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गीता मैत्री अंक १जून से अक्टूबर २०२१
०८चारधाम यात्रा

स्तर २ (L2) के विभिन्न उद्घाटन समारोह

फूलों की कोमल पंखुड़ियाँ, बिखरें जिनके अभिनंदन में,
मकरन्द मिलाती हों अपना, स्वागत के कुंकुम चंदन में।
फिर से आया स्तर दो है, पुन: इतिहास दोहराने को,
गीता-प्रेमियों को पुन: उत्साहित करने, पुन: जयघोष लगाने को।।

स्तर-2 (Level-2), गीता यात्रा का दूसरा पड़ाव है। स्तर-1(Level-1) में गीता के प्रशिक्षार्थी, गीता के दो अध्यायों, 12वें और 15वें का शुद्ध उच्चारण सीख कर, स्तर-2(Level-2) में प्रवेश कर पाते हैं। स्तर-2(Level-2) अथवा अन्य किसी भी स्तर (Level) में, परीक्षा उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता नहीं है। स्तर-2(Level-2) में चार अध्याय सिखाये जाते हैं(16,9,14,17)। स्तर-2 (Level-2) को प्ले स्कूल से जूनियर स्कूल कि ओर जाना कहा जा सकता है। स्तर-1(level-1) में “गीता गुंजन” की परीक्षा, गीता के दो अध्याय, शुद्ध उच्चारण के साथ पढ़ कर उत्तीर्ण की जा सकती है।स्तर-2 (Level-2) में आने पर “गीता जिज्ञासु” की परीक्षा दी जा सकती है जहां 12वें,15वें और 16वें अध्याय को कंठस्थ करना होता है।अब तक स्तर-2(Level-2) के 10 बैच प्रारंभ किये जा चुके हैं। हर बैच में प्रशिक्षार्थियों की संख्या उत्तरोत्तर बढ़ती ही जा रही है।

हर समारोह का शुभारंभ प्रार्थना, श्लोक और दीप प्रज्ज्वलन द्वारा किया जाता है। गीता परिवार के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष और गीता विशारद डॉ संजय जी मालपाणी के अनुसार गीता के चार स्तरों की यात्रा चार धामों की यात्रा के समान है। दूसरा स्तर(Level) इस यात्रा का दूसरा पड़ाव है। आगे के धामों के दृश्य भी बहुत मनोहर हैं। उन्होंने अपने विविध व्याख्यानों में भी ‘गीता रूपी अलौकिक ग्रंथ का मानव जीवन में महत्व’ पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवद्गीता मन को सुदृढ़ बनाने वाली व्यायामशाला और मन को सुंदर बनाने वाला ब्यूटी पार्लर है।गीता, विश्व के व्यवस्थापन और समत्व का सबसे बड़ा ग्रंथ है।उन्होंने गीता के प्रसिद्ध श्लोक ‘प्राणापानौ समौ कृत्वा’ एवं ‘उद्धरेदात्मनात्मानम्’ श्लोकों को उद्धृत करते हुए मन के आत्मिक उद्धार की बात कही।

गीता परिवार के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और उत्तर भारत के प्रभारी व गीता विशारद डॉ.आशू जी गोयल, जो गीता परिवार में ऑनलाइन गीता कक्षाओं के प्रोग्राम डायरेक्टर भी हैं, उन्होंने विभिन्न बैच के शुभारंभ समारोहों में प्रशिक्षार्थियों का स्वागताभिनन्दन किया तथा कोरोना महामारी के समय शुरु की गई ऑनलाइन गीता कक्षाओं के बारे में बतलाया कि, इन कक्षाओं की आशातीत सफलता के बारे में उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी। उन्होंने सभी प्रशिक्षार्थियों से आत्म कल्याण के लिए गीता कक्षाओं के चारों स्तर (Level) को चार धाम रूपी यात्रा मान, पूर्ण करने का आह्वान किया। किसी भी विघ्न-बाधा से गीता की कक्षा छूटनी नहीं चाहिए।

ये उथल पुथल उत्ताल लहर, पथ से ना डिगाने पायेगी।
पतवार चलाते जाएँगे, मंजिल आयेगी आयेगी।।

उन्होंने गीता के सोलहवें (16) अध्याय का विवेचन करते हुए इस अध्याय में प्रथम तीन श्लोकों में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा बताये गये 26 दैवी गुणों के विषय में भी बतलाया कि कैसे हम इन दैवी गुणों को आत्मसात् कर अपना कल्याण कर सकते हैं।आशूभैया और संजय भैया दोनों ने, गीता परिवार में निःस्वार्थ भाव से सेवा दे रहे सभी प्रशिक्षकों, तकनीकी सहायकों, विभिन्न विभागों के कार्यकर्ताओं, एडमिशन, आई.टी.,परीक्षा विभाग, गीता प्रचार विभाग आदि सबका अभिनन्दन और धन्यवाद ज्ञापन किया।

गीता परिवार के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और दक्षिणांचल के प्रभारी श्री हरिनारायण व्यास जी ने भी विभिन्न समारोहों में गीता के नये प्रशिक्षार्थियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने बताया कि वे स्वयं गीता कक्षा में स्तर-4 (Level-4) के विद्यार्थी हैं। संस्कृत का पूर्व ज्ञान न होने पर भी, अत्यंत सरलता से गीता जी के श्लोकों का शुद्ध उच्चारण कर पा रहे हैं।
स्तर-2 (Level-2) के विभिन्न समारोहों में प्रशिक्षार्थियों से संवाद का सत्र रखा गया। सभी ने गीता कक्षा में प्रवेश लेने के बाद, जीवन में आये परिवर्तन और अपने चित्त में उत्पन्न शांति के बारे में बतलाया तथा गीता परिवार, इसके प्रशिक्षकों और अन्य सभी सहयोगियों के प्रति आभार व धन्यवाद व्यक्त किया।

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