श्रीकृष्ण जन्माष्टमी
30 अगस्त 2021,
परम पूज्य स्वामी गोविंदगिरि जी महाराज के सान्निध्य में कृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव आशू भैया के निवास स्थान पर उल्लास के साथ मनाया गया। सभी साधकों को लाइव टेलीकास्ट यूट्यूब और ज़ूम पर दिखाया गया। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के समारोह में गीता परिवार की अनेकों गतिविधियों को प्रदर्शित किया गया तथा भगवान के श्लोकों से मन प्रफुल्लित हो उठा।
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव समारोह में उन्होंने सभी का स्वागत किया और सभी को भाग्यशाली बताया, स्वामी जी के सान्निध्य में यह कार्यक्रम हो रहा था स्वामी जी स्वयं विद्यमान थे। एक और विशेष बात यह थी कि परम पूज्य स्वामी की गुरु बहन विजया दीदी जो उत्तम संगीतज्ञ है उनके द्वारा अनेकों भजन गाए गयें, सुंदर भजनों का श्रवण करते हुए भक्तिमय वातावरण में सभी गोते लगा रहे थे। ‘कृष्णात् परम किमपि तत्वम् अहं न जाने’ इस प्रकार भाव उजागर हुए। भगवद्गीता श्रीकृष्ण के द्वारा गाया हुआ गीत है जिसे सभी ने स्वामीजी के साथ नये भाव के साथ गुनगुनाया।
आशू भैया के निवास स्थान पर मंदिर को सुसज्जित किया गया। निर्मल व भक्ति पूर्ण वातावरण में फूलों से सुसज्जित मंदिर ऐसा लग रहा था मानो भगवान स्वयं वहाँ दैदीप्यमान है, विष्णुजी की मूर्ति अन्य देवताओं की मूर्ति सब कुछ निखर रहा था। कार्यक्रम का आरंभ विजया दीदी के सुमधुर भजनो द्वारा किया गया। श्याम सुंदर मदन मोहन बंसी के बजैया, राधिकेश, राजेश्वर, योगेश्वर भूमि भार हरण हरी, भक्ति के धरैया।
उन्होंने सुमधुर वाणी में भजन गाया एवं सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। ‘सुनेरी मैंने निर्बल के बलराम’ भक्तिपूर्ण वातावरण था। इसके उपरांत श्रीकृष्ण का कीर्तन हुआ।
‘गोविंद जय जय, गोपाल जय जय। राधा रमण हरि, गोविंद जय जय’, कृष्ण, कृष्ण ,कृष्ण कृष्ण, कृष्ण जयssss।
फिर आशू भैया ने परम पूज्य स्वामी जी को पुष्प माला पहनाई। कृष्णजी का मंदिर देदीप्यमान, प्रकाशमान दिखाई दे रहा था। फिर विजया ताई ने कमल लोचन, कटि पीतांबर अधर मुरली गिरीधरम् मुकुट कुंडल सांवरे राधेवरम् भजन गाया। जैसे ही रात्रि के 12:00 बजे, नंदलाल श्रीकृष्ण के जन्म उत्सव मनाने की तैयारी शुरू हो गई। सभी बहुत ही उत्साहित थे सभी इंतजार का समय पूर्ण हुआ, स्वामी गोविंददेव गिरि जी महाराज ने कृष्ण भगवान की मूर्ति का अभिषेक किया पंचामृत से, मूर्ति को दही, दूध, शहद, घी, से स्नान समर्पित किया गया। कृष्ण की मूर्ति को चांदी के छत्र के नीचे सिंहासन पर विराजित किया गया तथा मूर्ति को स्वामी जी ने नमन किया, गुलाब की पंखुड़ियों से पुष्प वर्षा की गई, भजन से वातावरण गूंज रहा था, श्रीकृष्ण गोविंद हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेव...इसी तरह से कृष्ण भगवान की पूजा की गई । फिर से स्वामीजी ने स्वयं गाना शुरू किया- ‘गोपाला गोपाला देवकी नंदन गोपाला। गोपाला गोपाला देवकी नंदन गोपाला।’
ठीक 12 बजे कृष्ण जन्म मनाया गया कृष्ण आरती, पूजा, अर्चना की गई, आनंदमय भक्ति पूर्ण वातावरण था। मंदिर में तालियों की आवाज गूंज रही थी । सभी साधक ऑनलाइन जूम, लाईव यूट्यूब की सहायता से आनंद उठा रहे थे एवं अपने आपको सौभाग्यशाली व कृतज्ञ मान रहे थे। इसके बाद स्वामी जी ने सभी साधकों हेतु संदेश दिया-
स्वामी जी ने कहा पूरे वर्ष में बहुत सारे त्यौहार आते हैं परंतु आज का त्यौहार विलक्षण त्यौहार है क्योंकि आज हम सभी के लाडले भगवान श्रीकृष्ण का जन्म उत्सव है एवं संत सम्राट ज्ञानेश्वर महाराज का भी जन्म दिवस है। भगवान का अवतरण अर्ध रात्रि में हुआ। अष्टमी के दिन एवं अष्टमी के दिन ही अर्धरात्रि में श्री ज्ञानेश्वर महाराज का भी अवतरण हुआ। ऐसा लगता है कि श्रीकृष्ण भगवान भगवद्गीता का प्रतिपादन करने के लिए संत रूप में ज्ञानेश्वर महाराज के रूप में पधारे हैं। भगवान श्रीकृष्ण का व्यक्तित्व, अलौकिक तत्व, दिव्य मधुर कथाएं सभी विस्तार का विषय है उन्होंने कहा लक्ष्मणपुरी
अर्थात् लखनऊ में बैठे-बैठे उनका ध्यान मथुरा, वृंदावन में जा रहा है आळंदी की ओर जा रहा है, भगवान श्रीकृष्ण का जन्मदिवस सारे विश्व के लिये मंगल दिवस हैं। भगवान श्रीकृष्ण अनेकों रुप में पधारे हैं, धर्म के संस्थापना करने के लिए एवं उन्होंने स्वयं ही कृष्णरूप में तो अपनी सारी कलाओं को प्रकट करके लोगों को आनंद दिया। जिसका वर्णन भगवान सुखदेव जी महाराज ने दसवें स्कंध के पूर्ण एक श्लोक में कर दिया भगवान स्वयं कैसे हैं इसका अद्भुत वर्णन है सबसे पहले वर्णन में भगवान कृष्ण का जब जब स्मरण होता है तब तब उनके मुखाग्न का स्मृतह्रास का वर्णन होता है एवं अत्यंत प्रेम भरा होता है। उनके वाक्य कैसे हैं, उनके वाक्य विस्तृत है। वे सब को एक साथ लेकर चलना चाहते हैं जो मार्ग वेदों ने, उपनिषदों ने, अनेकों ऋषि-मुनियों ने भगवान से मांगा वह यह है -
ओम्(ॐ) असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मामृतं गमय।।
तुकाराम महाराज ने कहा - आप जो बोलेंगे कृष्ण उसी का आनंद लेते हैं भगवान स्वयं इस प्रकार का अद्भुत, दिव्य, चरित्र, दर्शन हम लोगों के समक्ष निरंतर रखते रहते हैं और आज ज्ञानेश्वर महाराज का भी जन्मदिन है तो संत श्री गुलाबराव महाराज की वाणी का भी सुंदर अनुकरण करते हुए यही कहा कि यदि जीवन को संपूर्ण बनाना है तो एक ही काम किया जाये, मस्तक में श्री ज्ञानेश्वर महाराज का ध्यान करना एवं हृदय में गोविंद का ध्यान करना। स्वयं भगवान कृष्ण का ध्यान करना, जो अपने आप विवेक एवं प्रेम से परिपूर्ण है। ऐसे ही अपना जीवन भरपूर बन जाता है और पूर्ण हो जाता हैं। हमारे द्वारा किया गया कार्य विश्व के लिए मंगल कार्य करने वाला हो जाता है। आज का यह दिन हम सब लोगों के लिए अविस्मरणीय है और इस उत्सव में आप सब लोगों के साथ मेरा होना सौभाग्य की बात है। इसका पूर्ण श्रेय आशू भैया जी गोयल को जाता हैं। मैं सभी का हार्दिक अभिनंदन करता हूँ, बधाई दी और हम सभी इस प्रकार श्री ज्ञानेश्वर भगवान की गुरु रूप में एवं कृष्ण भगवान की आराध्य रूप में आराधना करते चलेंगे हमारा जीवन आनंद यात्रा बनता चला जाएगा एवं इस आनंद यात्रा में सबको साथ लेकर चलना हैं, फिर संपूर्ण विश्व आनंदमय हो जाएगा। हमें भी श्रीकृष्ण भगवान व ज्ञानेश्वरी महाराज के दर्शन से ही विवेक प्राप्त होता है ज्ञान प्राप्त होता है एवं कार्य करने की शक्ति प्राप्त होती है। इसी भक्ति में जीवन की सार्थकता है। स्वामी जी ने कहा - जय कन्हैया लाल की, जय कन्हैया लाल की । हाथी-घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की। प. पू. स्वामी जी ने अपनी वाणी को विराम देते हुए अपना संदेश पूर्ण किया।
तदुपरांत आशू भैया ने सभी मित्र, शिक्षार्थी, सेवार्थी, सभी गीता प्रेमी जो संपूर्ण विश्व से जन्माष्टमी के कार्यक्रम में जुड़े हुए थे उन्हें श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की बधाई देते हुए सभी को अनुपम भक्ति मिले उनके गीतामयी साधना व गीता सबके जीवन में सार्थक हो इसी बात के साथ कार्यक्रम को पूरा किया गया सभी का धन्यवाद कहा।

