मुख्य सामग्री पर जाएँ
गीता मैत्री अंक १जून से अक्टूबर २०२१
१६मनोगत

मनोगत

ಗೀತಾ ಪರಿವಾರ ಕೇವಲ ಗೀತಾ ಪಠಣವನ್ನಷ್ಟೇ ಕಲಿಸಲಿಲ್ಲ. ಜೊತೆಯಲ್ಲಿ ಸಮಯ ಪಾಲನೆ, ಸೌಜನ್ಯ, ಸಮನ್ವಯ, ಸಂಯಮ, ಸೇವಾಭಾವ, ಸಂಘಟನೆ, ಮುಂತಾದ ಹಲವಾರು ಜೀವನ ಪಾಠಗಳನ್ನೂ ಕಲಿಸಿದೆ.

ಈ ಕಲಿಕೆಗೆ ಕಾರಣವಾದ ಗೀತಾ ಪರಿವಾರಕ್ಕೆ ಮತ್ತು ಗೀತಾ ಪರಿವಾರದ ಎಲ್ಲ ಗುರುವೃಂದಕ್ಕೆ ಅನಂತ ವಂದನೆಗಳು

Manjunatha D S
Bengaluru

---

40 ನಿಮಿಷ ನಡೆಯುವ ತರಗತಿಗೆ ದಿನದಲ್ಲಿ ನಮ್ಮ ಅನುಕೂಲದಂತೆ ಸಮಯವನ್ನು ಆಯ್ಕೆ ಮಾಡುವ ಸವಲತ್ತು ಇದೆ. ಕೆಲಸಕ್ಕೆ ಹೋಗುವ ನಾನು ಮುಂಜಾನೆಯ ತರಗತಿಗೆ ಸೇರಿದೆ.

ಗುರು ಹಿರಿಯರ ಆಶೀರ್ವವಚನದೊಂದಿಗೆ ತರಗತಿಯಶುಭಾರಂಭ. ದೇಶವಿದೇಶಗಳಿಂದ ವೀಕ್ಷಣೆ.

Yashoda Shetty
Mumbai

---

Poem: I was a bird trapped in a maze
with so many confusion
it was the favor of God
I was introduced to Geeta Parivar which
opened my doors
and lead me to the charming life

Tides have their perfect time
like that I chose mine
I tried my whole life
to get up early but never did
but that first day accomplished it

The moon was chosen to be bright
From infinite stars
I had the opportunity to do my best
It feels on the top of the world
When God makes me recite Shlokas

On Saturday,
my head was full of a pierce pain trying
to push its way out through eyes
the clock finally had a right angle it was
seven pm
time for geeta arth vivechan
I went and sat, I listened and smiled
Headache disappeared like a bubble

The confusions were solved
I was able to see roads of paths
it brought me a new life
I was a bird who freely flied into the sky

Vaishnavi Kashinath Suryawanshi
Pune, Maharashtra

---

।। गीता परिवार।।

जे करिती निःस्वार्थ सेवा
त्यासी मिळे भक्तीचा मेवा
करूया गीतेचा जगी प्रचार
आपल्या सोबती गीता परिवार

अनेक जुळवूनी सत्संगाचे हात
गीता सांगे कृष्ण वसे देहात
माणूनी त्यांचे अनेक उपकार
आपल्या सोबती गीता परिवार

सकाळ,दुपार आणि संध्याकाळ
न समजती आम्हास वेळ - काळ
-हस्व,दीर्घ आणि उच्चार
आपल्या सोबती गीता परिवार

संथा देऊनी साधकास
करवूनी घेतला गीता अभ्यास
दिले आम्हासी जीवन सार
आपल्या सोबती गीता परिवार

कृष्ण सांगती गीता गीता
जुळूनी येती सर्व समता
दुर्बुद्धिसी देऊनी नकार
आपल्या सोबती गीता परिवार

Sakshi Sanjay Rishipathak
Airoli, Navi Mumbai

ગીતાજી ને....

કૃષ્ણ, તારો શ્વાસ છે, ગીતા
સ્વામીજી, આપનો વિશ્વાસ છે, ગીતા
પરિવાર નો અહીં પ્યાર છે,. ગીતા
સમજણ નો અહીં. સાર છે,. ગીતા
ગુરુ નુ અહીં સમર્પણ છે,. ગીતા
શિષ્યો ની અહીં સંભાળ છે,. ગીતા
જગતના પ્રશ્નો નો અહીં જવાબ છે, ગીતા
વેદો નો અહીં રણકાર છે, ગીતા
જીવન ની તુ અમૂલ્ય ભેટ છે અહીં, ગીતા
માનવ માનવ કેરો સેતુ અહીં છે, ગીતા
ભટક્યા મન ની અહીં સ્થિરતા છે, ગીતા
અમ ભક્તિ નું સાધન છે અહીં ગીતા
અમ પરિવાર ના શત શત પ્રણામ, ગીતા
કૃષ્ણ, તારો શ્વાસ છે,. ગીતા
સ્વામીજી, આપનો વિશ્વાસ છે,. ગીતા

Jayshree Soni

---

जय श्री कृष्ण ,

मी सौ. पौर्णिमा निबंधे. अमेरिकेत वास्तव्याला आहे. गीतापरिवारातून लेवल १ मध्ये गीता शिकत आहे. आज माझं मनोगत लिहायला बसले आणि संत तुकाराम व संत ज्ञानेश्वर यांच्या अभंगाची आठवण झाली. खरोखरच कुठेतरी याची छोटी सुरुवात झाली असेल आणि आज त्याचा प्रचार, प्रसार यांना देश, प्रांत, भाषा, सीमा यांचे कुठलेही बंधन न राहता ते अखंड प्रवाह प्रमाणे वाहत चालले आहे.

Poornima Nibandhe
Dallas USA

---

मेरा मनोगत

(प्रभाव)

ऐसा कहते हैं की, कोई दुर्घटना अगर घटती है तो उसके साथ मे या पीछे कुछ अच्छा हो होता ही है। मनुष्य स्वभाव है कि बुरी घटना के साथ जुड जाता है एवं साथ मे आई अच्छी बात को नजर अंदाज करता है, एवं बेहतर भविष्य की संभावनाओं को अंधकारमय कर देता है।

जी हाँ, मै कोरोना काल की बात कर रहा हूँ. जब सारा समाज भयकारक व अंधकारकारक स्थिति से गुजर रहा था, तब एक गीता संथा वर्ग की एक तेजोमय ज्योति पूजनीय गुरुदेव श्री गोविंददेव गिरी जी महाराज के करकमलों से प्रज्वलित हो रही थी।

आज न केवल हिंन्दुस्थान मे, बल्कि अखिल जगत मे लाखों लोगो तक यह ज्योति गीता ज्ञान प्रकाश पहुँचा रही हैं। गीता परिवार के माध्यम से गीता संथा वर्ग ने यह ज्ञान स्त्रोत श्रीमद्भगवद्गीता के भक्तियोग यह बारहवे अध्याय से सिखाना शुरु किया। संकट से निपट जाने हेतु भक्ति में शांति मिलेगी ऐसा विचार कर जो भक्तजन भगवान का सहारा ढूँढने लगे थे वह सहज ही गीता परिवार से जुड गये। जिन लोगो को भक्ति क्या होती है, कैसी की जाती हैं, इसका ठीक ज्ञान भी नही था वह भी जुड गये, और धीरे धीरे भक्तिभाव से भक्तियोग समझने लगे।

भगवान कहते है कि यदि भक्ति करना नही आये तो किया हुआ हरेक कर्म मुझे अर्पित कर और अपने कर्म करते रहो, तब ये आसान सी बात कितने ही जन समझ गये और आनंद की कुंजी उन्हे मिल गयी।

अब एक एक अध्यायी/साधक प्रचारक बनकर यह यज्ञ मे आहुती डालता गया और सारा जगत ज्ञानयज्ञ मे शामिल होता गया. नि:स्वार्थ हेतु से प्रज्वलित यह ज्ञान यज्ञ/ ज्योति दिन दिन ज्यादा ज्यादा लोगोंको प्रभावित करता जा रहा हैं। मनोगत के अंतिम छोर पर गीता परिवार के संत जनों का उपकार व आभार व्यक्त करता हूँ। मनोगत व्यक्त करने के और क्षण अगर चलकर प्राप्त हुए तो मै उपकृत रहूँगा।

जय श्रीकृष्ण

Sharad l. Godbole
Kandivali, Mumbai

22 एप्रिल रोजी मी स्तर१ च्या वर्गाला मी प्रवेष्टित झालो आणि गीता परिवार या प्रचंड मोठ्या परिवाराशी माझे नाते जुळले ते तत्क्षणीच.
आता पाहता पाहता 2 रा स्तर वर्ग ही पूर्ण केला.
गुरुतुल्य प्रक्षिशक अपर्णा मालू ताई व शिल्पा कुलकर्णी ताई असो, गीता परिवाराचा आपला विशेष असा एक अभ्यासक्रम शिकवण्याची रीती,पद्धती,उपक्रम तसेच उत्तम लहेजा सर्वत्र सारखाच आहे.
तसेच अगदी तंतोतंत वेळेवरच सुरू होणारे वर्ग असोत,साप्ताहिक पूर्वार्ध ,उत्तरार्धचे विवेचन वर्ग सर्व काही अप्रतिमच आहे.
शिस्तबद्धता ,नम्रता,लाघवीपणा, असे कितीतरी सद्गुण प्रत्येक गीता परिवाराच्या साधकाच्या बोलण्यातून, व्यक्त होण्यातून दिसतात.

Kiran Laxmikant Inamdar
Kamothe, Navi Mumbai

---

।।जीवन का सार है गीता।।

दुनिया की हर समस्या का हल है गीता।
जीवन के कर्मों का फल है गीता।
कृष्ण का साक्षात स्वरूप और वेदों का सार है गीता।

ज्ञान का भंडार,धर्म, अर्थ
काम, मोक्ष का सार है गीता
माया, मोह, लोभ, क्रोध एवं
मोक्ष का आधार है गीता

सब ग्रंथों का सार एवं वेद

Rajkumari Pareek
Jaipur, Rajasthan

---

Jai Shree Krishna

“Jyot se jyot jagate chalo – Prem ki Ganga bahate chalo”

LearnGeeta programme is certainly lighting up the flame of divine learnings of love and spirituality in whoever it is touching. In this 21st century, our day-to-day life is completely controlled by Western values and computerization. The teachings of ancient Hindu scriptures and Sanskrut language have gone out of reach of common people who are forced to learn only through modern education systems through the English medium. In most of the schools in India, Sanskrut language is not being taught.

Learn Geeta movement is a wonderful lead taken by Geeta Parivar to introduce Geeta to the society completely free of cost. It is so nice to see people of all ages, from school-going children to senior citizens, are learning to recite the BhagvadGeeta and are successfully able to do so in a short time. While learning the recitation with exact pronunciations from the wonderful teachers, the students are automatically getting a good taste of the rich Sanskrut language and it’s Grammar.

Ashok Deshmukh
Bhopal - MP

---

ஜெய் ஶ்ரீ கிருஷ்ணா...... கண்ணனின் க்ருபை இருந்தால்தான் கீதையை பாராயணம் செய்யும் பேறு நமக்கு கிடைக்கும் .... பெயருக்கு ஏற்ப, கீதா பரிவார் நம் எல்லோரையும் வாசுதேவ குடும்ப உறுப்பினர்களாக மாற்றி விட்டது என்று தான் நாம் பெருமிதம் கொள்ள வேண்டும்...பரிவும் ஷ்ரத்தையும் கொண்டு நம் ஆசிரியர்கள் சுத்தமான உச்சரிப்புடன் கீதையை நம்மை சொல்ல வைத்து கிருஷ்ணனின் க்ருபைக்கு நம்மை ஆளாக்குகிறாற்கள்.. ஒவ்வொரு வரியையும் அர்த்தத்துடன் கற்கும் போது மனது பக்குவம் அடைகிறது...மென் மேலும் இத் தொண்டு தொடர கண்ணனை பிரார்த்திக்கிறேன்... ஸர்வம் ஶ்ரீ கிருஷ்ணார்பண மஸ்து...🙏🙇‍♂️ [emoji printed as empty boxes]

Andal Srinath
Chennai

[note: the Tamil text in this box is printed with broken glyph shaping (vowel signs detached, stray pulli dots); it is transcribed as printed, not corrected]

கீதா
பரிவாரில்
கீதத
.
கீதததை கற்க கீதா பரிவாரில்
இதைந்ததன் , அங்குதன்னலமற்றததாை்
தைகை் டுவிைந்ததன், நானும்
இக்குடும்பத்தில் இதைை முைன் தறன் ,
என் முைற்சிதககூடிைதில்மகிழ்ந்ததன்,
வாழ்தகயில் மாற்றம் ஏற்பைை் தத
உைரந் ்ததன் , அதவ என் குடும்பத்திலும்
பிரதிபலிக்க சிலிரத் ்ததன் ,
தபாறுதமயும்,அன்பும்இங்குநிதறவுைன்
தபற்தறன், அததஅள்ளிவழங்குவதில்
கீதாபரிவாரக் ்குநிகர்கீதா
பரிவாதர!!!
ஶ்ரீ கிருஷ் ைரின் கிருதப தமலும் தபற்று
இவரக் ளின் தேதவ
ததாைர வாழ் த்தி வைங் குகிதறன் . தெை்
ஶ்ரீ கிருஷ் ைா

Krithika Manikandan
Dubai

---

एक छोटी सी कविता

गीता परिवार - मूर्तिमंत कर्मयोग
श्रीकृष्णाने सांगितली गीता अर्जुनाला, रणांगणी ।
गीतापरिवाराने रुजवली, ती गीता आपुल्या मनोमनी ।। १ ।।
भगवंताची दिव्य अमृतवाणी,
तशी प्रशिक्षकांची गोड मधुर गीता शिकवणी ।
गीतेचा प्रवाह सतत चालतो माझ्या श्वासाश्वासातूनी ।।२।।
सुप्रभाती, गीतामृत प्रतिदिनी,
आणि साप्ताहिक अर्थ सत्राचे पक्वान्न सेवूनी ।
तृप्त आम्ही, संतुष्ट बहु, ‘गीता - अमृत भोजनी’ ।।३।।
एकमेवाद्वितीय ‘गीता - ज्ञानाचे’
दिव्य अलौकिक अखंड सेवा कार्य पाहुनी ।
सु-नियोजनाची आणि कौशल्यपूर्ण अध्यापनाची कमाल ही
किती करावी वाखाणणी ।।४।।
माझ्यासाठी तर गीता-परिवाराची ही
गीतारूपी सुवर्णकाठीची अमूल्य भेट म्हातारपणी ।
अर्थ-रुपी मोत्यांचे लेवूनी घुंगुरमणी,
श्लोकांच्या गोड चालीने, रंगबिरंगी सजलेली, मनमोहिनी ।।५।।
वाहते कृतज्ञतेची कोटी कोटी वंदन सुमने ।
गुरू प.पू. श्रीगोविंदगिरि महाराज चरणी ।।६।।
सर्व प्रशिक्षकांसह, सर्व तंत्र सहाय्यकांना अनेक प्रणाम ।
माझे दोन्ही कर जोडूनी ।।७।।

।। श्रीकृष्णार्पणमस्तु ।।

Geeta Nipanikar
Mulund

---

गीता और परंपरा

सनातन परंपरा कर्मयोग, ज्ञानयोग और भक्तियोग सिखाती है। गीता में भगवान श्री कृष्ण ने इन परंपराओं का विस्तृत वर्णन किया है। भगवान कृष्ण ने गीता में अर्जुन को कर्मयोग के बारे में बताया तो अर्जुन ने संदेह प्रकट किया कि भगवान आप जो कर्मयोग का रहस्य बता रहे है उसका प्रथम प्रयोग मुझ पर है या इसमें भी कोई परंपरा है? यदि मै प्रथम हूँ तो मुझे ये स्वीकार नही है। अर्जुन संदेह से भरा हुआ है यह बात परमेश्वर भी जानते है इसलिये भगवान कहते है-

इमं विवस्वते योगं प्रोक्तवानहमव्ययम्।विवस्वान्मनवे प्राह मनुरिक्ष्वाकवेऽब्रवीत् ॥ (१)

भावार्थ : मैंने इस अविनाशी योग-विधा का उपदेश सृष्टि के आरम्भ में विवस्वान (सूर्य देव) को, विवस्वान ने अपने पुत्र मनु को और मनु ने यह उपदेश अपने पुत्र राजा इक्ष्वाकु को दिया।

एवं परम्पराप्राप्तमिमं राजर्षयो विदु:।स कालेनेह महता योगो नष्टः परन्तप ॥ (२)

भावार्थ:- हे परंतप अर्जुन! इस प्रकार गुरु-शिष्य परम्परा से प्राप्त इस विज्ञान सहित ज्ञान को राज-ऋषियों ने विधि-पूर्वक समझा, किन्तु समय के प्रभाव से यह श्रेष्ठ विज्ञान सहित ज्ञान इस संसार से प्राय: छिन्न-भिन्न होकर नष्ट हो गया। (२)

अत: कर्म योग ज्ञानयोग व भक्ति योग हमारी परंपराएं है।अपनी परंपराओं से परिचय करवाने का कार्य भगवान कृष्ण द्वारा गीता में कहा गया है। गीता हर युग में प्रासंगिक थी, है और रहेगी। बिना जाति, वर्ग और धर्म के भेदभाव के ये सबको मार्गदर्शन देती है। इसीलिये कृष्ण को जगद्गुरु कहते है। गीता मन में उठने वाले सभी संदेहों का समाधान करती है। जीवन से संबंधित सभी प्रकार के प्रश्नों के उत्तर गीता के पास है। यूँ प्रतीत होता है मानो स्वयं भगवान ही हमारी शंकाओं का निवारण कर रहे है। अत: अपनी जड़ो से और परंपराओं से परिचय होने के लिये प्रथम परिचय गीता से ही होना चाहिये। तभी जीवन का उद्देश्य भी ज्ञात होता है।

Nirupama Agarkar
Jabalpur, Madhya Pradesh

उठो,जागो और देखो
क्यों हो सोये हुए?

कभी तो खुद को पहचानो,
कभी तो खुद के लिए कुछ सीखो।
क्यों हो सोये हुए , उठो , जागो और देखो
क्यों हो सोये हुए?

न जाने कितने दिन व रातें,
हमने कुछ सीखे ही गवाये है।
काश गीता परिवार की
ऑनलाइन कक्षा का पता होता,
फिर बाद मे पछतावा न होता।।

तेरा वक़्त है उठ जा,
फिर पछताना ना तुमको पड़ेगा।
उठो, जागो और देखो,
गीता परिवार हमारे साथ है।।

Puja Mohata
Biratnagar, Nepal

---

चाहा था गीता पढूं
शुरू और बंद करूं
ना समझ मैं पाती थी
पुस्तक कई तलाशी थीं
तभी एक अवसर मिला
भय मन में था भरा
सामने कठिन लक्ष्य था
समय पाने का प्रश्न था

शिक्षक का सहयोग मिला
धैर्य फिर बढ़ चला
जुड़ती गई स्तर स्तर
हिम्मत बढ़ी भर भर

खुशियां बहुत जीवन में
उतार रही अपने में
अब चित्त कुछ हल्का हुआ
आप सबों की दुआ

मुश्किल से लड़ना सीखा
खुद पर काबू पाया
प्रवृति कुछ है बदली
आपकी सहायता मिली

कसर जो और बाकी है
पूरन अब करनी है
अनुकंपा स्वीकारी है
गीता सेवा करनी है

Abha Maheshwari
New Delhi

---

नेतृत्व

“माखन तो चखा सभीने, दंड का भागी मैं अकेला
ऐसा क्यों अन्याय माते, ऐसा क्यों अन्याय भला”

हर्षित पलों के स्वामी सब,
पर विपदा पर हक ज्यादा है
नेतृत्व की मर्यादा कान्हा
नेतृत्व की (यही) मर्यादा है

वृंदावन में कई बालक
पर संकट में सदा मैं बेचारा
आमोद में थे सब साथी पर
कहां गया तब भाई चारा

संकट भी वही झेल पाते
जिनकी क्षमता ज्यादा है
नेतृत्व की मर्यादा कान्हा
नेतृत्व की (यही) मर्यादा है

रण कितने भी जीते हों
मात्र एक बार रण छोड़ भया
फ़िर भी क्यों जीवन भर माते
रणछोड़ मैं कहलाता रहा

जीतना ही है हर बार
हार एक बार भी कुछ ज्यादा है
नेतृत्व की मर्यादा कान्हा
नेतृत्व की (यही) मर्यादा है

माता पिता हुए बंदी मेरे
जन्मस्थल कारागार हुआ
अबोध नन्हे बालक पर
जन्म से अत्याचार हुआ
विधिलीखित क्यों ऐसा माते
कहो ना मेरे साथ हुआ

ईश्वर भी अवतरीत धरा पर यद्यपि होकर आते हैं
मानव जीवन की मर्यादा से बद्ध स्वयं को पाते हैं
ईश्वर ही इस मर्यादा की रक्षा सब से करवाता है
नेतृत्व की मर्यादा कान्हा, नेतृत्व की मर्यादा है

Dilipkumar Agrawal
Wani, Dist. Yavatmal, Maharashtra

मूल अंक के पृष्ठ देखें ५ पृष्ठ
मूल अंक, पृष्ठ ६७मूल अंक, पृष्ठ ६८मूल अंक, पृष्ठ ६९मूल अंक, पृष्ठ ७०मूल अंक, पृष्ठ ७१