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गीता मैत्री अंक १जून से अक्टूबर २०२१
०२संत वाणी

स्वागत - ‘गीता मैत्री’ का

स्वागत - ‘गीता मैत्री’ का

।।ॐ।।

गीता-गोरस उपनिषदों का
कृष्ण-कन्हैया बाँट रहे
सुनकर दौड़े बालक सारे
धूम मची, सब लूट रहे

ग्वाल बाल - बालाएँ अगनित
जुटकर गीता सीख रहे
गीता पढ़ें, पढ़ायें कैसे
यह प्रयास कर देख रहे

धन्य हुआ आभासी परदा
गीता-गान चला ऐसा
वर्षावधि का विवरण इसमें
एकत्रित है सुंदर सा

'गीता-मैत्री' हम सबकी यह
जनम-जनम तक बनी रहे
मधुरिम है यह यात्रा मित्रों
टोली अपनी जमी रहे

मार्ग० कृ. २
युगाब्द. ५१२३
दि. २१.११.२०२१

स्वामी गोविंददेवगिरि

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