य तो स्वयं भगवान की विभूति है और उसका वर्णन तो मात्र भगवान ही करने में सक्षम हैं।

इसी कार्यक्रम में सोमेश भैया व अन्य कार्यकर्ताओं के आग्रह पर कविता वर्मा दीदी, रुपल शुक्ला दीदी, ज्योति शुक्ला दीदी और अंजली जी के परिचय और उनके प्रेरणा स्रोत के बारे में जो जानकारी मिली जिसे सुनकर सभी आनंदित हो उठे । अंत की प्रार्थना एवं ईश्वर के स्मरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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मूल अंक, पृष्ठ ४६मूल अंक, पृष्ठ ४७